Wednesday, July 15, 2015



श्री गिरधर गोपाल गौशाला वचनामृत !
गोपू भक्तिभ्रवेधस्य प्रणवे च दृढा मतिः पुनर्जन्मनि विश्वासः स वै हिन्दुरिति स्मृतः .
अर्थात :-- गौ माता में जिसकी भक्ति हो, प्रवण (ॐ ) जिसका पूज्य मन्त्र हो, पुनर्जन्म में जिसका विश्वास हो – वही हिन्दू है . यह सनातनी, सिख, जैन, बौद्द, आर्य वैदिक – सब में घट जाती है . ये सभी हिन्दु धर्म के मूल रक्षक भी है, और प्रचारक भी ...
 !! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति देव भूमि उत्तराखण्ड !!


श्री गिरधर गोपाल गौशाला वचनामृत !
   यमराज कहते है ! जो पुरुष अपने वर्णधर्म से विचलित नहीं होता, अपने सुहृदय और विपक्षियों में समान भाव रखता है, किसी का धन हरण नहीं करता, न किसी जीव को कष्ट ही पहुचता है, उस अत्यंत रागादिशून्य और निर्मल मन व्यक्तिको भगवान नारायण का भक्त जानो और उसको प्रणाम करने का फल भी नारायण के प्रणाम के फल सामान ही जानो ------ विष्णु पुराण से . 
                !! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति देव भूमि उत्तराखण्ड !!


श्री गिरधर गोपाल गौशाला वचनामृत !
 एक चेतावनी भारत सरकार को  :-- सगोत्र - विवाह, असवर्ण - विवाह, तलाकादि पाप - पूर्ण कुकृत्यों को क़ानूनी प्रोत्साहन देकर हिन्दू - संस्कृति की रज - वीर्य - शुद्दिमूलक व्यवस्था को भ्रष्ट करके ऋषि  -मुनि परम्परा के इस देश में वर्णसंकर सृष्टि की वृद्दि द्वारा राष्ट के सर्वनाश का बीज ना बोया जाय . राजकीय कानून द्वारा गौ – वध यथा शीघ्र बन्द कराकर पवित्र भारत देश में बढ़ता हुआ दैवी प्रकोप तुरंत रोका जाय .....फिर ना कहना देवताओं की भूमि से मार्गदर्शन नही मिला !  
 !! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति देव भूमि उत्तराखण्ड !!  


श्री गिरधर गोपाल गौशाला वचनामृत !
यह है आदर्श बड़ा भाई :-- जब भरत सेना लिए चित्रकूट पर्वत की तलहट्टी में आगये यह समाचार लक्षमण से श्रीराम ने सुना तब राम लक्षमण से कहते है ---
लक्ष्मण ! मैं सत्य और आयुध की शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं धर्म, अर्थ, काम तथा सम्पूर्ण पृथ्वी – सब कुछ तुम्हीं लोगो ( भाइयों ) के लिए चाहता हूँ .
लक्ष्मण ! मैं भाइयों की योग्य- सामग्री और उनके सुख के लिए ही राज्य भी चाहता हूँ. भरत को, तुमको और शत्रुघ्न को छोड़कर यदि मुझे कोई सुख मिलता हो तो उसमें आग लग जाय . वह जलकर भस्म हो जाए .यह था एक भाई का प्रेम क्या आज भी ऐसा भाई प्रेम दिखता है अगर हाँ तो हमारा आदर्श बड़ा भाई राम आज भी इस भारत वर्ष में है समझ लीजिये .
 !! श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति, देवभूमि, उत्तराखण्ड !!


श्री गिरधर गोपाल गौशाला वचनामृत !
सनातनीविचार !
 मानव जीवन के इस महायज्ञं में सफलता पाने के लिए त्याग, तप, मेहनत, ईमानदारी आदि की तो आवश्यकता है ही’’, किन्तु सबसे अधिक आवश्यक है - भगवान की सत्ता, शक्ति और कृपा में अटूट श्रद्दा और अनन्य विश्वास . श्रद्दा और विश्वास से ही हमें वह बल मिल सकेगा, जिससे हम वर्तमान दुखद विधानों में परिवर्तन कर सकें  . और अपने महान लक्ष की प्राप्ति कर सकंगे . .
 !!  श्री गिरधर गोपाल गौशाला समिति देव भूमि उत्तराखण्ड !!