Thursday, January 21, 2016

सनातनी विचार !
मनुष्य के मुख से निकले व्यंग बाण अधिक गहराई तक, (अधिक समय) तक चोट करते हैं, वरन उसके द्दारा चलाये गये तरकस के बाणों के !
द्रोपदि के व्यंग बाण ही थे जो दुर्योधन को अर्जुन के काल समान बाणों, महाबली भीम का दुशासन की छाती फाड कर लहु पी जाने वाला महाकाल रौद्र रुप भी भयभीत नही कर पाया !!!
"नयाल सनातनी"

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