Monday, December 30, 2013
सनातनी विचार !
जिस प्राणी का बध किया जाता है वह प्राणी कहता है। आज मुझे मार कर यह खाता है तो कभी मैं भी इसे मारकर खाऊंगा। यही मांस का मांसत्व है। मांस शब्द दो शब्दों से बना है माम् तथा सः। जिस प्राणी का मांस भक्षण किया जाता है, वह कहता है यह मांस भक्षण करने वाला माम् (मुझे ) खा रहा है, मैं भी कालांतर में सः ( इसे और इसे तथा इसके बच्चो को ) खाऊंगा। इसलिए भूल से भी मांस भक्षण नहीं करना चाहिए न ही मांस भक्षण को बढ़ावा देना चाहिए। जन ही जारी बुलेटिन -- ''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार द्वारा।।।।
सनातनी विचार !
गौभक्त मित्रो एक लीटर भारतीय गाय के दूध में 1.162 ग्राम कैल्शियम, 0. 907 ग्राम फॉस्फोरस, 0. 002 ग्राम लोहा, 0. 497 ग्राम सोडियम होता है। इन्हीं में से अस्थियां, दाँतों, मांसपेशियों एवं रक्त का निर्माण होता है। भारतीय गाय के दूध में तांबे की मात्रा भी होती है, परन्तु बहुत कम मात्रा में होने के कारण विद्वान भले ही इसे महत्व ना देते हूँ, पर स्वस्थ को लाभ बहुत पहुचता है। शाकाहारी वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 500 ग्राम दूध जरूर पीना चाहिए। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक :--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' www.sarvadaliyagaurakshamanch.com
सनातनी विचार :---
जो जीवन में मुक्त नहीं होता, वह मरने के बाद भी मुक्त नहीं होता। और जो ऐसा मानता है कि मुक्ति अभी नहीं मिली, मरने के बाद मिलेगी। वह अपने को धोखा देता है। मुक्ति का एक सरल साधन गौ - माता की सेवा ,रक्षा , और जन - जन तक गौमाता की महिमा को पहुँचना भी है। जो ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' परिवार के सदस्य देश भर में कर रहे है। ये तो सनातन सत्य है कि गौमाता ही वैतरिणी पार करने की नौका है।मौक्ष दायनी है। ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार ;---
वह मन, वह आत्मा, वह जीव धन्य है जो निरंतर परमात्मा का चिन्तन करता है। और वह प्राणी सदा बंदनीय है जो परमात्मा के भक्तो का चिन्तन करता है।वह गुरु धन्य है जो गौ दीक्षा देकर भव-सागर पार करने का मार्ग बता देता है . क्योकि गौ सेवा का पाठ और परमात्मा की भक्ति का मार्ग बताने वाला किसी न किसी रूप में परमात्मा का ही सवरूप होता है।
कही सद्गुरु रूप में कही हनुमान, नारदादि भक्तो के रूप में। ''नयाल सनातनी''
१॰ प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र !
“मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ई गिरिवर गहन।
जासु कृपा सो दयाल, द्रवहु सकल कलिमल-दहन।।”
विधि-प्रभु राम की पूजा करके गुरूवार के दिन से कमलगट्टे की माला पर २१ दिन तक प्रातः और सांय नित्य एक माला (१०८ बार) जप करें।
लाभ-प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। दुर्भाग्य का अन्त हो जाता है।
२॰ रामजी की अनुकम्पा पाने का मन्त्र
“बन्दउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।”
विधि-रविवार के दिन से रुद्राक्ष की माला पर १००० बार प्रतिदिन ४० दिन तक जप करें।
लाभ- निष्काम भक्तों के लिये प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पाने का अमोघ मन्त्र है।
३॰ हनुमान जी की कृपा पाने का मन्त्र
“प्रनउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।
जासु ह्रदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।”
विधि- भगवान् हनुमानजी की सिन्दूर युक्त प्रतिमा की पूजा करके लाल चन्दन की माला से मंगलवार से प्रारम्भ करके २१ दिन तक नित्य १००० जप करें।
लाभ- हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अला-बला, किये-कराये अभिचार का अन्त होता है।
४॰ वशीकरण के लिये मन्त्र
“जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेहि।।”
विधि- सूर्यग्रहण के समय पूर्ण ‘पर्वकाल’ के दौरान इस मन्त्र को जपता रहे, तो मन्त्र सिद्ध हो जायेगा। इसके पश्चात् जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र को सात बार पढ़ कर गोरोचन का तिलक लगा लें।
लाभ- इस प्रकार करने से वशीकरण होता हैl
५॰ सफलता पाने का मन्त्र
“प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देव।
सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब।।”
विधि- प्रतिदिन इस मन्त्र के १००८ पाठ करने चाहियें। इस मन्त्र के प्रभाव से सभी कार्यों में अपुर्व सफलता मिलती है।
६॰ रामजी की पूजा अर्चना का मन्त्र
“अब नाथ करि करुना, बिलोकहु देहु जो बर मागऊँ।
जेहिं जोनि जन्मौं कर्म, बस तहँ रामपद अनुरागऊँ।।”
विधि- प्रतिदिन मात्र ७ बार पाठ करने मात्र से ही लाभ मिलता है।
