सनातनी विचार !
जो मनुष्य सकल ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री देवी गौ-माता से प्राप्त पञ्च-गव्यों के इस्तेमाल से ही संतुष्ट हो उन्ही का दोहन कर धन-यस कमा लिया और संतुष्ट हो गया . उस व्यक्ति को सायद ही बैतरणी पर गौमाता पार लगाने आये ! क्योकि उस व्यक्ति ने गौ-माता की असली महिमा को तो जाना ही नहीं आखिर गौमाता का प्राकट्य क्यों हुआ इस मृत्य लोक में ?
जबकि गौ-माता को तो भगवान ने बिना जाति-वर्ण-धर्म का विचार करे सच्चे सेवक को मोक्ष देने की शक्ति प्रदान की है .
‘’नयाल सनातनी’’
जो मनुष्य सकल ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री देवी गौ-माता से प्राप्त पञ्च-गव्यों के इस्तेमाल से ही संतुष्ट हो उन्ही का दोहन कर धन-यस कमा लिया और संतुष्ट हो गया . उस व्यक्ति को सायद ही बैतरणी पर गौमाता पार लगाने आये ! क्योकि उस व्यक्ति ने गौ-माता की असली महिमा को तो जाना ही नहीं आखिर गौमाता का प्राकट्य क्यों हुआ इस मृत्य लोक में ?
जबकि गौ-माता को तो भगवान ने बिना जाति-वर्ण-धर्म का विचार करे सच्चे सेवक को मोक्ष देने की शक्ति प्रदान की है .
‘’नयाल सनातनी’’
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