Saturday, April 22, 2017

सनातनी विचार !
यह बात सदा से होते आई जब बहुसंख्यक समाज अपने अधिकारों से उदासीन हो जाता है ! तब अल्पसंख्यक- बहुसंख्यकों के अधिकारो को जबरदस्ती छिनने में भी पीछे नहीं हटे !
33 करोड़ देवी-देवता भी जब-जब अपने अधिकारों और जुम्मेवारी से उदासीन हुए तब-तब अल्पसंख्यक राक्षसों के द्वारा स्वर्ग से भगाये गये, और दर-दर भटके है ..
सावधान !
'' नयाल सनातनी''
रामराज्य वादी चिन्तक विचारक
9849702915

Saturday, November 12, 2016

एकमात्र वर्ड लीडर ( विश्व समुदाय ) के नेता घोषित होंगे मोदी जी !
भारत वासियों का ही नहीं एशिया का सौभाग्य है बहुत अर्से के बाद इस महाद्वीप में विश्व को सही मार्गदर्शन देने वाला नेता के रूप में उभर कर आये है भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ।
जनवरी में ओबामा के कार्यकाल पूरा होते ही वर्ड लीडर के रूप में पूरा विश्व श्री मोदी जी को अपना लीडर के रूप में देखने लगेगा । क्योकि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुद अमेरिका वाले अपना नेता नहीं मान रहे उनके चुने जाने के बाद भी उनको अपना राष्ट्रपति मानने से इंकार कर रहे हैं तो पूरा विश्व कैसे स्वीकार करेगा अपना नेता ! वैसे भी ट्रम्प ने हमारे पीएम मोदी जी के नाम पर उनके इटायल पर चुनाव जीता है अमेरिका में । अबकी बार ट्रम्प सरकार !----
रही बात एक और माहशक्ति चीन और उनके राष्टपति वे सदा से माह स्वार्थी रहे है और वे हमेशा ही लकीर के फ़क़ीर ही रहेंगे । वे अपने ही देश के हित में सोचते है विश्व समुदाय की उनको कभी चिंता नहीं रही ! स्वार्थी मनुष्य को कोई भी अपना नेता क्यों मानेगा ? वह चाहे भारत का हो या विश्व में कही का भी वह कभी अच्छा लीडर नहीं हो ही नहीं सकता !
मोदी जी ने आज भारत में अनेको लोक-कल्याणकारी योजनाओं और सुधार वादि नीतियों , आधुनिक विश्व के साथ कदम-ताल करती योजनाओं से भारतीयों को तो अपना मुरीद बना ही दिया है उसके साथ पूरा विश्व को एक परिवार की तरह देख रहे मोदी की हर बात में हमारे सनातन संस्कारों की झलक से विश्व मोहित सा हो रहा है ( वसुधैवकुटम्बकं ) जो श्री राम का सपना था , जो श्री कृष्ण का सपना था , जो भरत की नीति थी , अशोक सम्राट का सपना था, जिस सपने से चाणक्य ने एक गडरिये को राजा बना कर विश्व कल्याण की ओर कदम बढ़ाया था । हमें गर्व होना चाहिए उसी नीति पर विश्व एक परिवार की नीति पर आज हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी चल रहे है ।
मोदी जी हर उस बात को विश्व मंच पर पूरे जोर-सोर से उठाते है जिनसे विश्व में शांति हो ! आतंकवाद ग्लोबल वर्मिंक आदि जिन मुद्दों को उठाने से विश्व के नेता पीछे भागते है ।
मोदी जी भारतियों के अलावा विश्व को भी अपना नाम भूलने नहीं देते ! जैसे ही लोगो का ध्यान उनसे हटता है वे कुछ ऐसा करते है कि विश्व उनकी ओर देखने लगता है । जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, 1000 के नोट बंदी, रूस से लड़ाकू विमान खरीद सौदा, अफगानिस्तान को बड़ी मदद , नेपाल को मदद फिर चीन की ओर अधिक झुकाव होने पर पडोशी धर्म को समझाना, जापान से परमाणु समझौता , अमेरिका से बराबरी में आँखों में आँखें डाल कर बड़े-बड़े डील आदि ।
आने वाला कल भारत का बड़ा सुनहरा होगा यह अभी से लगने लगा है पूरा भारत ही नहीं विश्व समुदाय मान रहा है इसलिए विश्व के पूंजीपति भारत में अपना धन लगाने में सुरक्षित महसूस कर रहे है यह बहुत बड़ी उपलब्धि है भारत वासियों के लिए ।
मोदी जी हर मोर्चे पर सफल है पर एक मोर्चे पर उन्होंने देश के करोडो गौ भक्तों और गाय को माँ मानने वालों का दिल भी दुखाया है ! जो लोग गाय में अपने इष्ट की परिछाई देख गौवंश को बचाने में लगे है उनको ही किसी नीच व्यक्ति की सलाह पर गुंडा और नकली गौ भक्त का तमगा देकर अपने लिया प्रार्थना करने वाले हाथों में कमी करा गए ।
