Thursday, February 20, 2014

सनातनी विचार !
एक गौ - तत्व के जानकार चरणों के दास का अपने अनुयाइयों को सन्देश !
!! मम दीक्षा - गौरक्षा !!
ब्रह्मा कहे गाय मेरी बेटी है उसकी नहीं मेरी पूजा - सेवा कर तुझे ब्रह्म लोक दे दिया जायेगा फिर भी गाय की भक्ति न छोड़ना। अगर विष्णु कहे गाय की भक्ति - सेवा छोड़ तुझे विष्णु लोक दे दूंगा मेरी पूजा - सेवा कर ना मानना। अगर भोले बाबा भी एक दिन आ जाये कहे की गाय की भक्ति छोड़ मेरी भक्ति कर मेरे शिव लिंग में जल चढ़ा, काशी आजा तुझे मुक्त कर दूंगा तब भी गौ - सेवा न छोड़ना। क्योकि गौ - प्रत्यक्ष 33 करोड़ देवी - देवताओ का चलता - फिरता देवालय है, इसे तृण - हरा घास खिला देते से ही मुक्ति मिल जायेगी मृत्यु अटल सत्य है अंतिम समय पर बैतरणी पर कोई पत्थर में से उठ कर देवी - देवता आये या न आये पर गाय को घास खिलाया होगा तो वह जरूर मुक्ति पद देने वहाँ खड़ी मिलेगी। यही सत्य है यही अटल सत्य है मनो न मनो मेरा क्या ? ''नयाल सनातनी'' संस्थापक ;--''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
कल हरिद्वार के एक घुमकड़ संत का रात 11 बजे फोन आया उनका कहना था मुझे भी अपने साथ सेवा में ले लो नयाल ! अब ( हरि के द्वार ) हरिद्वार में मन नहीं लगता यहाँ आज के लगभग सभी साधु - संतो ने विशाल पत्थर के जंगलो (आश्रमो में ) देवी - देवताओं के भव्य पत्थर की मूर्तियाँ बिठा कर उनके हाथ में भीख का कटोरा थमा दिया है। प्रत्यक्ष 33 करोड़ देवी - देवताओ के विग्रह,( गौ माता ) को स्थान देना बंद कर दिया है क्योकि पत्थर के मूर्ति कुछ खाती नहीं। गाय - गौवंश सूखी घास मांगती है, बदले में अमृतमय दूध देती है। फिर भी कलि का प्रभाव देखो किसी को कल की सुध नहीं ------ एक घुमकड़ साधु हरिद्वार से - ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
परसो घोडा डोंगरी में एक सद्ग्रहथ ब्राह्मण संत से बात हो रही थी दान पात्र कोन ? उन्होने बताया वैसे तो हम दान लेने के हक़दार है, पर हमसे भी दान लेने की श्रेष्ठ हक़दार गौमाता है जिसके तुम सेवक हो । शास्त्र में साफ - साफ लिखा है की दान अपने से श्रेष्ठ को और दया अपने से निम्न पर करें । जो लोग रास्ते चलते भिखारियो को दो - पाँच रुपिया भीख देते है उसे दान नहीं दया कहते है। जिसे परमात्मा ने ही उसके पूर्व दुष्कर्म के कारण दण्डित किया है,उसे दो - चार - दस का दान या एक कम्बल उढ़ा के हम दानी नहीं हो सकते। उलटा भगवान के द्वारा दण्डित को इनाम देने वाला जरूर बन सकते है। वही अगर गाय को रोटी या दो - चार - दस रुपिये के हरा चारा खिला देते है तो दानी जरूर हो जाते है। क्योकि उस गाय में 33 करोड़ देवताओं को बल और शरण देने की शक्ति है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक ;--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'
सनातनी विचार ! 
गाय के सिंग की खूबियां...
गाय के सिर पर बड़े-बड़े सिंग आपने कई बार देखे होंगे लेकिन शायद ही कभी आपने इनके चमत्कारी खूबियों पर गौर किया होगा....
गाय को शास्त्रों में माता का स्थान दिया गया है।
गाय की सेवा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण गोपाल कहे जाते हैं।
शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि शिवलोक, बैकुण्ठ लोक, ब्रह्मलोक, देवलोक, पितृलोक की भांति गोलोक भी है।
गोलोक के स्वामी भगवान श्री कृष्ण हैं।
गाय का इतना महत्व यूं ही नहीं है।
गाय का दूध माता के दूध के समान फायदेमंद माना जाता है इसलिए बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है।
गाय के गोबर से घर आंगन और पूजा स्थान की शुद्घि होती है।
आपने देखा होगा कि गोपूजा के दिन लोग गाय के सिंग में तेल और सिंदूर लगाते हैं।
कल्याण पत्रिका में इसका वैज्ञानिक कारण बतया गया है है।
गाय के सिंग का आकार सामान्यतःपिरामिड जैसा होता है।
यह एक शक्तिशाली एंटीना के रूप में काम करता है।
सींगों की मदद से गाय आकाशीय ऊर्जाओं को शरीर में संचित कर लेती है।
