सनातनी विचार !
जब आप एकनिष्ठ होकर किसी सतकर्म को करने लगते है। तो आप में सब कुछ करने की शक्ति का संचार होने लगता है। और जब आप पूर्ण सफल होने ही वाले होते है। तब सबसे पहले इंद्र आदि देवता आपकी परीक्षा हेतु आसुरी शक्तियों की सहायता से आपके राह की रूकावट बन जाते है। आप पर अनेक आरोप -प्रत्यारोपो का दौर चल पड़ता है,आप घबरा कर उस राह को छोड़ देते हो या परिवार और समाज छुडवा देता है। पर सत्य संकल्प का व्यक्ति कभी सत-मार्ग नहीं छोड़ता भले दुनिया को लगे यह रुक गया वह आखिर तक प्रयत्न नहीं छोड़ता और अंत में विजयी होता है।
''नयाल सनातनी''
जब आप एकनिष्ठ होकर किसी सतकर्म को करने लगते है। तो आप में सब कुछ करने की शक्ति का संचार होने लगता है। और जब आप पूर्ण सफल होने ही वाले होते है। तब सबसे पहले इंद्र आदि देवता आपकी परीक्षा हेतु आसुरी शक्तियों की सहायता से आपके राह की रूकावट बन जाते है। आप पर अनेक आरोप -प्रत्यारोपो का दौर चल पड़ता है,आप घबरा कर उस राह को छोड़ देते हो या परिवार और समाज छुडवा देता है। पर सत्य संकल्प का व्यक्ति कभी सत-मार्ग नहीं छोड़ता भले दुनिया को लगे यह रुक गया वह आखिर तक प्रयत्न नहीं छोड़ता और अंत में विजयी होता है।
''नयाल सनातनी''
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