सनातनी विचार !
राघव कृपा है भाई .. एक किस्सा याद आता है आज गावँ अपने गावँ का ! हम उत्तराखण्ड के पहाड़ की कठिन जीवन को जिये है एक दिन जब भयंकर बाढ़ आई थी दो दिन तक नदी तट पर तो नहीं जा पाए क्योकि बड़े - बड़े दरक (पेड़ ) उखड - उखड कर विक्राल हुई नदी की लहरों में ऐसे बह रहे थे जैसे बहुत बड़ी प्रलय का संकेत हो . लेकिन जब 2 दिन बाद नदी का बहाव शांत हो गया नदी के तट पर ही हम गाय चराने गए अपने गावँ के दोस्तों के साथ तो देखा जो नदी किनारे घास थी वह लहरा रही थी और गायो का भोजन बन रही थी .यह बात गहरे घर कर गई उस 14 साल के लडके के माशुम ह्रदय में की कभी - कभी झुकने में भी शान है अकड़ तो मुर्दे की पहचान है ... ''नयाल सनातनी''
राघव कृपा है भाई .. एक किस्सा याद आता है आज गावँ अपने गावँ का ! हम उत्तराखण्ड के पहाड़ की कठिन जीवन को जिये है एक दिन जब भयंकर बाढ़ आई थी दो दिन तक नदी तट पर तो नहीं जा पाए क्योकि बड़े - बड़े दरक (पेड़ ) उखड - उखड कर विक्राल हुई नदी की लहरों में ऐसे बह रहे थे जैसे बहुत बड़ी प्रलय का संकेत हो . लेकिन जब 2 दिन बाद नदी का बहाव शांत हो गया नदी के तट पर ही हम गाय चराने गए अपने गावँ के दोस्तों के साथ तो देखा जो नदी किनारे घास थी वह लहरा रही थी और गायो का भोजन बन रही थी .यह बात गहरे घर कर गई उस 14 साल के लडके के माशुम ह्रदय में की कभी - कभी झुकने में भी शान है अकड़ तो मुर्दे की पहचान है ... ''नयाल सनातनी''
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