यह उर्जा हमें गोमूत्र, दूध और गोबर के द्वारा मिलती है।
आपने देखा होगा कि देशी गाय के पीठ पर कूबर निकला होता है।
यह सूर्य की उर्जा और कई आकाशीय तत्वों को शरीर में ग्रहण करने का काम करता है।
यह उर्जा हमें गाय दूध के माध्यम से प्राप्त होता है।
आजकल विदेशी नस्ल की गाय पालने का चलन बढ़ गया है।
जिनके ना तो कूबर होते हैं और सींग भी बढ़ने नहीं दिए जाते हैं।
यही कारण है कि जिन्होंने देशी गाय के दूध का स्वाद चखा है उन्हें विदेशी नस्ल की गायों के दूध में वह स्वाद नहीं मिलता है....।
सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' के संस्थापक अध्यक्ष ;-- धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह नयाल
सनातनी विचार !
भारत में 22000 से अधिक सरकार द्वारा स्वीकृत कत्लखाने है, जिनमे प्रतिदिन 2,50, 000 पशुधन काटता है। और लगभग बैध - अबैध रूप से 1, 0 0,000 गौवंश भी काट दिया जाता है जिसपर कुछ राज्य सरकारो ने पावबंदी भी लगाई है।
इसमें 'अलकबीर ' हैदराबाद प्राइवेट सेक्टर तथा देवनार कत्लखाना, मुम्बई सार्वजनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण कत्लखाने है। अलकबीर कत्लखाने का दृश्य ; यह कत्लखाना जिल्ला मेढक, हैदराबाद में स्थित है। इसे दुबई के गुलाम मौ ० शेख ने भारत सरकार की 400 करोड़ की सहायता से स्थापित किया है। यह 300 एकड़ भूमि में फैला है। इसमें प्रतिदिन 6000 से अधिक गौवंश निमर्मतापूर्वक काटा जाता है।
''नयाल सनातनी'' संस्थापक ;---''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
गौ - हित क्या करे कैसे करें ? गौ - संवर्द्धन आज देश की धार्मिक, आध्यात्मिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक, व्यावहारिक, लैकिक एवं पारलैकिक अनिवार्य आवश्यकता है । गौ - संवर्द्धन साहित्य ख़रीदकर, प्रकाशित कर लोगों में दान करें । आज सबसे बड़ा ''महादान'', पुण्य - परमार्थ यही है । क्योकि संतो - विद्वानों का कहना है एक सही सद - साहित्य मनुष्य की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' ने 6 - 7 अप्रेल से आज तक 1 लाख 9 हजार का साहित्य अब तक फ्री वितरण किया है। जिनमें कई बड़े राज नेता, फ़िल्म के लोग,आम - तथा खास लोग और साधु - संत भी है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
सनातनी विचार !
मित्रो कल श्री श्री रविशंकर जी महाराज के साथ 3 घण्टे बिताने को मिला संतो की कृपा इस दास को सदा ही मिली है ये सौभाग्य है गौ चरणो के दास का । उनके अमृत वचनों से जो दिशा हमें कल मिली उसका सार आप मित्रो तक पहुचें यह उद्देश है हमारा। श्री श्री जी ने आगे कहाँ एक ( वॉच मैन ) चौकीदार को भी बिल्डिंग की रखवाली करने के लिए 24 घंटो में 3 बार बदला जाता है। पर देश के चौकीदार बन कर देश को लूटने वालो को 10 वर्ष से यह देश क्यों झेल रहा है। ये लोग बहुत थक गए है इनको आराम दो और इस बार वोट देने हर कोई निकले एक स्थापित सरकार को लाओ क्योकि अस्थिर सरकार देश का सबसे बड़ी दुशमन है। वह देश हित में कोई कार्य नहीं कर पाती। ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
देखिये पॉलिथीन क्या करती है गाय के पेट का हाल !! हमारी लापरवाही ही हमारी माँ की जान लेती है। एक  गाय के पेट से 40 किलो पोलोथीन निकला है। गौ हित में जारी बुलेटिन ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''की ओर ---
सनातनी विचार !
गौमाता का विहार ! सभी गौशालाओ से निवेदन गौमाता को कैद नहीं आजादी दें । गौशाला में कम से कम इतनी जगह हो की उसके अंदर घूमते हुए गायों को प्रतिदिन 4 किलोमीटर की यात्रा हो जायें और गौवंश को नित्य धूप स्नान कराना भी अनिवार्य है । जहाँ ये बात का ध्यान रखा जाता है वहाँ का गोवंश स्वस्थ होगा ही इसमें सन्देश नहीं। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष :-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, February 8, 2014

