सनातनी विचार !
श्री रामचरित मानस बाल कांड १४२ सो० के अगले चौपाई के अनुसार --
आये मिलन सिद्द मुनि ज्ञानी,धरमधुरंधर नृपऋषि ज्ञानी।
जब सम्पूर्ण पृथ्वी जलमग्न हो गई मानव रूप में सिर्फ मनु ही बचे तो महर्षि मनु ने ही मानव जाति की फिर से उत्पति की इस लिए राजर्षि मनु ही पूरी मानव जाती के जन्म दाता यानि पिता है . और राजर्षि का मतलब क्षत्रिय राजा फिर ब्राहमण क्षत्रिय से श्रेष्ठ कैसे ? क्या पिता से पुत्र श्रेष्ठ होता है ? अगर सब एक ही पिता की संतान है तो फिर कुछ ब्राहमणों द्वारा श्रेष्ठता का जगतीय व्योहार क्यों ?
कुछ विद्द्वानो के अनुसार ! अगर ब्राहमण ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न है तो वे मृत्य लोक में क्या कर रहे है ? जबकि अनेक ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि लोक या ब्रह्म लोक में निवास करते है। ‘’नयाल सनातनी’’
श्री रामचरित मानस बाल कांड १४२ सो० के अगले चौपाई के अनुसार --
आये मिलन सिद्द मुनि ज्ञानी,धरमधुरंधर नृपऋषि ज्ञानी।
जब सम्पूर्ण पृथ्वी जलमग्न हो गई मानव रूप में सिर्फ मनु ही बचे तो महर्षि मनु ने ही मानव जाति की फिर से उत्पति की इस लिए राजर्षि मनु ही पूरी मानव जाती के जन्म दाता यानि पिता है . और राजर्षि का मतलब क्षत्रिय राजा फिर ब्राहमण क्षत्रिय से श्रेष्ठ कैसे ? क्या पिता से पुत्र श्रेष्ठ होता है ? अगर सब एक ही पिता की संतान है तो फिर कुछ ब्राहमणों द्वारा श्रेष्ठता का जगतीय व्योहार क्यों ?
कुछ विद्द्वानो के अनुसार ! अगर ब्राहमण ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न है तो वे मृत्य लोक में क्या कर रहे है ? जबकि अनेक ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि लोक या ब्रह्म लोक में निवास करते है। ‘’नयाल सनातनी’’
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