Friday, May 2, 2014

सनातनी विचार !
भगवान ने सुन्दर मानव शरीर इस लिए दिया की इस देव दुर्लभ शरीर से माता - पिता, गौ - ब्राह्मण, -संत - विद्वानों और देवताओं को प्रसन्न कर अपना यह जीवन और परलोक सुधार ले . और नित्य सभी सांसारिक कार्य करते हुए परमात्मा का श्मरण बनाये रखे . ताकि उस आने- जाने के काल चक्र से मुक्ति मिल जाय .( पुनरपि जननम पुनरवि मरणं , पुनरपि जननी जठरे सहनं ) पर मानव समझ नहीं पाया वह अपने को दुसरो से श्रेष्ठ सिद्द करने में लग गया यही कारण है संसार के दुखो का . आज मानव अपने सुख से सुखी नहीं बल्किन दूसरो को खुश देख कर दुखी है . दुसरो को श्रेष्ठ कार्यो को देखकर उसकी टांग खीचने को अपना कर्म - धर्म समझ बैठा है .यह है पतन का कारण __
सावधान ! यह मानव जीवन मिला है तो श्रेष्ठ कर्म करो गौ सेवा से बढकर कोई श्रेष्ठ कर्म है ही नहीं इस भूमण्डल में .''नयाल सनातनी''संस्थापक ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

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