सनातनी विचार !
''हिन्दू सनातन धर्म'' छोड़ने पर अगर मुझे इन्द्रपद भी मिलता है तो मैं इंद्र पद को भी ठोकर मारकर उस स्वयम्भू ''सनातन वैदिक धर्म'' की पूजा- अर्चना गरीबी में करके प्रसन्न रहूगा। जिसने राम,कृष्ण और गौमाता को भी जन्म दिया ...जय हिन्दू राष्ट्र .
(लेकिन कुछ स्वार्थी लोग मामूली सा मंत्री पद पाने के लिए धर्म ही बदल रहे है धिक्कार उनके जीवन पर )


सनातनी विचार !
अगर प्रत्येक गृहणी अपने घर में सिर्फ गाय के दूध की मांग कर दे, तो बताओ आपकी इस छोटी पहल से लाखो गोवंश बच सकता है और इस तरह हर माँ गौरक्षा - आन्दोलन में सामिल हो सकती है। वह पुण्य जो देवताओ को भी दुर्लभ है कलिकाल में गौरक्षा, गौसेवा का वह पुण्य आप सहज ही प्राप्त कर सकती है। तो बताओ दिव्य देह धारी माताओ आप इस आन्दोलन में घर बैठे सामिल होंगी ?
सनातनी विचार !
गौ रक्षा भी राष्ट्र रक्षा है .
आप भारतीय है तो समझिए कि गाय हमारी माता है। गो दुग्ध स्वास्थ्य सुख दाता है।
आप किसान है तो कृषि गोरक्ष वाणिज्यं के अनुसार काम किजीए।

