सनातनी विचार !
जो मनुष्य अकारण इधर-उधर थूकता रहता है, पान-तम्बाकू-गुटका खाकर पीक सार्वजानिक स्थानों पर करता है . उसको अगले जन्म में शुकर होकर मानव जाति का थूका और मल खाना पड़ता है ---
''नयाल सनातनी''
जो मनुष्य अकारण इधर-उधर थूकता रहता है, पान-तम्बाकू-गुटका खाकर पीक सार्वजानिक स्थानों पर करता है . उसको अगले जन्म में शुकर होकर मानव जाति का थूका और मल खाना पड़ता है ---
''नयाल सनातनी''
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