सनातनी विचार !
तुम्हारे ह्रदय के मंदिर में बैठा सच्चा मन ही बता सकता है की तुम अच्छा और पवित्र कार्य में रत हो। जब मन-आत्मा गवाही दे रहा है तो दुनिया लाख खुदगर्ज, मतलब-परस्त होने का दोषारोपण करें तो परवाह ना करो। अच्चा और सच्चा कार्य करते रहों। क्योकि सच्चा मन-आत्मा ही परमात्मा है।और परमात्मा कभी गलत राह नहीं दिखातें।
''नयाल सनातनी''
तुम्हारे ह्रदय के मंदिर में बैठा सच्चा मन ही बता सकता है की तुम अच्छा और पवित्र कार्य में रत हो। जब मन-आत्मा गवाही दे रहा है तो दुनिया लाख खुदगर्ज, मतलब-परस्त होने का दोषारोपण करें तो परवाह ना करो। अच्चा और सच्चा कार्य करते रहों। क्योकि सच्चा मन-आत्मा ही परमात्मा है।और परमात्मा कभी गलत राह नहीं दिखातें।
''नयाल सनातनी''
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