सनातनी विचार !
जिस प्रकार एक पुत्रवालों का अपने पुत्र में, वैष्ण-पुरुषों का भगवान श्री हरि नारायण में, भगवान शंकर के भक्तों का अपने भोले में, एक नेत्र वालों का अपने नेत्र में, प्यासे जनों का जल में, भूखे से पीड़ित का अन्न में निरंतर मन लगा रहता है, उसी प्रकार सभी देवी-देवताओं की आश्रय स्थला गौमाता के भक्त का भी गौ-माता पर ही नित्य एवं हर वक्त ध्यान रहना चाहिए तभी कल्याण संभव है।
जब नित्य लाखों गौवंश कट रहा हो उस वक्त ऐन-केन प्रकारेण जगत कल्याणकारी गौवंश की रक्षा के अनेक उपायों का साधन करने वाला ही बैतरणी पर गौ माता के इंतजार का हक़दार है। ''नयाल सनातनी''
जिस प्रकार एक पुत्रवालों का अपने पुत्र में, वैष्ण-पुरुषों का भगवान श्री हरि नारायण में, भगवान शंकर के भक्तों का अपने भोले में, एक नेत्र वालों का अपने नेत्र में, प्यासे जनों का जल में, भूखे से पीड़ित का अन्न में निरंतर मन लगा रहता है, उसी प्रकार सभी देवी-देवताओं की आश्रय स्थला गौमाता के भक्त का भी गौ-माता पर ही नित्य एवं हर वक्त ध्यान रहना चाहिए तभी कल्याण संभव है।
जब नित्य लाखों गौवंश कट रहा हो उस वक्त ऐन-केन प्रकारेण जगत कल्याणकारी गौवंश की रक्षा के अनेक उपायों का साधन करने वाला ही बैतरणी पर गौ माता के इंतजार का हक़दार है। ''नयाल सनातनी''
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