सनातनी विचार !
गोविन्द ने तो गौमाता को मानव के लिए अमूर्त की खान बना कर भेजा था . साथ में पंच गव्यों की दुकान भेजा था . जो कम से कम 20 - 25 साल तक चल सके और 4 लाख 32 हजार मानव का भरण - पोषण करे .( याद रहे कल्युग की आयु भी 4 लाख 32 हजार वर्ष है ) पर मानव ने दानव बनकर उसका क़त्ल कर सिर्फ 80 लोगो का भोजन का सामान बना दिया .
गोविन्द ने तो गौमाता को मानव के लिए अमूर्त की खान बना कर भेजा था . साथ में पंच गव्यों की दुकान भेजा था . जो कम से कम 20 - 25 साल तक चल सके और 4 लाख 32 हजार मानव का भरण - पोषण करे .( याद रहे कल्युग की आयु भी 4 लाख 32 हजार वर्ष है ) पर मानव ने दानव बनकर उसका क़त्ल कर सिर्फ 80 लोगो का भोजन का सामान बना दिया .
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