Monday, January 5, 2015

सनातनी विचार !
पवित्र ऋषि मुनियों के आर्यावर्त में हर तीसरा आदमी हत्यारा ! मांसाहारी जब किसी भी जीव का मांस खाता है, शायद ही सोचता होगा की मेरे कारण मेरे जीभ के चटोरेपन के कारण, मेरे जिन्दा लाशों के कब्रगाह पेट के कारण आज एक जीव की हत्या हुई है। सनातन शास्त्रो के अनुसार प्रतेक जीव को भगवान ने किसी न किसी कारण (उद्देश्य ) से बनाया है। अकारण मनुष्य कोई कार्य कर सकता है ! पर परमात्मा नहीं करता। कहते है प्रतेक आत्मा में परमात्मा का वास है, जब तक जीवित आत्मा में परमात्मा बैठा है, तब तक ही जीव जिन्दा है जिस वक्त परमात्मा निकला उसी समय जीव निष्प्राण हुआ। बकरा-बकरी, मुर्गी- मुर्गा, मच्छली-अण्डे, गाय-बैल, भैंसे,हिरण आदि सबके अंदर एक जीवन था। उनकी हत्या कर मांस परोषने  वाले से अधिक दोषी है उन जीवों के मांस को खाने वाला। क्योकि अगर आप उस नर-पिचास द्वारा मारा गया जीव का मांस आज नहीं खाते तो वह कल और जीव हत्या नहीं करता। उससे पैसे देकर मांस खरीदने के मांग के कारण ही उसने आगे भी हत्यायें जारी रखी है।
सावधान जीव हत्यारा भगवान का प्रिय कभी नहीं हो सकता लाख पूजा-पाठ,भागवत, यज्ञं -अनुष्ठान करा लो। -----
  ''नयाल सनातनी'' ;----सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

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