सनातनी विचार !
गौ-ग्रास की महिमा - कल्युग में पुण्य प्राप्त करना कितना आसन है ना पढ़े नीचे शास्त्र वचन !
तीर्थ स्त्रानेशु यत्पुण्यं विप्रभाजने।
सर्व व्रतापवासेशु सर्वेश्वेव तः सुच।।
यत्पुण्यं च महादाने यत्पुण्यं हरिसेवने।
भुवः पर्यटने यतु वेद्वाक्येशु यद् वेत ।।
यत्पुण्यं सर्वयज्ञेषु दिक्षायं च लभेन्नरः।
ततपुण्यं लभते प्राज्ञो गोभ्यो दत्वा तृणानि च ।।
अर्थ ---तीर्थो में स्नान करने, वैदिक ब्राह्मण को भोजन करवाने, समस्त व्रत-उपवासों के करने एवं तप साधनों द्वारा, महादान सर्वस्य दान देने, हरि सेवा करने, भूमण्डल की प्रदक्षिणा करने, वेद-वाक्यों का श्रवण पाठ करने विविध यज्ञों के अनुष्ठान तथा गुरु से दीक्षा ग्रहण करने से जो महा पुण्य अर्जित मानव कर सकता है। ऐसे सभी महापुण्य मनुष्य सिर्फ गौओं को चारा ( हरा, नर्म-नर्म ) घास खिलाने से प्राप्त कर सकता है। यह सनातन शास्त्रों का प्रमाणित कथन है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
—गौ-ग्रास की महिमा - कल्युग में पुण्य प्राप्त करना कितना आसन है ना पढ़े नीचे शास्त्र वचन !
तीर्थ स्त्रानेशु यत्पुण्यं विप्रभाजने।
सर्व व्रतापवासेशु सर्वेश्वेव तः सुच।।
यत्पुण्यं च महादाने यत्पुण्यं हरिसेवने।
भुवः पर्यटने यतु वेद्वाक्येशु यद् वेत ।।
यत्पुण्यं सर्वयज्ञेषु दिक्षायं च लभेन्नरः।
ततपुण्यं लभते प्राज्ञो गोभ्यो दत्वा तृणानि च ।।
अर्थ ---तीर्थो में स्नान करने, वैदिक ब्राह्मण को भोजन करवाने, समस्त व्रत-उपवासों के करने एवं तप साधनों द्वारा, महादान सर्वस्य दान देने, हरि सेवा करने, भूमण्डल की प्रदक्षिणा करने, वेद-वाक्यों का श्रवण पाठ करने विविध यज्ञों के अनुष्ठान तथा गुरु से दीक्षा ग्रहण करने से जो महा पुण्य अर्जित मानव कर सकता है। ऐसे सभी महापुण्य मनुष्य सिर्फ गौओं को चारा ( हरा, नर्म-नर्म ) घास खिलाने से प्राप्त कर सकता है। यह सनातन शास्त्रों का प्रमाणित कथन है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
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