Thursday, February 20, 2014

सनातनी विचार !
परसो घोडा डोंगरी में एक सद्ग्रहथ ब्राह्मण संत से बात हो रही थी दान पात्र कोन ? उन्होने बताया वैसे तो हम दान लेने के हक़दार है, पर हमसे भी दान लेने की श्रेष्ठ हक़दार गौमाता है जिसके तुम सेवक हो । शास्त्र में साफ - साफ लिखा है की दान अपने से श्रेष्ठ को और दया अपने से निम्न पर करें । जो लोग रास्ते चलते भिखारियो को दो - पाँच रुपिया भीख देते है उसे दान नहीं दया कहते है। जिसे परमात्मा ने ही उसके पूर्व दुष्कर्म के कारण दण्डित किया है,उसे दो - चार - दस का दान या एक कम्बल उढ़ा के हम दानी नहीं हो सकते। उलटा भगवान के द्वारा दण्डित को इनाम देने वाला जरूर बन सकते है। वही अगर गाय को रोटी या दो - चार - दस रुपिये के हरा चारा खिला देते है तो दानी जरूर हो जाते है। क्योकि उस गाय में 33 करोड़ देवताओं को बल और शरण देने की शक्ति है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक ;--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'

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