सनातनी विचार !
आलसी और निकम्भे लोग घर बैठे या तो भाग्य को कोसते है या भगवान को . कुछ न मिला तो सत मार्ग पर चलने वालो में खोट ढूडते है. उनकी मानसिक दिवालियापन का कुछ अविवेकी साथ देकर उनका उत्साह वर्धन कर उनको पतन के असली गर्त में पंहुचा देते है . बाद में इनके जीवन में बड़ा अँधेरा छा जाता है और पतन होता है क्योकि सच्चाई एक दिन सामने आती ही है .--
आलसी और निकम्भे लोग घर बैठे या तो भाग्य को कोसते है या भगवान को . कुछ न मिला तो सत मार्ग पर चलने वालो में खोट ढूडते है. उनकी मानसिक दिवालियापन का कुछ अविवेकी साथ देकर उनका उत्साह वर्धन कर उनको पतन के असली गर्त में पंहुचा देते है . बाद में इनके जीवन में बड़ा अँधेरा छा जाता है और पतन होता है क्योकि सच्चाई एक दिन सामने आती ही है .--
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