तिलक लगा कर सबसे पहले हम गौ भक्तों ने तुमको मोदी जी गौरक्षा हेतु भेजा था भूल न जाना भक्त अपने इष्ट के बल पर जो राजगद्दी देता है वह अपने इष्ट के बल पर छीन भी लेता है ! भक्त की भक्ति के आगे भगवान भी नत मस्तक हो जाते है ---
भगवान मोदी जी को यह सद बुद्दी जल्द से जल्द देंगे गाय का कत्लेआम इस देश में हमेशा के लिए बंद होगा यह हमें पूर्ण विश्वास है । गाय की रक्षा के बिना वर्ड लीडर तो बना जा सकता है ! पर श्री राम-श्री कृष्ण जैसा सदा में ह्रदय में बसने वाला, मंदिरों में पूजा जाने वाला देव नहीं बना जा सकता यह बात मोदी जी को समझ जानी चाहिए ।
जिस दिन मोदी जी ने गाय को अबध्या घोषित कर दिया, जिस दिन गौ माँ का कत्लेआम बंद हो गया इस देश से तो ।। मैं "नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास ।। वह पहला व्यक्ति हूँगा जो मोदी जी को श्री राम-श्री कृष्ण की तरह पूजने लगूंगा ।
मोदी जी अधिक देर न करें गौरक्षा में हर रोज आपके और हमारे सिरों से 1 लाख माँ से भी बड़ी गौ माँऊ का साया उठ रहा है । ऐसा न हो आपका वह नारा सिर्फ सगुफा रह जाय जो चुनाओं में आपकी पार्टी ने वोट लेने के लिए लगाया था भोले -भाले गौभक्तों से ---
।। मोदी को मत दान-गाय को जीवन दान ।।
और भारत से सदा के लिए भारत की प्राण देशी गौवंश समाप्त हो जाय !!
"नयाल सनातनी" 9849702915
संस्थापक अध्यक्ष :- सर्वदलीय गौरक्षा मंच- हैदराबाद

Friday, November 11, 2016

AINA INDIA: गाय रक्षा के लिए सरकार पर धावा बोला- Report by S.Z...

AINA INDIA: गाय रक्षा के लिए सरकार पर धावा बोला- Report by S.Z...: सर्वदली य गौ रक्षा मंच एवं  गौरक्षा महा संघ गोपाष्टमी पर गाय की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पर धावा बोला।  सर्वदलिये गौ रक्षा मंच एव...

Sunday, October 23, 2016

जन्तर-मन्तर पर घटित सच्ची घटना !
सनातन शास्त्रों का मत है भगवान भोले नाथ को भजने वाले शिव लोक में , देवी के उपासक मणिद्वीप में , गणेश को आराध्य मानने वाले गणेश के लोक में , सूर्य और विष्णु के सच्चे भक्तों का स्थान वैकुण्ठ में सुनिश्चित होता है ।
आध्यत्म के शिखर पर अपना स्थान बनाये आदि शंकर के नये अवतार संसार के अब तक के एक मात्र धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज किस मत किस देव के अनुयायी थे आखिरी दिनों में ही यह भेद खुला !
जब बिरला जी और बहुत बड़े-बड़े महाराज जी के अनुयायी उनसे एक बार जिद कर पूछे की आपके इष्ट कोन है ? आप नित्य बाबा विश्वनाथ शिव का अभिषेक करते है , जय राम श्री राम जय जय राम से अपना कोई भी प्रवचन आदि शुरू करते है और सबको गाय की भक्ति का उपदेश देते है और आजीवन गाय की लड़ाई लड़ते रहे है । तब बहुत भक्तों के प्रयास के बाद स्वामी जी ने बताया कि शिव-राम में अंतर नहीं मेरे इष्ट शिव के भी जो इष्ट है वही है "इष्ट देव मम बालक रामु" और गाय की भक्ति का उपदेश एवं गाय की सेवा रक्षा का उपदेश मैं इसलिए देता हूँ "गाय परम सत्य" है इस पृथ्वी लोक में । भगवान कृष्ण को आप भजन करों पर गाय की तरह भगवन कृष्ण प्रत्यक्ष नहीं दिखते और आपकी सेवा वे प्रत्यक्ष स्वीकार कर रहे है या नहीं वह आपको मालूम नही पड़ती ! पर गाय उस अनंत ब्रह्माण्ड नायक कृष्ण की वह कृति है जो उनके बामांग से प्रकट हुई है वह आपकी सब सेवा - पूजा प्रत्यक्ष स्वीकार करती है और साथ ही साथ अमूत भी देती है । यह भी श्री कृष्ण का वचन है कि जो गाय की सेवा करेगा उसको अन्य किसी देवता की पूजा-सेवा करने की आवश्यकता नहीं क्योकि एक समय 33 करोड़ देवो ने गाय के शरीर में ही निवास बनाया था । और जो भी गाय या गौवंश की सेवा करता है उससे