आप व्यवसायी है तो अर्थव्यवस्था का आधारभूत गाय को बचाने के लिए धन दीजिए।
आप सरकारी या गैर सरकारी कर्मचारी है तो साथ काम आने वाले को गाय का महत्व समझाइए।
आप विचारक हैं तो बुद्धि-बल तेज बढ़ाने के लिए गौ दुग्ध पीजिए।
आप संत-महन्त हैं तो गौ दुग्ध का ही भोग लगाइए।
आप भी प्रेमी है तो कत्ल को जाने से रोकी गई गायों को सम्भालिएं।
आप पुलिस है तो कानून की अवहेलना कर गाय-बैलों को कत्लखाने पहंचाने वालों को पकडि़ये।
आप वकील है तो पशु व्यापारियों के चंगुल से गाय-बैल छुड़ाने वाले लोगों का उत्साह बनाए रखने के लिए निःशुल्क मुकदमा लडि़ये।
आप न्यायाधीश है तो संवीधान द्वारा सुरक्षित गाय को मारने ले जाने वाले को अपराधी मानकर दण्डित कीजिए।
आप पशु व्यापारी है तो देश की अपार संपदा को नष्ट करने वाले गो व्यापार बन्द कीजिए।
आप कसाई है तो गाय पर छुरी चलाकर राष्ट्रघात मत कीजिए।
आप लेखक है तो गाय के आर्थिक, सांस्कृतिक पक्ष को उजागर करने वाली रचना कीजिए।
आप पत्रकार हैतो गाय के संबंधित समाचारों को प्रमुखता दीजिए।
आप संवेदनशील है तो अपना मर्यादित आत्मभाव पीडि़तों तक पहॅंचाने के लिए गौसेवा कीजिए।
आप चिन्तक है तो लोगों के चित्त-चरित्र को प्रभावित कीजिए जिससे गौरक्षा मूलक, स्थानीय उद्योग प्रधान लोकशिक्षण परिणाम दिखाए और 21 वीं सदी रोशन हो जाए।केवल भारतीय गाय के दूध-घी का उपयोग करना चाहिए।
जब यज्ञ करें तो भारतीय गाय के घी का ही उपयोग करें ।
माताएं बहने व भाई पंचगव्य से बनी हुई सौन्दर्य प्रसाधन एवं अन्य सामग्री का ही उपयोग करें।
राष्ट्र- एवं स्वहित में गौरक्षा। क्या इनमे से आप कोई भी एक उपाय अपना सकते है ?
देश हित में ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार'' द्वारा जारी बुलेटिन नयाल सनातनी ..................
सनातनी विचार !
गो माता भारत ही नहीं पूरे विश्व की भी आत्मा हैं। गो पर प्रहार मानवता पर कलंक है। गो, वेद, गायत्री व ब्राह्माण की अवहेलना कुल का नाश करना है। गाय परम पवित्र व स्वर्ण की सोपान होती है। तभी योगीराज भगवान श्री कृष्ण जैसे महापुरुषों ने गोसेवा की। गाय की अर्चना करना पुण्य का काम है। कोई भी मनुष्य गाय की सुरक्षा के विरोध में नहीं खड़ा हो सकता है। गोहत्या की बात तो दूर रही उसे मारना, भूखी रखना, जहर देना, नशा देना व कठोरता से हाकना भी शास्त्रों में निषेध है।''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
सनातनी विचार !
महात्मा गांधी की दृष्टि में गौ रक्षा का महत्व

गाय भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। हमारे देश का संपूर्ण राष्टजीवन गाय पर आश्रित है। गौमाता सुखी होने से राष्ट सुखी होगा और गौ माता दुखी होने से राष्ट के प्रति विपत्तियां आयेंगी, ऐसा माना जा सकता है।

गाय को आज व्यावहारिक उपयोगिता के पैमाने पर मापा जा रहा है किंतु यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आधुनिक विज्ञान की सीमाएं हैं। आज का विज्ञान गाय की सूक्ष्म व परमोत्कृष्ट उपयोगिता के विषय में सोच भी नहीं सकता। भारतीय साधु, संत तथा मनीषियों को अपनी साधना के बल पर गाय की इन सूक्ष्म उपयोगिताओं के बारे में ज्ञान प्राप्त किया था। इसलिए ही उन्होंने गाय को गौमाता कहा था। भारतीय शास्त्रों में गौ महात्म्य के विषय में अनेक कथाएं मिलती हैं।

गाय का सांस्कृतिक व आर्थिक महत्व है। संक्षेप में कहा जाए तो भारतीय ग्रामीण अर्थ व्यवस्था का आधार गाय ही है। गाय के बिना भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कल्पना तक नहीं की जा सकती।

महात्मा गांधी एक मनीषी थे। वह भारतीयता के प्रबल पक्षधर थे। उनका स्पष्ट मत था कि भारत को पश्चिम का अनुकरण नहीं करना चाहिए। भारत को अपनी संस्कृति. विरासत व मूल्यों के आधार पर विकास की राह पर आगे बढना चाहिए। गांधी जी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक हिन्द स्वराज में लिखा है – अंग्रेजों के विकास माडल को अपनाने से भारत, भारत नहीं रह जाएगा और भारत सच्चा इंगलिस्तान बन जाएगा।

गांधी जी का यह स्पष्ट मानना था कि देश में ग्राम आधारित विकास होने की आवश्यकता है। ग्राम आधारित विकास के लिए भारत जैसे देश में गाय का कितना महत्व है, उनको इस बात का अंदाजा था। गांधी जी ने गौ रक्षा को हिन्दू धर्म का केन्द्रीय तत्व कहा है। गांधी जी कहते थे कि जो हिन्दू गौ रक्षा के लिए जितना अधिक तत्पर है वह उतना ही श्रेष्ठ हिन्दू है। गौरक्षा के लिए गांधी जी किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार थे।

