सनातनी विचार ! !! मम दीक्षा गौ रक्षा !!
भारत में लगभग 2 कऱोड़ सफ़ेद एवं भगुवा वस्त्र धारी साधु-संत और सिर्फ 8 कऱोड देशी गौवंश बचा है !
एक और चौकाने वाला सत्य 1% ही बड़े साधु- संतो के पास जिनकी सम्पति 50 करोड़ से 2 हजार करोड़ तक है के पास ही सिर्फ कुछ गौवंश है बाकि ऋषि परम्परा का निर्वाह नहीं कर रहे आखिर क्यों ?
यह सोचने का विषय है साधू - संतों के लिए भी !
60 लाख पूर्ण सक्षम साधु - संत हर संत के पास लगभग 25, 50 से 2000 एकड़ तक भूमि पर गौमाता के लिए स्थान नहीं। अगर इनमे से प्रतेक साधु- संत 50 -100 गौवंश पालने लगे,पलवाने की गारंटी ले लें तो गृहस्थ और किसान के लिए गौपालन के लिए गायें मिलना मुस्किल हो जाएँगी। सिर्फ गुरु मन्त्र के साथ गौ-सेवा का मन्त्र भी दे दें तो करोडो गौवंश बच जायेगा .
क्योकि इन 60 लाख साधु- संतो के पास 30 से 80 करोड़ इनके अनुयाई है जो किसी न किसी रूप में खूब दान देते है। इनके अनुयाइयों में देश के प्रधानमंत्री से लेकर एक गावँ का गरीब किसान तक है । इतने साधु- संतो के होते हुए भी भोर होते - होते 1 लाख से अधिक गौ-वंश रोज कट जायें ?
यह साधु- संतो के लियें सोचनिय विषय होना चाहियें। क्योकि अनादिकाल से संत समाज सनातन धर्म का पथ-प्रदर्शक रहा है .द्वापर युग में गुरु सान्दिपिनी जी ने भी अपने शिष्यों को गुरु दीक्षा में ''मम दीक्षा गौ रक्षा'' की दीक्षा दी थी तभी तो श्री कृष्ण और सुदामा वन- वन नंगे पाँव गौ माता के पीछे भागे .
सावधान सतयुग, त्रेता, द्वापर और कल्युग में भी पिछले 1 सौ वर्ष पूर्व तक सभी साधु - संतो, ऋषि - मुनियों ने गौमाता पाली थी और अपने शिष्यों को गौ-दीक्षा दी थी। तब मूल प्रकृति गौमाता पर इतना भारी संकट नहीं था। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
भारत में लगभग 2 कऱोड़ सफ़ेद एवं भगुवा वस्त्र धारी साधु-संत और सिर्फ 8 कऱोड देशी गौवंश बचा है !
एक और चौकाने वाला सत्य 1% ही बड़े साधु- संतो के पास जिनकी सम्पति 50 करोड़ से 2 हजार करोड़ तक है के पास ही सिर्फ कुछ गौवंश है बाकि ऋषि परम्परा का निर्वाह नहीं कर रहे आखिर क्यों ?
यह सोचने का विषय है साधू - संतों के लिए भी !
60 लाख पूर्ण सक्षम साधु - संत हर संत के पास लगभग 25, 50 से 2000 एकड़ तक भूमि पर गौमाता के लिए स्थान नहीं। अगर इनमे से प्रतेक साधु- संत 50 -100 गौवंश पालने लगे,पलवाने की गारंटी ले लें तो गृहस्थ और किसान के लिए गौपालन के लिए गायें मिलना मुस्किल हो जाएँगी। सिर्फ गुरु मन्त्र के साथ गौ-सेवा का मन्त्र भी दे दें तो करोडो गौवंश बच जायेगा .
क्योकि इन 60 लाख साधु- संतो के पास 30 से 80 करोड़ इनके अनुयाई है जो किसी न किसी रूप में खूब दान देते है। इनके अनुयाइयों में देश के प्रधानमंत्री से लेकर एक गावँ का गरीब किसान तक है । इतने साधु- संतो के होते हुए भी भोर होते - होते 1 लाख से अधिक गौ-वंश रोज कट जायें ?
यह साधु- संतो के लियें सोचनिय विषय होना चाहियें। क्योकि अनादिकाल से संत समाज सनातन धर्म का पथ-प्रदर्शक रहा है .द्वापर युग में गुरु सान्दिपिनी जी ने भी अपने शिष्यों को गुरु दीक्षा में ''मम दीक्षा गौ रक्षा'' की दीक्षा दी थी तभी तो श्री कृष्ण और सुदामा वन- वन नंगे पाँव गौ माता के पीछे भागे .
सावधान सतयुग, त्रेता, द्वापर और कल्युग में भी पिछले 1 सौ वर्ष पूर्व तक सभी साधु - संतो, ऋषि - मुनियों ने गौमाता पाली थी और अपने शिष्यों को गौ-दीक्षा दी थी। तब मूल प्रकृति गौमाता पर इतना भारी संकट नहीं था। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
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