सनातनी
विचार !
महापुरुषों का भी मत है स्वार्थ के लिए दुसरे की मेहनत से बनाया मार्ग पर चल कर मिली सफलता अल्प काल तक ही रहती है . मानव को अपना मार्ग स्वयंग प्रसस्त करना चाहिए या स्वार्थ त्याग परमार्थ में हित चिंतन करना चाहियें ..........
महापुरुषों का भी मत है स्वार्थ के लिए दुसरे की मेहनत से बनाया मार्ग पर चल कर मिली सफलता अल्प काल तक ही रहती है . मानव को अपना मार्ग स्वयंग प्रसस्त करना चाहिए या स्वार्थ त्याग परमार्थ में हित चिंतन करना चाहियें ..........
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