वचन वद्द होने के कारण सभी देवी-देवता सदा प्रसन्न रहते है । अतः देवताओं की पूजा सेवा में भूल चुके होने से जो पूजा कर्म में अपूर्णता आ जाती है उसे गाय की सेवा- पूजा पूर्ण कर देती है । यानि गाय गौवंश की सेवा पूजा के बिना कुछ आपकी देवो की पूजा भी पूर्ण नहीं । बड़ा से बड़ा यज्ञ कर लो देवताओं को भोग पहुचाने जिससे देवता पुष्ट होते है । अगर गौ घृत से नहीं किया तो देवता स्वीकार नही करते । देवता बलहीन होना पसंद करते है पर गाय के घी से हुए बिना यज्ञ का भाग स्वीकार नहीं करते । आज जितने यज्ञ हो रहे हैं उनमें से वही यज्ञ पूर्णहुति को प्राप्त होते है जो गाय के बिना मिलावटी घी के सहयोग से होते है बर्ना सब आग में डाल कर बर्बाद किया राशन के सामान है ।
स्वामी करपात्री जी महाराज की बातों को ब्रह्म लेख मानने वाला उनका कट्टर अनुयायी मैं "नयाल सनातनी" जब पिछले साल 7 नवम्बर को अपनी बीमारी की वजह से गौ भक्त शहीद संतो को श्रद्धांजलि देने दिल्ली नहीं पहुच पाया जो की में कई वर्षो से लगातार जाता रहा हूँ तो बड़ा आत्म ग्लानि से भर गया बिस्तर में लेट-लेट संकल्प कर लिया 7 को 3 से गुणा करने से जो योग आएगा उतने दिनों तक जन्तर-मन्तर पर बैठ कर उन संतो को श्रधानजली देते हुए ब्रह्म वैवर्त पुराण में जो सबसे बड़ा मन्त्र मुक्ति हेतु बताया गया उसका जप करूँगा और उन संतों को अर्पित कर दूंगा जो वहां शहीद हुए थे । मैंने किया भी वही 1 दिसंबर से 21 दिसंबर तक मैं जन्तर-मन्तर में बैठा रहा वही नारायण क्षेत्र में जपा जाने वाला महामंत्र जप करता रहा । मेरे लिए जन्तर-मन्तर भी नारायण क्षेत्र इसलिए बन गया कि आधुनिक स्वामी करपात्री के ही रूप संत गोपाल दास जी को जब पता चला मैं जन्तर-मन्तर पर तप कर रहा हूँ तो उन्होंने मेरे लिए दूध देने वाली दो गाये एक नंदी भेज दिया और उन गायो की सेवा के लिए दो सेवक भेज दिए एक नाम था दयालु दूसरे का नाम फौजी । जहाँ नारायण की गाय वहां नारायण क्षेत्र । जब 7 दिन बीत गए भारी ठण्ड थी रोज सुबह और रात में नाख लाल हो जाती थी । मच्छरों का आतंक ऐसे जैसे दुश्मन मुल्क से आतंकी भेजे हो ! 7वे दिन एक साधरण से कपडे में एक महात्मा आये और मेरे आसान के पास बैठ गए मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया वहां नित्य ही अनेक लोग-और महात्मा भेष में लोग आते रहते है और अपना सुझाव देते रहते थे । वे बोले कब से बैठे हो हमने कहाँ आज 7वा दिन है 21 तक बैठेंगे सांसदों से सत्याग्रह कर रहे है और नारायण नाम जप रहे है और मन बड़ा विचलित है क्योंकि आज सातवे दिन तक कुछ गिने- चुने लोग ही यहाँ आये है जबकि सबको मालूम है कि गौ रक्षा हेतु सांसदों से सत्याग्रह चल रहा है ।
तो वे बोले मैं यहाँ से वहां इस जन्तर-मन्तर पर 4 बार घुमा हूँ प्रत्येक पंडाल पर देखा सब अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे है कोई पैन्सिन के लिए लड़ रहे है, कोई जमींन जर जोरू और जमींन के लिए और राजनैतिक लड़ाई के लिए अनेक लोग यहाँ बैठे है । पर तुम और तुम्हारा यह पांडाल गाय को सामने करके गौवंश की लड़ाई लड़ रहे हो इससे बड़ा पूण्य का काम मुझे और कोई नहीं दिखता ।
मन लगाकर जिस काम के लिए घर-परिवार त्याग कर हैदराबाद से यहाँ आये हो, जितने दिन का संकल्प करके बैठे हो वह काम पूरा करके ही यहाँ से जाना । तुम्हारी सफलता -असफलता यहाँ कोई माने नहीं रखती पर तुम्हारी दृण प्रतिज्ञा की कही न कही सुनवाई जरूर होगी । वह जो पल- पल का हिसाब रखता है क्या उसे मालूम नहीं एक बालक उसकी भी आराध्या गायों के हित में भूखे प्यासे यहाँ लड़ाई लड़ रहा है । इस कलिकाल में जब मानव एक घंटा गाय जैसे विषय पर जीवन भर बात नहीं करता तुम 21 अमूल्य दिन दे रहे हो । पीछे मत हटाना मिलेगा कुछ नहीं पर मिलेगा सबकुछ !