महात्मा गांधी ने गाय को अवमानवीय सृष्टि का पवित्रतम रुप बताया है। उनका मानना था कि गौ रक्षा का वास्तविक अर्थ है ईश्वर की समस्त मूक सृष्टि की रक्षा। उन्होंने 1921 में यंग इंडिया पत्रिका में लिखा “ गाय करुणा का काव्य है। यह सौम्य पशु मूर्तिमान करुणा है। वह करोड़ों भारतीयों की मां है। गौ रक्षा का अर्थ है ईश्वर की समस्त मूक सृष्टि की रक्षा। प्राचीन ऋषि ने, वह जो भी रहा हो, आरंभ गाय से किया। सृष्टि के निम्नतम प्राणियों की रक्षा का प्रश्न और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईश्वर ने उन्हें वाणी नहीं दी है। ” ( यंग इंडिया, 6-11-1921)

गांधी जी ने अत्यंत मार्मिक शब्दों में लिखा – “ गाय अवमानवीय सृष्टि का पवित्रतम रुप है। वह प्राणियों में सबसे समर्थ अर्थात मनुष्यों के हाथों न्याय पाने के वास्ते सभी अवमानवीय जीवों की ओर से हमें गुहार करती है। वह अपनी आंखों की भाषा में हमसे यह कहती प्रतीत होती है : ईश्वर ने तुम्हें हमारा स्वामी इसलिए नहीं बनाया है कि तुम हमें मार डालो, हमारा मांस खाओ अथवा किसी अन्य प्रकार से हमारे साथ दुर्वव्यहार करो, बल्कि इसलिए बनाया है कि तुम हमारे मित्र तथा संरक्षक बन कर रहो।” ( यंग इंडिया, 26.06.1924)

महात्मा गांधी गौ माता को जन्मदात्री मां से भी श्रेष्ठ मानते थे। गौ माता निस्वार्थ भाव से पूरे विश्व की सेवा करती है। इसके बदले में वह कुछ भी नहीं मांगती। केवल जिंदा रहने तक ही नहीं बल्कि मरने के बाद भी वह हमारे काम में आती है। अगर निस्वार्थ भाव से सेवा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहीं देखने को मिलता है तो वह गौ माता है।

गांधी जी लिखते हैं – “ गोमाता जन्म देने वाली माता से श्रेष्ठ है। हमारी माता हमें दो वर्ष दुग्धपान कराती है और यह आशा करती है कि हम बडे होकर उसकी सेवा करेंगे। गाय हमसे चारे और दाने के अलावा किसी और चीज की आशा नहीं करती। हमारी मां प्राय: रुग्ण हो जाती है और हमसे सेवा करने की अपेक्षा करती है। गोमाता शायद ही कभी बीमार पडती है। गोमाता हमारी सेवा आजीवन ही नहीं करती, अपितु अपनी मृत्यु के उपरांत भी करती है। अपनी मां की मृत्यु होने पर हमें दफनाने या उसका दाह संस्कार करने पर भी धनराशि व्यय करनी पडती है। गोमाता मर जाने पर भी उतनी ही उपयोगी सिद्ध होती है जितनी अपने जीवन काल में थी। हम उसके शरीर के हर अंग – मांस, अस्थियां. आंतें, सींग और चर्म का इस्तमाल कर सकते हैं। ये बात हमें जन्म देने वाली मां की निंदा के विचार से नहीं कह रहा हूं बल्कि यह दिखाने के लिए कह रहा हूं कि मैं गाय की पूजा क्यों करता हूं। ”( हरिजन , 15.09-1940)

गांधीजी गौ रक्षा के लिए संपूर्ण विश्व का मुकाबला करने के लिए तैयार थे। 1925 में यंग इंडिया में उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है – “ मैं गाय की पूजा करता हूं और उसकी पूजा का समर्थन करने के लिए दुनिया का मुकाबला करने को तैयार हूं। ” – (यंग इंडिया, 1-1-1925)

गांधीजी का मानना था कि गौ हत्या का कलंक सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि पूरे देश से बंद होना चाहिए। इसके लिए भारत से यह कार्य शुरु हो, यह वह चाहते थे। उन्होंने लिखा है – “ मेरी आकांक्षा है कि गौ रक्षा के सिद्धांत की मान्यता संपूर्ण विश्व में हो। पर इसके लिए यह आवश्यक है पहले भारत में गौवंश की दुर्गति समाप्त हो और उसे उचित स्थान मिले ” – (यंग इंडिया, 29-1-1925)

