Friday, August 26, 2016

सनातनी विचार !
मेरी मृत्य कल-परषों कभी भी हो सकती है ! यह बात ह्रदय में स्वीकार करने वाला जीव व्यर्थ - अनर्थ कार्यों से बचकर सावधानी के साथ भगवान का स्मरण करते हुए भगवत्सेवा के भाव से भर जाता है । कल मारना ही है तो आज पाप सर पर रखके क्यों ले जाओं ? यह भाव प्रबल हो जाता है ।
अतः मनुष्य मात्र को मृत्य को सदा समीप समझना चाहिए ।
"नयाल सनातनी"

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