कह कर चले गए । उनकी अटपटी बात सुन मुझे कुछ समझ में नहीं आया ! तो मैं अपने जप माला में जप करने लगा और उनकी ओर से ध्यान हटा दिया जैसे ही माला पूरी हुई उस तरफ देखा वे महात्मा नहीं दिखे । मैंने बाद में सबको बताया एक महात्मा ने ऐसा कहाँ पर किसी ने अधिक ध्यान नहीं दिया । तभी उसी दिन पांडेय जी आये और ऐसा लगा जैसे जन्मो के साथी है और हमेशा के लिए जुड़ गए अनेको लोगो का आना तब से प्रारम्भ हो गया । भारत के अलावा इटली और जर्मनी आदि की मीडिया भी आके गई अनेक लोगो ने इंटरव्यू लिए कैसे 21 दिन बीत गए पता ही नहीं चला !
18 तारीख से हम ठाकुर रामपाल सिंह और संत गोपाल दास जी के साथ अनेक सांसदों से मिले । पालियामेन्ट चल रहा आप कृपया गाय का प्रसन्न संसद में उठाइये सबने कहा हाँ । पर कोंग्रेश संसद चलने दे तब न ! माननीय शिव सेना सांसद चंद्र कान्त खैरे जी से भी मिले उन्होंने कहाँ हम कल आपका प्रसन्न उठाएंगे । हम सभी संसद भवन में उस दिन की कार्यवाही देखने अंदर पहुच गए पर कोंग्रेश के सांसदों ने एक मिनट के लिए भी संसद नहीं चलने दी किसी को कोई प्रसन्न करने का मौका ही नहीं था ।
हम चले आये 21 तारीख को माननीय सांसद श्री खैरे जी ने संसद में गाय को राष्ट्र माता राष्ट्रिय प्राणी की मांग की और संत जी को फोन करके बताया आज संसद में आपका प्रसन्न उठाया गया । अगले दिन सभी अखबारों में वह खबर थी शिव सेना के मुख पत्र में बड़ा सा समाचार था । 21 को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में हमारे मित्र डॉ मित्तल साहब की गौ शास्त्र नामक किताब का लोकार्पण था । जहाँ उनकी कृपा से हमें 10 मिनट का सभी उपस्तिथ सांसदों और मंत्रियो के साथ गौ भक्तो को संबोधित करने का मौका मिला और सभी ने हमारा सम्मान भी किया जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी ।
इसलिए गाय साधारण नहीं असाधरण है । गाय माँ नहीं माँ से बढ़कर कर है , गाय देवता नहीं देवताओं की देवता है । गाय दिव्य नहीं दिव्यतम है । बस आपका संकल्प सत्य हो आपकी भक्ति और सेवा में खोट न हो । संसार के लोगो को निचा दिखाना और अपने को ऊँचा उठाना ही आपका मकसद न हो । तो गाय बहुत कुछ यहाँ और सबकुछ वहां देती है ।
यही "पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे सहनं" से कोई मुक्ति दे सकती है तो वह ही गाय । क्योकि वैतरणी पर राम-कृष्ण, शिव,सूर्य या गणेश को भी वह अधिकार नहीं की किसी भक्त का हाथ पकड़ कर पार लगा दे । वहां तो सिर्फ गाय का ही पूछ पकड़ कर ही वैतरणी पार हो सकती है यह सभी देवताओं का एक मत में लिया गया निर्णय है ।
उसी गौ भक्ति से लबरेज इस बार फिर 1 से 8 नवम्बर तक मैं अपने कुछ साथियों के साथ शून्य होकर उसी स्थान पर गोपाल नाम का जप करने और अपने उन वीर गौ भक्त शहीद संतों को श्रधानजली देने जा रहा हूँ । अगर आपके पास थोड़ा समय हो तो जरूर मेरा साहस बढ़ाने उन महात्मा की तरह जरूर आना ! ताकि मैं और मेरे साथी आराम से अपनी 8 दिन की तपस्या पूरी कर सकें ।
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास, स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी, राम राज्य वादि चिंतक- विचारक । हैदराबाद
जय गौ माता जय गोपाल , जय नंदीश्वर जय महाकाल ।
जन्तर-मन्तर पर घटित सच्ची घटना !
सनातन शास्त्रों का मत है भगवान भोले नाथ को भजने वाले शिव लोक में , देवी के उपासक मणिद्वीप में , गणेश को आराध्य मानने वाले गणेश के लोक में , सूर्य और विष्णु के सच्चे भक्तों का स्थान वैकुण्ठ में सुनिश्चित होता है ।
आध्यत्म के शिखर पर अपना स्थान बनाये आदि शंकर के नये अवतार संसार के अब तक के एक मात्र धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज किस मत किस देव के अनुयायी थे आखिरी दिनों में ही यह भेद खुला !
