सनातनी विचार !
ताली दो हाथो से बजती है . थोडा - थोडा झुकने से संसार अपना हो जाता है . अकड़ तो मुर्दों की पहचान माना जाता है .वह परमात्मा भी तो पके और लदे हुए फलो के वृक्षों से यही सन्देश देता है पर समझ वही पता है जो ईश्वर मुख हो .
ताली दो हाथो से बजती है . थोडा - थोडा झुकने से संसार अपना हो जाता है . अकड़ तो मुर्दों की पहचान माना जाता है .वह परमात्मा भी तो पके और लदे हुए फलो के वृक्षों से यही सन्देश देता है पर समझ वही पता है जो ईश्वर मुख हो .
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