सनातनी विचार से !
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' का भारत सरकार से २१ सूत्रीय गौरक्षा मांग पत्र। ''गावो विश्वस्य मातरः''
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' का भारत सरकार से २१ सूत्रीय गौरक्षा मांग पत्र। ''गावो विश्वस्य मातरः''
आज भारत वर्ष मे
ही नहीं पूरे विश्व मे सभी मानव सुखी है पर जीव मात्र की माता कहलाने का अधिकार
रखने वाली वेदों द्वारा पूज्यनीय, देवताओं को भी
भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौ माता आज सड़कों पर मल, गन्दगी, प्लास्टिक खाने को मजबूर है | पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आज भी भारत वर्ष मे ही नहीं
पूरे विश्व मे कुछ ऐसे पुण्यवान, भामाशाह और अपनी
माँ के कोख को धन्य करने वाले गौ भक्त भी है, जिनके सहयोग से आज भी लाखो गौवंश गौशालाओं मे, किसानों के यहाँ, अपने घर पर ही सुरक्षित है | क्या ये गौभक्त, जिनकी वजह से पूरी सृष्टी का संतुलन बना हुआ है, आगे भी इसी प्रकार गौ - सेवा में संलग्न रह सकेंगे ?
शेष मानव जाति को जिनको परमात्मा ने सोचने के
लिए बुद्धि दे रखी है का भी कर्तव्य बनता है कि इस गो संवर्धन को उठाने मे,
इस राम सेतु को बनाने मे ग्वाल -बालो एवं
गिलहरी की तरह थोडा - थोडा यथा योग्य योगदान दे | जब हम थोडा-थोडा योगदान देंगे तो हम सभी गौभक्तों के लिए
कुछ भी दुर्लभ नहीं रहेगा |
शास्त्र कहता है
--- गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है |
पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म,
विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है |
विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ
नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना
गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज
एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है | देवताओं और दानवो के द्वारा समुद्र मंथन के
वक्त ५ गायें उत्पन्न हुई, इनका नाम था-
नंदा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला और बहुला | ये सभी गायें
भगवान की आज्ञा से देवताओं और दानवों ने महर्षि जमदग्नि, भारद्वाज, वशिष्ट, असित और गौतम मुनि को समर्पित कर दीं | आज जितने भी देशी गौवंश भारत एवं इतर देशो मे
है, वह सब इन्ही ५ गौओं की
संताने है और हमारे पूर्वजो एवं ऋषियों का यह महाधन है | क्या हम सिर्फ गोत्र बताने के लिए ही अपने ऋषियों की संताने
हैं? उनकी सम्पति गौ धन को
बचाना हमारा कर्तव्य नहीं | आज भारत वर्ष मे
ही करोड़ों लोग सुबह - शाम देवालयों मे माथा टेक कर भगवान से मनोकामनाएँ मांगते है,
पर इन मे से लाखों लोगो को यह तक भी मालूम नहीं
है की जिस देवता से वे याचना कर रहे है उन्हें कुछ भी दे देने की शक्ति तभी आएगी
जब हवन द्वारा अग्नि के मुख से देवताओं तक शुद्ध गौ घृत पहुंचेगा | जब हम हवन में गाय के घी से मिश्रित चरू
देवताओं को अर्पण करते है | उस उत्तम हविष्य
से देवता बलिष्ट एवं पुष्ट होते है | जब देवता शक्तिशाली होगा तभी अपनी शक्ती के बल पर आपकी-हमारी मनोकामनाएं पूरी
करने मे समर्थ होंगे | पर जब गौवंश ही
नहीं रहेगा तो शुद्ध गौ घृत कहा से आएगा? और शुद्ध गौ घृत नहीं होगा तो हवन कहा से होगा? और हवन नहीं होंगे तो देवता पुष्ट कैसे होंगे? और देवता पुष्ट नहीं होंगे तो शक्तिहीन देवता
