सावधान दुःख-विप्पति किसी पर भी आ सकती है, दुसरो के दुःख-विपत्ति में दया दिखा कर या दुखी मनुष्य का साहस बढ़ा कर आप आने वाले दुःखो से छूट जाओगे। और जो दुखी मनुष्य की अवगणना करता है या उस पर हर्ष मनाता है , वह कभी न कभी स्वयं उस दुःख में जा पड़ता है। कुदरत का नियम है जो बोया वह काटना पड़ेगा।
''नयाल सनातनी''
No comments:
Post a Comment