जब बिरला जी और बहुत बड़े-बड़े महाराज जी के अनुयायी उनसे एक बार जिद कर पूछे की आपके इष्ट कोन है ? आप नित्य बाबा विश्वनाथ शिव का अभिषेक करते है , जय राम श्री राम जय जय राम से अपना कोई भी प्रवचन आदि शुरू करते है और सबको गाय की भक्ति का उपदेश देते है और आजीवन गाय की लड़ाई लड़ते रहे है । तब बहुत भक्तों के प्रयास के बाद स्वामी जी ने बताया कि शिव-राम में अंतर नहीं मेरे इष्ट शिव के भी जो इष्ट है वही है "इष्ट देव मम बालक रामु" और गाय की भक्ति का उपदेश एवं गाय की सेवा रक्षा का उपदेश मैं इसलिए देता हूँ "गाय परम सत्य" है इस पृथ्वी लोक में । भगवान कृष्ण को आप भजन करों पर गाय की तरह भगवन कृष्ण प्रत्यक्ष नहीं दिखते और आपकी सेवा वे प्रत्यक्ष स्वीकार कर रहे है या नहीं वह आपको मालूम नही पड़ती ! पर गाय उस अनंत ब्रह्माण्ड नायक कृष्ण की वह कृति है जो उनके बामांग से प्रकट हुई है वह आपकी सब सेवा - पूजा प्रत्यक्ष स्वीकार करती है और साथ ही साथ अमूत भी देती है । यह भी श्री कृष्ण का वचन है कि जो गाय की सेवा करेगा उसको अन्य किसी देवता की पूजा-सेवा करने की आवश्यकता नहीं क्योकि एक समय 33 करोड़ देवो ने गाय के शरीर में ही निवास बनाया था । और जो भी गाय या गौवंश की सेवा करता है उससे वचन वद्द होने के कारण सभी देवी-देवता सदा प्रसन्न रहते है । अतः देवताओं की पूजा सेवा में भूल चुके होने से जो पूजा कर्म में अपूर्णता आ जाती है उसे गाय की सेवा- पूजा पूर्ण कर देती है । यानि गाय गौवंश की सेवा पूजा के बिना कुछ आपकी देवो की पूजा भी पूर्ण नहीं । बड़ा से बड़ा यज्ञ कर लो देवताओं को भोग पहुचाने जिससे देवता पुष्ट होते है । अगर गौ घृत से नहीं किया तो देवता स्वीकार नही करते । देवता बलहीन होना पसंद करते है पर गाय के घी से हुए बिना यज्ञ का भाग स्वीकार नहीं करते । आज जितने यज्ञ हो रहे हैं उनमें से वही यज्ञ पूर्णहुति को प्राप्त होते है जो गाय के बिना मिलावटी घी के सहयोग से होते है बर्ना सब आग में डाल कर बर्बाद किया राशन के सामान है ।
स्वामी करपात्री जी महाराज की बातों को ब्रह्म लेख मानने वाला उनका कट्टर अनुयायी मैं "नयाल सनातनी" जब पिछले साल 7 नवम्बर को अपनी बीमारी की वजह से गौ भक्त शहीद संतो को श्रद्धांजलि देने दिल्ली नहीं पहुच पाया जो की में कई वर्षो से लगातार जाता रहा हूँ तो बड़ा आत्म ग्लानि से भर गया बिस्तर में लेट-लेट संकल्प कर लिया 7 को 3 से गुणा करने से जो योग आएगा उतने दिनों तक जन्तर-मन्तर पर बैठ कर उन संतो को श्रधानजली देते हुए ब्रह्म वैवर्त पुराण में जो सबसे बड़ा मन्त्र मुक्ति हेतु बताया गया उसका जप करूँगा और उन संतों को अर्पित कर दूंगा जो वहां शहीद हुए थे । मैंने किया भी वही 1 दिसंबर से 21 दिसंबर तक मैं जन्तर-मन्तर में बैठा रहा वही नारायण क्षेत्र में जपा जाने वाला महामंत्र जप करता रहा । मेरे लिए जन्तर-मन्तर भी नारायण क्षेत्र इसलिए बन गया कि आधुनिक स्वामी करपात्री के ही रूप संत गोपाल दास जी को जब पता चला मैं जन्तर-मन्तर पर तप कर रहा हूँ तो उन्होंने मेरे लिए दूध देने वाली दो गाये एक नंदी भेज दिया और उन गायो की सेवा के लिए दो सेवक भेज दिए एक नाम था दयालु दूसरे का नाम फौजी । जहाँ नारायण की गाय वहां नारायण क्षेत्र । जब 7 दिन बीत गए भारी ठण्ड थी रोज सुबह और रात में नाख लाल हो जाती थी । मच्छरों का आतंक ऐसे जैसे दुश्मन मुल्क से आतंकी भेजे हो ! 7वे दिन एक साधरण से कपडे में एक महात्मा आये और मेरे आसान के पास बैठ गए मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया वहां नित्य ही अनेक लोग-और महात्मा भेष में लोग आते रहते है और अपना सुझाव देते रहते थे । वे बोले कब से बैठे हो हमने कहाँ आज 7वा दिन है 21 तक बैठेंगे सांसदों से सत्याग्रह कर रहे है और नारायण नाम जप रहे है और मन बड़ा विचलित है क्योंकि आज सातवे दिन तक कुछ गिने- चुने लोग ही यहाँ आये है जबकि सबको मालूम है कि गौ रक्षा हेतु सांसदों से सत्याग्रह चल रहा है ।
