सनातनी विचार !
कामधेनु के शरीर पर अन्य अनेक देवी-देवताओं की तस्वीर तो होती है, पर दुर्गा-भगवती-शिव भार्या पार्वती की तस्वीर नहीं मिलेगी क्योकि स्वयंग दुर्गा-पार्वती ही एक बार गौमाता के रूप में देव भूमि उत्तराखण्ड के ''बागेश्वर धाम'' में प्रकट हुई है। वही जगजनी अन्नपूर्णा जो जीव मात्र के लिए अन्न-प्रसाद का सन्धान करती है वही गौमाता और दुर्गा माता है। वेद की कौथुमी शाखा में जो दुर्गा, नारायणी, ईशाना, विष्णुमाया, शिवा, सती, नित्या, सत्या, भगवती, सर्वाणी, सर्वमंगला, अम्बिका, वैष्णवी, गौरी, पार्वती और सनातनी ये सोलह नाम बताये गये हैं,ये सब नाम गौ-माता के लिए भी कहे जाते रहे है। और ये नाम सब मानव जाति के लिये कल्याणदायक हैं। श्रीमद देवी भागवत के अनुसार कल्पान्तर में जब ब्रह्मा,विष्णु,महेश को भी समझ में नहीं आ रहा था उनकी उतपत्ति का कारण तब उनकी पुकार पर मणिदीप वासिनी भगवती ने अपना मुहं विशाल किया ये तीनो ''सनातनी देव'' उस भगवती के मुहं में समां गए और अनन्त काल तक उस मणिदीप वासिनी के मुख भाग से निचे उतर कर समस्त ब्रह्मांडो के चक्कर लगते रहे और अचरज से उस भगवती के पेट में अनेको ब्रह्मांड अनेको ब्रह्मा, विष्णु, महेश अनेको सूर्य, चन्द्र देख हत प्रभ रह गए। यह कामधेनु गौ भी वही भगवती महामाया मनिदीप वासिनी है जिसका ना आदि है ना अंत ....इसकी रक्षा हम क्या करेंगे यह सबकी रक्षा करने में सक्षम है . जब जब देव और मानव पर संकट आये इन्होने ही सबकी रक्षा की इसको मनाने की देर है, इसके हित में निस्वार्थ होकर कार्य करने की देर है यह मानव जाति के आलावा समस्त जीव-जंतुओं का कल्याण करती है .... .जय गौमाता, जय जगजननी भगवती सनातनी --- ''नयाल सनातनी'' |
Thursday, January 8, 2015
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment