सनातनी विचार !
अपने सुख में अनेक मित्र और साथीयों को खुशी प्रदान करने वाला व्यक्ति अपने दुःख के समय में जब अकेले विष पान करता है समझों उसकी परीक्षा स्वयंग भगवान के सामने हो रही होती है। जो हर परीक्षा में उत्तीर्ण ना हो सके वह कैसा गौ-भक्त ??
''नयाल सनातनी''
अपने सुख में अनेक मित्र और साथीयों को खुशी प्रदान करने वाला व्यक्ति अपने दुःख के समय में जब अकेले विष पान करता है समझों उसकी परीक्षा स्वयंग भगवान के सामने हो रही होती है। जो हर परीक्षा में उत्तीर्ण ना हो सके वह कैसा गौ-भक्त ??
''नयाल सनातनी''
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