तो वे बोले मैं यहाँ से वहां इस जन्तर-मन्तर पर 4 बार घुमा हूँ प्रत्येक पंडाल पर देखा सब अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे है कोई पैन्सिन के लिए लड़ रहे है, कोई जमींन जर जोरू और जमींन के लिए और राजनैतिक लड़ाई के लिए अनेक लोग यहाँ बैठे है । पर तुम और तुम्हारा यह पांडाल गाय को सामने करके गौवंश की लड़ाई लड़ रहे हो इससे बड़ा पूण्य का काम मुझे और कोई नहीं दिखता ।
मन लगाकर जिस काम के लिए घर-परिवार त्याग कर हैदराबाद से यहाँ आये हो, जितने दिन का संकल्प करके बैठे हो वह काम पूरा करके ही यहाँ से जाना । तुम्हारी सफलता -असफलता यहाँ कोई माने नहीं रखती पर तुम्हारी दृण प्रतिज्ञा की कही न कही सुनवाई जरूर होगी । वह जो पल- पल का हिसाब रखता है क्या उसे मालूम नहीं एक बालक उसकी भी आराध्या गायों के हित में भूखे प्यासे यहाँ लड़ाई लड़ रहा है । इस कलिकाल में जब मानव एक घंटा गाय जैसे विषय पर जीवन भर बात नहीं करता तुम 21 अमूल्य दिन दे रहे हो । पीछे मत हटाना मिलेगा कुछ नहीं पर मिलेगा सबकुछ !
कह कर चले गए । उनकी अटपटी बात सुन मुझे कुछ समझ में नहीं आया ! तो मैं अपने जप माला में जप करने लगा और उनकी ओर से ध्यान हटा दिया जैसे ही माला पूरी हुई उस तरफ देखा वे महात्मा नहीं दिखे । मैंने बाद में सबको बताया एक महात्मा ने ऐसा कहाँ पर किसी ने अधिक ध्यान नहीं दिया । तभी उसी दिन पांडेय जी आये और ऐसा लगा जैसे जन्मो के साथी है और हमेशा के लिए जुड़ गए अनेको लोगो का आना तब से प्रारम्भ हो गया । भारत के अलावा इटली और जर्मनी आदि की मीडिया भी आके गई अनेक लोगो ने इंटरव्यू लिए कैसे 21 दिन बीत गए पता ही नहीं चला !
18 तारीख से हम ठाकुर रामपाल सिंह और संत गोपाल दास जी के साथ अनेक सांसदों से मिले । पालियामेन्ट चल रहा आप कृपया गाय का प्रसन्न संसद में उठाइये सबने कहा हाँ । पर कोंग्रेश संसद चलने दे तब न ! माननीय शिव सेना सांसद चंद्र कान्त खैरे जी से भी मिले उन्होंने कहाँ हम कल आपका प्रसन्न उठाएंगे । हम सभी संसद भवन में उस दिन की कार्यवाही देखने अंदर पहुच गए पर कोंग्रेश के सांसदों ने एक मिनट के लिए भी संसद नहीं चलने दी किसी को कोई प्रसन्न करने का मौका ही नहीं था ।
हम चले आये 21 तारीख को माननीय सांसद श्री खैरे जी ने संसद में गाय को राष्ट्र माता राष्ट्रिय प्राणी की मांग की और संत जी को फोन करके बताया आज संसद में आपका प्रसन्न उठाया गया । अगले दिन सभी अखबारों में वह खबर थी शिव सेना के मुख पत्र में बड़ा सा समाचार था । 21 को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में हमारे मित्र डॉ मित्तल साहब की गौ शास्त्र नामक किताब का लोकार्पण था । जहाँ उनकी कृपा से हमें 10 मिनट का सभी उपस्तिथ सांसदों और मंत्रियो के साथ गौ भक्तो को संबोधित करने का मौका मिला और सभी ने हमारा सम्मान भी किया जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी ।
इसलिए गाय साधारण नहीं असाधरण है । गाय माँ नहीं माँ से बढ़कर कर है , गाय देवता नहीं देवताओं की देवता है । गाय दिव्य नहीं दिव्यतम है । बस आपका संकल्प सत्य हो आपकी भक्ति और सेवा में खोट न हो । संसार के लोगो को निचा दिखाना और अपने को ऊँचा उठाना ही आपका मकसद न हो । तो गाय बहुत कुछ यहाँ और सबकुछ वहां देती है ।
