सनातनी विचार !
ज्ञानी वह जो परमात्मा के गुणों का बखान करे , ज्ञानी वह जो यह समझ गया की वही परमतत्व ही सब कर्ता-धर्ता है जो एक छोटे से बीज से विशाल काय पेड़ की उत्पति का कारक है। जो कल-कल बहती निर्मल नदियों का कारक है और समुन्द्र के रूप में सब का पति है , जो हरे पेड़ में लाल, नीले, पीले फूल उगा रहा है। ज्ञानी वह है जो संसार को नहीं परमात्मा की लगन लगाये है। ज्ञानी वह नहीं जो अपने और अपने गुरु के ज्ञान का बखान में लगा रहे। ज्ञानी वह है जो यह जान चुका की मेरे और गुरु के अन्दर ज्ञान के रूप में कोन बोल रहा है ?
''नयाल सनातनी''
ज्ञानी वह जो परमात्मा के गुणों का बखान करे , ज्ञानी वह जो यह समझ गया की वही परमतत्व ही सब कर्ता-धर्ता है जो एक छोटे से बीज से विशाल काय पेड़ की उत्पति का कारक है। जो कल-कल बहती निर्मल नदियों का कारक है और समुन्द्र के रूप में सब का पति है , जो हरे पेड़ में लाल, नीले, पीले फूल उगा रहा है। ज्ञानी वह है जो संसार को नहीं परमात्मा की लगन लगाये है। ज्ञानी वह नहीं जो अपने और अपने गुरु के ज्ञान का बखान में लगा रहे। ज्ञानी वह है जो यह जान चुका की मेरे और गुरु के अन्दर ज्ञान के रूप में कोन बोल रहा है ?
''नयाल सनातनी''
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