सनातनी विचार !
जिस स्थान में ,शहर में , गावं में या तालुका में अतियधिक दुर्जन बस गए हो ! जहाँ का वातावरण सज्जनों के रहने लायक न रह गया हो ! उस स्थान का विद्द्वानो को तुरंत त्याग कर देना चाहिए। बर्ना दुर्जनो के क्रियाकलापों से पहले विद्द्वान का रजोगुण जाग्रत होगा फिर तमोगुणो की अधिकता होने लगेगी अंत में सतोगुण नष्ट होकर विद्द्वान सज्जन भी उन दुर्जनों के जैसा ही आचरण करते देखा-सुना जायेगा।
पूर्व में संत - विद्द्वान कहाँ करते थे की लाख दुर्जनों से भेट हो दिन भर में पर शाम होते-होते एक विद्द्वान सज्जन के दर्शन पुरे दिन की दुर्जनता को दूर कर देती है। ''नयाल सनातनी''
जिस स्थान में ,शहर में , गावं में या तालुका में अतियधिक दुर्जन बस गए हो ! जहाँ का वातावरण सज्जनों के रहने लायक न रह गया हो ! उस स्थान का विद्द्वानो को तुरंत त्याग कर देना चाहिए। बर्ना दुर्जनो के क्रियाकलापों से पहले विद्द्वान का रजोगुण जाग्रत होगा फिर तमोगुणो की अधिकता होने लगेगी अंत में सतोगुण नष्ट होकर विद्द्वान सज्जन भी उन दुर्जनों के जैसा ही आचरण करते देखा-सुना जायेगा।
पूर्व में संत - विद्द्वान कहाँ करते थे की लाख दुर्जनों से भेट हो दिन भर में पर शाम होते-होते एक विद्द्वान सज्जन के दर्शन पुरे दिन की दुर्जनता को दूर कर देती है। ''नयाल सनातनी''
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