यही "पुनरपि जननं पुनरपि मरणं, पुनरपि जननी जठरे सहनं" से कोई मुक्ति दे सकती है तो वह ही गाय । क्योकि वैतरणी पर राम-कृष्ण, शिव,सूर्य या गणेश को भी वह अधिकार नहीं की किसी भक्त का हाथ पकड़ कर पार लगा दे । वहां तो सिर्फ गाय का ही पूछ पकड़ कर ही वैतरणी पार हो सकती है यह सभी देवताओं का एक मत में लिया गया निर्णय है ।
उसी गौ भक्ति से लबरेज इस बार फिर 1 से 8 नवम्बर तक मैं अपने कुछ साथियों के साथ शून्य होकर उसी स्थान पर गोपाल नाम का जप करने और अपने उन वीर गौ भक्त शहीद संतों को श्रधानजली देने जा रहा हूँ । अगर आपके पास थोड़ा समय हो तो जरूर मेरा साहस बढ़ाने उन महात्मा की तरह जरूर आना ! ताकि मैं और मेरे साथी आराम से अपनी 8 दिन की तपस्या पूरी कर सकें ।
"नयाल सनातनी" गौ चरणों का दास, स्वामी करपात्री जी महाराज का कट्टर अनुयायी, राम राज्य वादि चिंतक- विचारक । हैदराबाद
जय गौ माता जय गोपाल , जय नंदीश्वर जय महाकाल ।

Friday, October 21, 2016

भारतीय आदर्श संत समाज के नाम एक पत्र ! समस्त संत समाज को दास का कोटि-कोटि नमन । दास स्वामी करपात्री जी महाराज का अनुयायी है । और अयोध्या राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष गुरुदेव स्वामी नृत्य गोपाल दास जी महाराज का शिष्य है । साथ में "सर्वदलीय गौरक्षा मंच" हैदराबाद से पंजीकृत संस्था का वर्तमान में अध्यक्ष हूँ । और पिछले 17 वर्षों से स्वामी करपात्री जी महाराज के गौरक्षा आंदोलन से जुड़ा हुआ हूँ । संत भगवान हम अपने गौ भक्त साथियों के साथ स्वामी करपात्री जी महाराज एवं देश के 10 लाख साधु-संतों और गौभक्तों के ऐतिहासिक 1966 के गौरक्षा आंदोलन की 50वी वर्षगाठ पर 1 से 8 नवम्बर 2016 तक जन्तर - मंतर दिल्ली में 9 सूत्रीय मांगों के साथ केंद्र सरकार एवं समस्त पक्ष-विपक्ष के सांसदों से सत्याग्रह ( सत्य का आग्रह * गाय ही परम सत्य है ) करने जा रहे हैं । हमने पिछले वर्ष भी ऐसा ही 21 दिवासित सत्याग्रह 1 से 21 दिसंबर तक जन्तर-मन्तर पर किया था । जिसके परिणाम स्वरुप शिव सेना के माननीय सांसद श्री चंद्र कान्त खैरे जी ने संसद में यह संपूर्ण गौ रक्षा का यक्ष प्रश्न उठाया था । जिसे सभी मिडिया घरानों ने खुल कर छापा । उसी का नतीजा था कि तब से राष्ट्रिय चैनल आज तक,ज़ी न्यूज़, सुदर्शन चैनल आदि अनेक और लगभग सारे मिडिया घराने गाय पर पिछले एक साल में टीवी के माध्यम से एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिए है । और गाय की उपयोगिता को जग जाहिर किये । माननीय सांसद खैरे जी के साथ-साथ उन सभी चैनलो को भी हम धन्यबाद देते है । इस वर्ष हमने सभी पक्ष -विपक्ष के सांसदों को भी निवेदन पत्र देते हुए अभी तक 240 सांसदों तक अपनी बात पहुचाई है । और बाकी के सांसदों को हम 1 से 8 नवम्बर तक होने वाले सत्याग्रह में पत्र लिख कर भेज रहे है । कई सांसदों मंत्रियों से हम मिले भी है जिनका कहना है इस बार शीतकालीन सत्र में वे इसपर जरूर संसद में चर्चा कराएँगे । अब आगे के आंदोलन हेतु आप सभी संतों के पवित्र आशीर्वाद का दास आकांक्षी है । अगर संभव हो तो एक दिन 7 नवम्बर ऐतिहासिक गौरक्षा आंदोलन की 50वीं वर्षगाठ पर दिल्ली आने की कृपा करें ! अगर किसी कारण वस दिल्ली आना संभव नहीं हो पाए तो आप इस आंदोलन में अपने समर्थन देते हुए अपने व्यान को स्थानीय मिडिया में जरूर देने की कृपा करें । क्योकि जब गौरक्षा हेतु शहीद हुए संतों की 100 वी पूण्य तिथि आएगी आप और हम होंगे की नहीं यह राम जी को ही पता होगा ! इसलिए यह मत्वपूर्ण दिन न भूले ।। हमने सरकार एवं सभी सांसदों से जो मुख्य 9 मांग रखी है वे नीचे बैनर में प्रदर्शित है । अगर अज्ञान वस कोई मत्वपूर्ण मांग रह गई हो तो आप संत इस दास को आदेशित करें । उसे भी शामिल किया जा सकता है । किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी हेतु आप दास को कभी भी फोन कर सकते है । "नयाल सनातनी" - 9849702915 जय गौ माता-जय गोपाल, जय नंदीश्वर-जय महाकाल ।
