सनातनी विचार !
जिस प्रकार किसी भी माँ के कोख से पैदा हुआ बालक चाहे कुरूप हो या लूला-लगड़ा, मंदबुध्दि माँ को सारे विश्व में अपने पुत्र से ज्यादा ममता किसी और से नहीं होती। क्योकि माँ के अंदर भगवान ऐसी ममता कूट- कूट कर भर दी है ।
अगर ऐसा भगवान न करते तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता कुरूप और अपाहिज, मंदबुध्दि बच्चो का क्या होता ? वैसे ही ममता भगवान ने हमारी प्यारी गौ- माता में भर रखी है।
गौमाता अपने हत्यारे को भी दूध पिलाती है और पुजारी को भी। ऐसी ममतामयी माताओं का भी जो आदर-सम्मान न करे ( उनकी हत्या करे ) उस धुंधकारी का तो सर्वनाश हो ही जाना चाहियें।
भले ही बाद में कोई गोकर्ण को गौ-माता इन दुष्टो का उद्धार करने भेजने ही वाली क्यों न हो ?
''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
जिस प्रकार किसी भी माँ के कोख से पैदा हुआ बालक चाहे कुरूप हो या लूला-लगड़ा, मंदबुध्दि माँ को सारे विश्व में अपने पुत्र से ज्यादा ममता किसी और से नहीं होती। क्योकि माँ के अंदर भगवान ऐसी ममता कूट- कूट कर भर दी है ।
अगर ऐसा भगवान न करते तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता कुरूप और अपाहिज, मंदबुध्दि बच्चो का क्या होता ? वैसे ही ममता भगवान ने हमारी प्यारी गौ- माता में भर रखी है।
गौमाता अपने हत्यारे को भी दूध पिलाती है और पुजारी को भी। ऐसी ममतामयी माताओं का भी जो आदर-सम्मान न करे ( उनकी हत्या करे ) उस धुंधकारी का तो सर्वनाश हो ही जाना चाहियें।
भले ही बाद में कोई गोकर्ण को गौ-माता इन दुष्टो का उद्धार करने भेजने ही वाली क्यों न हो ?
''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
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