Thursday, January 2, 2014



सनातनी विचार !
 सभी पार्टियो के राजनेताओं आपसे विनम्र निवेदन इस प्रकार है ! इस वर्ष आंध्राप्रदेश में पंजीकृत ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' देश की राजधानी में संसद के सामने जन्तर - मन्तर पर राष्ट्र हित में गौरक्षार्थ ( गौमाता को राष्ट्रिय प्राणी ) घोषित कराने एक विशाल अहिंसात्मक धरना - प्रदर्शन किया था । उद्देश्य ;--  इस पुण्य भूमि के पुजारियों की सिर्फ इतनी सी मांग थी कि बाघ, मोर आदि पशु - पक्षियों की तर्ज पर गौमाता को भी उसका सदियों से  छीना राष्ट्री प्राणी ( राष्ट्र माता ) हक़ उसे मिले । देश भर में चल रहे लाखो अबैध क़त्ल खाने तुरन्त केन्द्रीय कानून बना कर बंद किये जायें।
       
हमारे आदरणीय नेताओं - महात्मा गाँधी ने कहा था ! गौवंश की रक्षा ईशवर की सारी मूक सृष्टी की रक्षा करना है।  भारत की सुख - समृधि गौवंश के साथ जुडी हुई है | आजादी मिलते ही सबसे पहले देश में गौ - हत्या निषेद कानून लाया जायेगा। पर आजादी के 66 वर्षो के बाद भी महात्मा के कहे शब्द आज तक ब्रह्माण्ड में गूंज रहे है, और महात्मा की आत्मा तड़फ रही है उनकी कही हुई बात मिथ्या साबित कर दी राजनेताओ ने इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा भारत के लिए ?
 प्रधानमंत्री महोदय । आपकी गणना  दुनिया के सबसे बड़े अर्थ शास्त्रियों में होती है। और आपके मत्रिमण्डल में एक दर्जन से ज्यादा अर्थ - शास्त्री है।  ऐसे ही विपक्ष में बैठी सबसे बड़ी पार्टी ''भारती जनता पार्टी'' में भी एक से बड़कर एक अर्थ शास्त्र के जानकर है । पर यह साधारण गौभक्त किसान का बेटा आप लोगो को बताना चाहता है, कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। और मवेशी (गोवंश) कृषि की रीढ़ है, पर केंद्र सरकार गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाना चाहती।  जबकि देसी खाद और बैलों द्वारा खेती, परिवहन से भारत एक समृद्ध राष्ट्र था और आगे भी हो सकता है। आज पेट्रोल का आयात / उर्वरक का आयात- सब्सिडी का झमेला' क्या यही समृद्धि है ?  कीटनाशकों और उर्वरक से फसलें ज़हरीली और भूमि बंजर हो रही है किसान ट्रैक्टर , फर्टिलाइज़र, जेनेटिक बीज के लिए कर्ज़ लेता है और आत्महत्या का आखरी रास्ता चुन लेता है।  क्या खेती की दशा और दिशा ऐसी ही रहेगी। क्या सरकार प्राचीन पद्धतियों को नष्ट नही कर रही है ? विश्व में प्राचीनतम संस्कृति और ज्ञान का केन्द्र रहा है भारत। इस अर्थ में कह सकते हैं कि भारत का दुनिया में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसे भारत की आत्मा है ग्राम । ग्राम का आधार है किसान, किसान का आधार है कृषि, कृषि का आधार है गोवंश और हमारी सरकारे नीव में बम रखने जैसी स्थिति को जन्म देते हुए नित नये - नये कत्लखानो को खुलवाकर -  सब्सीडी देकर गौ - हत्या को बढ़ावा नहीं दे रही है ? जरा गंभीरता से विचार कीजिये भारत के न्याय निर्माताओ । सनातन धर्म जो सदा था सदा रहेगा के अनुसार 33 करोड़ देवी - देवताओ के चलते - फिरते विगृह को किस तरह नष्ट किया जा रहा है इसे देख कर सैतान का भी मन पसीज जाये पर भारत सरकार और राज नेताओं का नहीं । धर्म नष्ट हो रहा है अधर्म का बोल - बाला है। हमारे यहाँ भगवान शिव जिस बैल पर बैठते है उसे धर्म का प्रतिक कहा गया है।  अब बताइये बैल नष्ट तो धर्म नष्ट हुआ की नहीं ?
