सनातनी विचार :----
आज - कल लोग दुनिया को वैसे नहीं देखते, जैसी वो वास्तव में है। अपितु वैसे देखते है जैसे वो खुद है । एक पापी को सब संसार पापी नजर आता है, एक भले व्यक्ति को सबमे कुछ न कुछ भलाई दिखती है। असल में ये जीवन का नियम है कि सज्जन को सज्जन और पापी को पापी ही सही तरह से समझ पाता है। पर एक गुरु मन्त्र आज बताते है हम गौ -सेवा, गौ - रक्षण, गौ - कार्य में लगे लोग संत की श्रेणी में आ जाते है। क्योकि गौमाता को भगवान राम ने संत कहा है । संत की सेवा तो कोई संत ह्रदय ही करेगा ना। आइये हम सब संत यानि गौ - प्रेमी बनकर जिनको लोग पापी कहते है उनको भी गौ - सेवा की प्रेरणा देकर, गौ - सेवा में लगा दें और संत बना दें। जय गौमाता की ''नयाल सनातनी'' ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
आज - कल लोग दुनिया को वैसे नहीं देखते, जैसी वो वास्तव में है। अपितु वैसे देखते है जैसे वो खुद है । एक पापी को सब संसार पापी नजर आता है, एक भले व्यक्ति को सबमे कुछ न कुछ भलाई दिखती है। असल में ये जीवन का नियम है कि सज्जन को सज्जन और पापी को पापी ही सही तरह से समझ पाता है। पर एक गुरु मन्त्र आज बताते है हम गौ -सेवा, गौ - रक्षण, गौ - कार्य में लगे लोग संत की श्रेणी में आ जाते है। क्योकि गौमाता को भगवान राम ने संत कहा है । संत की सेवा तो कोई संत ह्रदय ही करेगा ना। आइये हम सब संत यानि गौ - प्रेमी बनकर जिनको लोग पापी कहते है उनको भी गौ - सेवा की प्रेरणा देकर, गौ - सेवा में लगा दें और संत बना दें। जय गौमाता की ''नयाल सनातनी'' ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
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