सनातनी विचार !
अब हम चंद्रमा, मंगल आदि ग्रहों में जा रहे है वहां पानी भी मिल चूका है। पर जिस गौमाता के एक आखं में सूर्य,एक आँख में चंदमा, शरीर में मंगल आदि सभी गृह निवास कर गौ-सेवा से धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष देने की ताकत इस पृथ्वी में ही देने की शक्ति रखती है वह खुले आम कट रही है, सूली पर चड़ा कर खून निचोड़ा जा रहा है । .धिक्कार पक्षेपत्रो को ले जाने वाले उपग्रहों को और उनको बनाने वालो को जिन्होंने निर्जीव को बहुत महत्व दिया जीव की उपेक्षा की। ''नयाल सनातनी''
अब हम चंद्रमा, मंगल आदि ग्रहों में जा रहे है वहां पानी भी मिल चूका है। पर जिस गौमाता के एक आखं में सूर्य,एक आँख में चंदमा, शरीर में मंगल आदि सभी गृह निवास कर गौ-सेवा से धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष देने की ताकत इस पृथ्वी में ही देने की शक्ति रखती है वह खुले आम कट रही है, सूली पर चड़ा कर खून निचोड़ा जा रहा है । .धिक्कार पक्षेपत्रो को ले जाने वाले उपग्रहों को और उनको बनाने वालो को जिन्होंने निर्जीव को बहुत महत्व दिया जीव की उपेक्षा की। ''नयाल सनातनी''
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