Saturday, May 3, 2014


सनातनी विचार !
गौ-ग्रास की महिमा - कल्युग में पुण्य प्राप्त करना कितना आसन है ना पढ़े नीचे शास्त्र वचन !
तीर्थ स्त्रानेशु यत्पुण्यं विप्रभाजने।
सर्व व्रतापवासेशु सर्वेश्वेव तः सुच।।
यत्पुण्यं च महादाने यत्पुण्यं हरिसेवने।
भुवः पर्यटने यतु वेद्वाक्येशु यद् वेत ।।
यत्पुण्यं सर्वयज्ञेषु दिक्षायं च लभेन्नरः।
ततपुण्यं लभते प्राज्ञो गोभ्यो दत्वा तृणानि च ।।
अर्थ ---तीर्थो में स्नान करने, वैदिक ब्राह्मण को भोजन करवाने, समस्त व्रत-उपवासों के करने एवं तप साधनों द्वारा, महादान सर्वस्य दान देने, हरि सेवा करने, भूमण्डल की प्रदक्षिणा करने, वेद-वाक्यों का श्रवण पाठ करने विविध यज्ञों के अनुष्ठान तथा गुरु से दीक्षा ग्रहण करने से जो महा पुण्य अर्जित मानव कर सकता है। ऐसे सभी महापुण्य मनुष्य सिर्फ गौओं को चारा ( हरा, नर्म-नर्म ) घास खिलाने से प्राप्त कर सकता है। यह सनातन शास्त्रों का प्रमाणित कथन है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
राघव कृपा है भाई .. एक किस्सा याद आता है आज गावँ अपने गावँ का ! हम उत्तराखण्ड के पहाड़ की कठिन जीवन को जिये है एक दिन जब भयंकर बाढ़ आई थी दो दिन तक नदी तट पर तो नहीं जा पाए क्योकि बड़े - बड़े दरक (पेड़ ) उखड - उखड कर विक्राल हुई नदी की लहरों में ऐसे बह रहे थे जैसे बहुत बड़ी प्रलय का संकेत हो . लेकिन जब 2 दिन बाद नदी का बहाव शांत हो गया नदी के तट पर ही हम गाय चराने गए अपने गावँ के दोस्तों के साथ तो देखा जो नदी किनारे घास थी वह लहरा रही थी और गायो का भोजन बन रही थी .यह बात गहरे घर कर गई उस 14 साल के लडके के माशुम ह्रदय में की कभी - कभी झुकने में भी शान है अकड़ तो मुर्दे की पहचान है ... ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
हम सब को बड़ा नहीं भला इन्सान बनना होगा !
सदाचारी व्यक्ति ईमानदारी और सच्चाई को अपना हत्यार बनाता है . यही देवगुण उसे भला मानस बनाते है, और वह कब बड़ा इन्सान कहलाने लगता है, उसे स्वयं भी नहीं मालूम हो पाता .ऐसा गौरवशाली व्यक्ति देश व समाज को निरंतर आगे बढ़ाने वाला साबित होता है . संसार में जितने भी महापुरुष हुए है या कहलाये, उन्होंने अपनी सोच सदैव ऊँची रखी है . ''नयाल सनातनी''

Friday, May 2, 2014

सनातनी विचार !
भगवान ने सुन्दर मानव शरीर इस लिए दिया की इस देव दुर्लभ शरीर से माता - पिता, गौ - ब्राह्मण, -संत - विद्वानों और देवताओं को प्रसन्न कर अपना यह जीवन और परलोक सुधार ले . और नित्य सभी सांसारिक कार्य करते हुए परमात्मा का श्मरण बनाये रखे . ताकि उस आने- जाने के काल चक्र से मुक्ति मिल जाय .( पुनरपि जननम पुनरवि मरणं , पुनरपि जननी जठरे सहनं ) पर मानव समझ नहीं पाया वह अपने को दुसरो से श्रेष्ठ सिद्द करने में लग गया यही कारण है संसार के दुखो का . आज मानव अपने सुख से सुखी नहीं बल्किन दूसरो को खुश देख कर दुखी है . दुसरो को श्रेष्ठ कार्यो को देखकर उसकी टांग खीचने को अपना कर्म - धर्म समझ बैठा है .यह है पतन का कारण __
सावधान ! यह मानव जीवन मिला है तो श्रेष्ठ कर्म करो गौ सेवा से बढकर कोई श्रेष्ठ कर्म है ही नहीं इस भूमण्डल में .''नयाल सनातनी''संस्थापक ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
आज अक्षय तृतीय है ! पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। एक गौ-भक्त के लिए इससे शुभ कार्य क्या हो सकता है की वह अपनी माँ को आज के दिन भरपेट हरा चारा खिला दें ? अगर सच में पुण्य प्राप्ति की इच्छा हो तो आज गौ माता को जरूर चारा खिला दें. काम पर जा रहे हो तो रोड़ो में गाय दिखे तो कुछ केले या तरबूज - खरबूज खिला दे . इससे बड़ा दान हमें नहीं लगता कोई होगा इस धरा - धाम में . क्योकि माँ भूखी हो और बेटा जिनके पहले से ही भंडार भरे है उनको दान देता फिर रहा हो यह न्याय है क्या ? बाकि विवेक अपना - अपना -- जय गौ माँ .. ''नयाल सनातनी'' गौ-चरणों का दास