सनातनी विचार !
जो मनुष्य इन 7 चौपाइयों के अर्थ को समझ गया उसके जीवन के सातों दिन सफल हो गये। इन चौपाइयों में जीवन जीने का रहस्य छुपा हुआ है। पूरा भावर्थ जानने रामचरित मानस में इन सातों चौपाइयों को मनन करते हुए जरूर पड़ें।
1 - मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अचर बिहारी --
2 - होइहै वही जो राम रचि राखा,, को करे तरफ़ बढ़ाए साखा --
3 - धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिये चारी ---
4 - जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू ---
5 - जाकी रही भावना जैसी, प्रभु-रघु मूरति देखी तिन तैसी ---
6 - रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई ----
7 - हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता, कहहि सुनहि बहुविधि सब संता ---
सिया राम-सिया राम - जय जय राम
''नयाल सनातनी''
जो मनुष्य इन 7 चौपाइयों के अर्थ को समझ गया उसके जीवन के सातों दिन सफल हो गये। इन चौपाइयों में जीवन जीने का रहस्य छुपा हुआ है। पूरा भावर्थ जानने रामचरित मानस में इन सातों चौपाइयों को मनन करते हुए जरूर पड़ें।
1 - मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अचर बिहारी --
2 - होइहै वही जो राम रचि राखा,, को करे तरफ़ बढ़ाए साखा --
3 - धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परखिये चारी ---
4 - जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू ---
5 - जाकी रही भावना जैसी, प्रभु-रघु मूरति देखी तिन तैसी ---
6 - रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई ----
7 - हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता, कहहि सुनहि बहुविधि सब संता ---
सिया राम-सिया राम - जय जय राम
''नयाल सनातनी''
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