आर्थिक दृष्टि से लाभदायक न होने वाले पशुओं की हत्या की जो परंपरा पश्चिम में विकसित हुई है गांधी जी उसकी निंदा करते थे। गांधीजी उसे ‘हृदयहीन व्यवस्था’ कहते थे। उन्होंने बार-बार कहा कि ऐसी व्यवस्था का भारत में कोई स्थान नहीं है। इस बारे में उन्होंने एक बार हरिजन पत्रिका में लिखा। गांधीजी की शब्दों में – “ जहां तक गौरक्षा की शुद्ध आर्थिक आवश्यकता का प्रश्न है, यदि इस पर केवल इसी दृष्टि से विचार किया जाए तो इसका हल आसान है। तब तो बिना कोई विचार किये उन सभी पशुओं को मार देना चाहिए जिनका दूध सूख गया है या जिन पर आने वाले खर्च की तुलना में उनसे मिलने वाले दूध की कीमत कम है या जो बूढे और नाकारा हो गए हैं। लेकिन इस हृदयहीन व्यवस्था के लिए भारत में कोई स्थान नहीं है , यद्यपि विरोधाभासों की इस भूमि के निवासी वस्तुत: अनेक हृदयहीन कृत्यों के दोषी हैं। ” (हरिजन ,31.08. 1947)

महात्मा गांधी ने गौ रक्षा को हिन्दू धर्म का केन्द्रीय तत्व कहा है। गौ के महात्म्य के बारे में उन्होंने लिखा है – हिन्दू धर्म का केन्द्रीय तत्व गोरक्षा है। मैं गोरक्षा को मानव विकास की सबसे अदभुत घटना मानता हूं। यह मानव का उदात्तीकरण करती है। मेरी दृष्टि में गाय का अर्थ समस्त अवमानवीय जगत है। गाय के माध्यम से मनुष्य समस्त जीवजगत के साथ अपना तादात्म्य स्थापित करता है। गाय को इसके लिए क्यों चुना गया, इसका कारण स्पष्ट है। भारत में गाय मनुष्य की सबसे अच्छी साथिन थी। उसे कामधेनु कहा गया। वह केवल दूध ही नहीं देती थी, बल्कि उसी के बदौलत कृषि संभव हो पाई। ” – (यंग इंड़िया, 6.10.1921)

महात्मा गांधी ने गौ रक्षा को हिन्दू धर्म के संरक्षण के साथ जोडा है। उनके शब्दों में – गो रक्षा विश्व को हिन्दू धर्म की देन है। हिन्दू धर्म तब तक जीवित रहेगा जब तक गोरक्षक हिन्दू मौजूद है। ”- (यंग इंड़िया, 6.10.1921)

अच्छे हिन्दुओं को हम कैसे परखेंगे। क्या उनके मस्तक से, तिलक से या मंत्रोच्चार से। गांधी जी का स्पष्ट मानना था कि गौ रक्षा की योग्यता ही हिन्दू होने का आधार है। गांधी जी के शब्दों में – “ हिन्दुओं की परख उनके तिलक, मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, तीर्थयात्राओं तथा जात -पात के नियमों के अत्यौपचारिक पालन से नहीं की जाएगी, बल्कि गाय की रक्षा करने की उनकी योग्यता के आधार पर की जाएगी। ” (यंग इंडिया . 6.10.1921)

गांधी जी के उपरोक्त विचारों से स्पष्ट है कि बापू गौ रक्षा को कितना महत्वपूर्ण मानते थे। लेकिन इसे त्रासदी ही कहना चाहिए कि गांधी के देश में गौ हत्या धडल्ले से चल रही है। महात्मा गांधी के विचारों की हत्या कर दी गई है। आवश्यकता इस बात की है कि गांधी जी के विचारों के आधार पर, भारतीय शाश्वत संस्कृति व परंपराओं के आधार पर भारतीय व्यवस्था को स्थापित किया जाए और गौ माता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, तभी गांधीजी के सपनों का राम राज्य स्थापित हो पाएगा।
सनातनी विचार !
सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार का महाभियान ---- मम - दीक्षा, गौ - रक्षा । ''नयाल सनातनी''