Thursday, November 27, 2014

सनातनी प्रार्थना !
जो सबको अपनी ओर आकृष्ट करने वाले सच्चिनानन्द स्वरुप है, इसलिए 'कृष्ण' कहलाते है, सर्वव्यापी होनेके कारण जिनकी 'विष्णु' संज्ञा है, सबके भीतर निवास करने से जिनका नाम 'वासुदेव' है, जो 'परमात्मा' एवं 'ईश्वर' है, 'गोविन्द,  'परमानन्द,' 'एक',  'अक्षर', 'अच्युत', 'गोपेश्वर', 'गोपीश्वर', 'गोप', 'गौरक्षक', 'विभु', 'गौओं के स्वामी', 'गोष्ठनिवासी', 'गोवत्स-पुच्छधारी', 'ग्वालो, गोपों' और गोपियों के मध्य विराजमान',  'प्रधान' , 'पुरुषोत्तम' , 'नवघनश्याम', 'रासवास' और मनोहर' आदि अनेक नाम धारण करते है उन श्री कृष्ण से हम नित्य प्रातः एवं सायं पूजा काल में गौवंश की रक्षा हेतु प्राथना रत है।
                                                                                                 ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष '-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच 

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