मनोकामनाएं पूर्ण कैसे करेँगे ? आज हम लोग पेड़
लगा देते है पानी खाद नहीं डालेंगे तो फल कहा से लगेंगे? यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है | आज जितने भी कथाएं होती है, यज्ञ, अनुष्टान होते
हैं, जप-तप होते है उनमें
नाम-जप का कुछ प्रभाव पड़ता हो पर अंत मे जो यज्ञ होता है वह सफल कितने होते है यह
राम को ही मालूम | क्योंकि इन
यज्ञों मे शुद्ध गौ घृत का उपयोग नहीं के बराबर होता है | आज भारत वर्ष मे पूर्व की अपेक्षा यज्ञ, धर्म, कर्म अधिक हो रहे है पर फल नहीं मिलता, यज्ञ सफल नहीं होते, क्या कारण है? इसके मूल मे यही है की जिस धरती पर गौ, ब्राहमण, साधू-संत,
स्त्री दुखी होते है वहां पर पुण्य कर्म फल
नहीं देते | आज हालत ये हो
गयी है की गोवंश विलुप्त होने के कगार पर है लोग लाखो गौमाता का लहू ;पानी की तरह बहा दिया जाता है . आज गौमाता का
दूध फायदा का सौदा नहीं गौमंश से मुनाफा कमाया जा रहा है आज हम उतने ही दोषी है जो
अपनी माता को कसाई के हवाले कर रहे है चंद सिक्को की खातिर हमारी २१ सूत्रीय मांगे
निम्न है
१ गौमाता को
राष्ट्र माता घोषित किया जाये तत्काल।
२ गौमाता को
गोमाश के लिए बेचने पर पूर्ण प्रतिबन्ध।
३ कसाई खानों में
गोवध तुरंत बंद हो और उन गौवध शालाओं में कामधेनु नेशनल पार्क खुले ।
४ सरकार की मदद
से हर गावँ व शहर में गौशालाएं खोली
जाये।
५ सरकार अपनी
योजनाओ में गौशालाएं के लिए सहायता राशी निर्धारित करे।
६ हर गावँ व शहर
में सरकार गायो के लिए एक गौरक्षा सेवक नियुक्त करे जो कुशल पशु चिकित्सक भी
हो।
७ गौमाता के पञ्च
गव्य से बने उत्पादों को बेचने में सरकार सहायता करे।
८ सरकार की और से
गौमाता स्टोर खोले जाये जहाँ गो मूत्र , गौमाता घी , दूध , दही , मक्खन उपलभ्द हो।
९ टाइगर रेजेर्व
की तरह देसी गायो को भी संरक्षण दिया जाय तथा उनके भी अभ्यारण्य बनाये जाये।
१० इधर-उधर भटकती
गायो के लिए सरकार एम्बुलेंस और वहां की व्यवस्था करे।
११ लोगो में
गौमाता पालन को बढ़ावा देने के लिए गौमाता स्कूल खोले।
१२ जन्माष्ठमी और
गोवर्धन पूजा को रास्ट्रीय गौमाता त्यौहार घोषित करे।
१३ गौसेवा में
लगे किसानो को सम्मानित करने में सरकार धन न दे वरन उन्हें एक गाय भेट करे।
१४ गौमाता सम्मान
आरम्भ किया जाये गौ-रत्न पुरुष्कार सरकार की ओर से उत्तम गौसेवा में लगे
गौप्रेमियों को दिए जाय ।
१५ हर गावँ में
गौमाता सेवको की भारती की जाये जिनका काम गायो की सेवा और देखभाल का हो।
१६ सरकार की और
से गौशालाओं में चारे की व्यवस्था की जाये।गौचर भूमि खाली कराये जाय।
१७ गौ हत्या करने
वालो पर तुरंत रिपोर्ट दर्ज हो --और मुक़दमा चले कम से कम 7 साल की सजा हो
।
१८ दूध निकाल कर
गौमाता को खुला छोड़ने पर भी भारी दंड का प्रावधान हो।
१९ सरकार की और
से साल में कम से कम एक बार गौ-कुम्भ मेले का आयोजित हो।
२० सरकार एक नया
विभाग गौमाता विभाग ( गौ संवर्धन विभाग ) बनाये।
२१ सरकार एक नया
मंत्री गौमाता मंत्री भी नियुक्त करे।
निवेदक ;--
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' www.govansh.in , www.sarvadliyagaurkshamanch.in
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