माननीय सांसद गण ।  गौ  - हत्या का प्रश्न केवल धार्मिक आस्थाओं से ही नहीं जुड़ा है।  बल्कि देश के अर्थतंत्र, पर्यावरण व जलसंकट जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे इससे सीधे प्रभावित होते हैं। आज बड़ी गंभीरता से यह बात कही जाती है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा।  इस दृष्टि से यदि कत्लखानों का विचार करें तो जलसंकट को बढ़ाने में इनकी भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती। एक कत्लखाने में प्रति पशु पांच सौ लीटर पानी लगता है। हिन्दुस्तान टाइम्स के 09 - 04 - 1994 के अंक में प्रकाशित एक रपट के अनुसार कोलकात्ता के मोरी गांव कत्लखाने में 17 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन लगता है। इसके विपरीत एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 25 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि कोलकाता के इस कत्लखाने में करीब 70 हजार लोगों के उपयोग का पानी नष्ट कर दिया जाता है। मुम्बई के देवनार कत्लखाने में 18 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन खर्च होता है। यहां लगभग 74 हजार लोगों के उपयोग का पानी नष्ट कर  दिया जाता है। आंध्र प्रदेश के हैदराबाद स्थित कत्लखाने अल - कबीर एक्सपोर्ट लिमिटेड में 6 हजार 600 पशु प्रतिदिन काटे जाते हैं। यहां 1 लाख 32 हजार लोगों के उपयोग का पानी प्रतिदिन नष्ट कर दिया जाता है। गाय का दूध  25  - 30  रु. प्रति लीटर की दर से मिलता है। जबकि देश में 18 - 20  रु. लीटर पानी बिक रहा है। जिस देश में गाय का दूध नहीं बेचा जाता था उस देश में पानी बेचा जा रहा है। ये कत्लखाने जितना पानी बर्बाद कर रहे हैं उससे पानी का संकट देश में कितना गंभीर होने वाला है यह समझा जा सकता है। इसलिए यह विचार करने की आवश्यकता है कि आज देश में पानी की ज्यादा आवश्यकता है या मांस की ?
देश के राजनेताओं करण धारो । देखिये इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की हत्या का असर बेरोजगारी बढ़ाने में भी हुआ है। 1981- 82 में देवनार मुम्बई में 26 लाख 41 हजार 917 पशुओं का क़त्ल किया गया। इसमें 1 लाख 20 हजार 656 बैल काटे गए। इस कत्लखाने में उस समय 1660 कर्मचारी कार्यरत थे। इसके विपरीत यदि यह पशु धन जीवित रहता तो पशुपालन से 96 हजार 927 लोगों को रोजगार मिलता। इसका अर्थ इस कत्लखाने में उस एक वर्ष की अवधि में ही हजारों लोगों का रोजगार छीन लिया गया। पशुओं से रोजगार का अनुपात है 5 गायों पर 1 व्यक्ति की दर से रोजगार मिलना। देश में कुल खेती का 28 प्रतिशत बड़ी जोत वाले किसान हैं।  जो ट्रेक्टरों से खेती करते हैं जबकि 5 एकड़ से नीचे वाले 72 प्रतिशत छोटे व मझोले किसान हैं। ट्रेक्टर, रासायनिक खाद, कीटनाशक और डीजल की महंगी कीमतों के कारण कृषि फसल का उत्पादन मूल्य बहुत ज्यादा बढ़ गया है। जबकि इसके अनुपात में अनाज की कीमत बाजार में कम होती है। छोटे किसान को यह सीधा घाटा होने के कारण उसको गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इसी कारण लाखों किसानों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में आत्महत्याएं कर लीं। खेती घाटे का सौदा हो जाने के कारण 72 प्रतिशत जो छोटा किसान गांव में रहता था वह शहरों की ओर पलायन कर रहा है। वह शहरों में मजदूरी करके झुग्गी-झोपड़ियों में अभावग्रस्त जीवन जी रहा है। इसके मूल में गाय एवं अन्य पशु धन का खत्म होते जाना और इसके कारण गांवों का उजड़ना है। रासायनिक खादों के उपयोग से विश्व भर में 6 प्रतिशत नाइट्रो आक्साइड की मात्रा बढ़ गई है। इससे भूमि का तापमान बढ़ा है। जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहा जा रहा है और जिसके कारण मौसम चक्र तेजी से बदल रहा है। किसान आन्दोलन में जेल गए सरदार पटेल से जेल में मिलने आया एक अंग्रेज पत्रकार ने पूछने पर कि आपकी "कल्चर" क्या है, सरदार पटेल ने जवाब दिया "माई कल्चर इज एग्रीकल्चर"।