सृष्टि चक्र में कीट से लेकर हाथी तक सब सहायक ।
उत्तराखंड के प्रत्येक गाँव में पहले नंदी अलमस्त घुमते दिख जाते थे ! इन नन्दियों को शिव गण कहाँ जाता था ।लोग इनको पूजते इनको गौ ग्रास देते और कभी कभार खेत -खलिहान से ये थोड़ा बहुत खेती या अनाज खा लेते भी तो उनको हाँक कर भगा देते ! डंडा उठाकर कभी नहीं मारते थे । यह सब आँखों देखि बता रहा हूँ ।
पर ---
समय का चक्र बदला,लोगो की भावना भी बदली, आधुनिकता ने गाँवों को भी अपने आगोश में ले लिए ।पहले लोग अपने पितरों के नाम पर उनकी मुक्ति हेतु नंदी छोड़ देते थे ! अब नहीं के बराबर यह परमपरा रह गई । कुछ तो लोग आधुनिक हो गए कुछ स्वार्थी । स्वार्थी इसलिए की अगर कोई नन्दी छोड़ता है तो दूसरे लोग थोड़ा उनके खेतो में नंदी के चले जाने पर स्वर्ग गए नंदी छोड़ने वाले के पितरो को नरक में भेजने वाली गलियों की बौछार कर देते है । नंदी को डंडों से लहूलुहां कर देते है अलग । परिणाम जो नंदी के भय से रात में उसकी शेर की तरह चमकती आँखों से और शेर जैसी हुंकार से जंगली शुवर, आदमखोर बाघ , लकड़बग्गा दिन में बन्दर आदि जंगली जानवर गाँव की सरहद से दूर रहते थे आज प्रत्येक ग्रामीण के घर के आंगन में तांडव कर रहे है ।
जंगली शुवर तो दिन में बोये बीजो को रात होते होते सफाचट कर दे रहे है । बन्दर घर में घुस कर गुड़ की भेली ले भाग रहे है । आँगन में भोजन करना दुर्भर हो गया है आदमी के एक निवाला खाने से पहले बन्दर झपटा मार सब ले भाग रहे है । बाघ और लक्डबघों की डर से पहाड़ी लोग 7 बजे बाद घर से बहार निकलने में डरते है । नंदी शिव का वाहन है इसलिए जहाँ नंदी हो वहां से भूत-प्रेत बाधा दूर भाग जाते थे क्योंकि जहाँ भूत नाथ शिव का मुख्य गण हो वहां छोटे-मोटे भूत-प्रेतों की क्या औकात है !
पर ग्रामीणों ने नंदी के साथ-साथ गायों को भी गाँव से बहार का रास्ता दिखा कर अपने लिए ही बड़ा भारी गड्ढा खोद लिया । गाय लक्ष्मी का प्रत्यक्ष रूप है पर जब आप लक्ष्मी को गावँ की सरहद में घुसने नहीं देंगे तो कल्याण कैसे होगा !
जिस गाय के गौमूत्र में पितरों को मुक्ति देने वाली "गंगा माँ" निवास कर छुवा-छूत, भूत-प्रेत, अला-बला आदि अनेक ग्रामीण बिमारियों का इलाज सहज ही करती थी । उसी परोपकारी गाय को लोगो ने घर से ही नहीं गावँ की परिधि से दूर भेज दिया और कुछ कलयुग के एजेंट इसका फायदा उठाकर धन के लालच में उनको एक जगह इकट्ठा कर कसाई की गाडी में चढ़ा दिए ।
अब भला जब मनुष्य अपने लिए खुद गड्ढा खोद कर बैठा हुआ हो तो उसको कौन बचाये ।!
अब भी देरी नहीं हुई अगर प्रत्येक ग्रामीण हर गाँव में 2-4 उत्तम नस्ल के नंदी छोड़े और गाय-बैल को फिर से अपने जीवन साथी की तरह अपने घर में स्थान दें तो सब फिर से सूखी हो जायेंगे । उत्तम नस्ल के नंदी सुंदर गौवंश को जन्म देकर अधिक दूध देने वाली गौ वत्सा को जन्म देंगे ।
पहले नंदी दिनभर गावँ के मंदिर में पड़े रहते थे हम बच्चे लोग उसको वही रोटियां खिला आते थे । कुछ माताएं उसको वही घास डाल देती थी । शाम होते ही नंदी अपनी मस्त चाल से गावँ की सरहद में घूमने निकल जाता था। । पर अब 100 गाँवों में घूमने पर भी एक-दो नंदी नहीं दिखते । क्योकि लोगो ने उसे चारा डालना बंद कर दिया है । कुछ नंदी यदा-कदा गाँवों के हाट- बाजारों में दिखते है क्योंकि वहां उनको कुछ दुकानदारों द्वारा फैंक सब्जियों के बचे डंठल आदि मिलता है । और बाकी पोलोथि खाकर जीवन यापन कर रहे है और असमय मृत्य के इंतजार में दिखते है ।
क्या कर दिया है न हमारी आधुनिकता ने ! बाजार बाद ने ! पश्चिम संस्कृति के अपनाने से !!
आ फिर लौट चलें ---
नयाल सनातनी" सर्वदलीय गौरक्षा मंच