Thursday, February 20, 2014

सनातनी विचार !
कल हरिद्वार के एक घुमकड़ संत का रात 11 बजे फोन आया उनका कहना था मुझे भी अपने साथ सेवा में ले लो नयाल ! अब ( हरि के द्वार ) हरिद्वार में मन नहीं लगता यहाँ आज के लगभग सभी साधु - संतो ने विशाल पत्थर के जंगलो (आश्रमो में ) देवी - देवताओं के भव्य पत्थर की मूर्तियाँ बिठा कर उनके हाथ में भीख का कटोरा थमा दिया है। प्रत्यक्ष 33 करोड़ देवी - देवताओ के विग्रह,( गौ माता ) को स्थान देना बंद कर दिया है क्योकि पत्थर के मूर्ति कुछ खाती नहीं। गाय - गौवंश सूखी घास मांगती है, बदले में अमृतमय दूध देती है। फिर भी कलि का प्रभाव देखो किसी को कल की सुध नहीं ------ एक घुमकड़ साधु हरिद्वार से - ''नयाल सनातनी''

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