ज्ञानी - विज्ञानी नेताओं समझों । गोवंश की रक्षा किया जाना हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यधिक उपयोगी है। हमारे बजट का बहुत बड़ा हिस्सा रायासनिक खादों और पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर ही खर्च हो जाता है। इससे विदेशी ऋण में लगातार वृद्धि होती है। नेशनल काउंसिल आफ एग्रीकल्चर और नेशनल काउंसिल आफ एप्लाईड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा किए गए एक शोध में बताया गया है कि यदि र्इंधन के रूप में गोबर का तर्कसंगत उपयोग किया जाए तो उससे प्रतिवर्ष 14 करोड़ वृक्षों को कटने से बचाया जा सकता है। हमारे देश में प्रतिवर्ष 50 मिलियन टन खाद की आवश्यकता होती है जिसे गोवंश के गोबर का खाद के रूप में उपयोग करने से बड़ी मात्रा में कम किया जा सकता है। जीव जंतु कल्याण बोर्ड की पत्रिका में उल्लेख किया गया है कि 2004 में अल कबीर कत्लखाने में 1 लाख 82 हजार 400 पशु काटे गए। यदि ये पशु नहीं काटे गए होते तो 910.25 लाख की बचत देश को होती। इतने पशुओं के कत्ल के कारण करीब 910 करोड़ की ऊर्जा भी नष्ट हो गई जो हमें इन पशुओं के जीवित रहने पर प्राप्त होती। जबकि इन पशुओं के मांस विक्रय से मात्र 20 करोड़ का ही लाभ भारत को हुआ। देश में गोधन से प्रतिवर्ष 70 लाख टन पेट्रोलियम पदार्थों की बचत होती है और 60 अरब रुपए का दूध प्राप्त होता है। 30 अरब रुपए की जैविक खाद प्राप्त होती है। 20 करोड़ की रसोई गैस पशु धन से मिलती है। इस तरह गोवंश कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। गोधन भारत का चेतन धन है। चेतन धन की हत्या भारत की हत्या है। अब भी प्रधान मंत्री महोदय एवं सभी पार्टियों के राज नेता आप गौ - हत्या जारी रखना चाहते है इस देश में तो। हम तो यही कहेंगे कि आपलोग इस देश का हित नहीं अहित चाहते है। 
देश भर के विशुद्द देश - प्रेमी, गौ - प्रेमी  ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' परिवार के लाखो सदस्य एवं करोडो शुभ चिन्तक एक बार हिंदुस्तान के सभी पार्टियो ''राजनेताओं''  ( जिनके हाथो में गौ - हत्या निषेध कानून बनाने की ताकत है )  से कर जोड़ विनती करता है, की देश हित में विद्वानों को बुला कर इन बातो की समीक्षा करे अगर कोई भी विद्वान इन बातो को नकार दे तो आप अपने तरीके से देश को चलाने के लिए पहले भी स्वतन्त्र थे आगे भी है। पर जनता की आवाज जनार्दन की आवाज होती है इस बात का जरूर ध्यान रखें।  महोदय, इस खुले पत्र का जबाब आप राजनेताओं के आचरण से सभी गौ - भक्तो को पता चल ही जायेगा जब आप गौ - हित की बात करने लग जायेंगे आपके वक्तव्य अखबारो और टी वी चैनलों में भी देश की जनता देख ही लेगी कि आप कितने गौ - प्रेमी बने है । गौ कि , देश की पीड़ा का बखान , वयान करते हुए अगर आप राजनेताओं के सम्मान में कोई गुस्ताखी हुई हो तो गौ चरणो के दास को अपना जान क्षमा कीजियेगा। आपका देश वासी नागरिक ....
               
                 संस्थापक ;-- राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह नयाल
                                                     ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' परिवार
                                              www.sarvadaliyagaurakshamanch.com
                                                                !! भारत देश !!
                                          

No comments:

Post a Comment