लाभ- इस मन्त्र से जन्म-जन्मान्तर में श्रीराम की पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
''नयाल सनातनी''
“मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ई गिरिवर गहन।
जासु कृपा सो दयाल, द्रवहु सकल कलिमल-दहन।।”
विधि-प्रभु राम की पूजा करके गुरूवार के दिन से कमलगट्टे की माला पर २१ दिन तक प्रातः और सांय नित्य एक माला (१०८ बार) जप करें।
लाभ-प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। दुर्भाग्य का अन्त हो जाता है।
२॰ रामजी की अनुकम्पा पाने का मन्त्र
“बन्दउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।”
विधि-रविवार के दिन से रुद्राक्ष की माला पर १००० बार प्रतिदिन ४० दिन तक जप करें।
लाभ- निष्काम भक्तों के लिये प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पाने का अमोघ मन्त्र है।
३॰ हनुमान जी की कृपा पाने का मन्त्र
“प्रनउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।
जासु ह्रदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।”
विधि- भगवान् हनुमानजी की सिन्दूर युक्त प्रतिमा की पूजा करके लाल चन्दन की माला से मंगलवार से प्रारम्भ करके २१ दिन तक नित्य १००० जप करें।
लाभ- हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अला-बला, किये-कराये अभिचार का अन्त होता है।
४॰ वशीकरण के लिये मन्त्र
“जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेहि।।”
विधि- सूर्यग्रहण के समय पूर्ण ‘पर्वकाल’ के दौरान इस मन्त्र को जपता रहे, तो मन्त्र सिद्ध हो जायेगा। इसके पश्चात् जब भी आवश्यकता हो इस मन्त्र को सात बार पढ़ कर गोरोचन का तिलक लगा लें।
लाभ- इस प्रकार करने से वशीकरण होता हैl
५॰ सफलता पाने का मन्त्र
“प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देव।
सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब।।”
विधि- प्रतिदिन इस मन्त्र के १००८ पाठ करने चाहियें। इस मन्त्र के प्रभाव से सभी कार्यों में अपुर्व सफलता मिलती है।
६॰ रामजी की पूजा अर्चना का मन्त्र
“अब नाथ करि करुना, बिलोकहु देहु जो बर मागऊँ।
जेहिं जोनि जन्मौं कर्म, बस तहँ रामपद अनुरागऊँ।।”
विधि- प्रतिदिन मात्र ७ बार पाठ करने मात्र से ही लाभ मिलता है।
लाभ- इस मन्त्र से जन्म-जन्मान्तर में श्रीराम की पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
''नयाल सनातनी''
Sunday, December 29, 2013
सनातनी विचार :---
जब भगवान अपने को विषपान कराने वाली पूतना को अपना परम धाम दे सकते है, योगियों को भी दुर्लभ है जो पदवी माँ की उपाधि से अलंकृत कर सकते है, तो बताओ जो भगवान से प्रेम करते है, इस कठिन कलिकाल में उनकी प्राणो से भी प्यारी गय्यो के लिए समय निकल कर भोजन - चारे की व्यवस्था करते है तो उनको कोन सी गति देंगे ? ''नयाल सनातनी'' संस्थापक ;--- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
जब भगवान अपने को विषपान कराने वाली पूतना को अपना परम धाम दे सकते है, योगियों को भी दुर्लभ है जो पदवी माँ की उपाधि से अलंकृत कर सकते है, तो बताओ जो भगवान से प्रेम करते है, इस कठिन कलिकाल में उनकी प्राणो से भी प्यारी गय्यो के लिए समय निकल कर भोजन - चारे की व्यवस्था करते है तो उनको कोन सी गति देंगे ? ''नयाल सनातनी'' संस्थापक ;--- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
Friday, December 27, 2013
सनातनी विचार !
HAPPY NEW YEAR MITRO -- आंग्ल नूतन वर्ष ( अंग्रेजी नव वर्ष ) की शुभ कामना देने से बचने के संदेशो पर हमारा सिर्फ इतना कहना है ! भाषा का विरोध नहीं अपितु ज्ञान होना परम आवश्यक है। वे सभी लोग जो आंग्ल तारीखों का इस्तेमाल करते है, उनको आंग्ल नव वर्ष की शुभ कामना। मित्रो आज विश्व की सम्पर्क भाषा आंग्ल ही है . आज विश्व की सम्पर्क भाषा आंग्ल के साथ हिंदी ,संस्कृत, एवं देश की सभी प्रांतीय भाषाओ का ज्ञान भी होना चाहिए। भारत के लोग कभी इतने संकीर्ण मानसिकता के नहीं हो सकते है, कि किसी भाषा के नव वर्ष का ही विरोध करते हो। हमें विदेशो में अपने वेद विज्ञानं का प्रचार करना है, तो सर्वप्रथम आंग्ल भाषा का ज्ञान होना परम आवश्यक होगा, और है। हर विषय पर विरोध भारती संस्कृति नहीं है। भारतीयो का विश्व को सदा सन्देश रहा है --- ''वसुधैव कुटम्बकम'' .''नयाल सनातनी'' संस्थापक -- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
HAPPY NEW YEAR MITRO -- आंग्ल नूतन वर्ष ( अंग्रेजी नव वर्ष ) की शुभ कामना देने से बचने के संदेशो पर हमारा सिर्फ इतना कहना है ! भाषा का विरोध नहीं अपितु ज्ञान होना परम आवश्यक है। वे सभी लोग जो आंग्ल तारीखों का इस्तेमाल करते है, उनको आंग्ल नव वर्ष की शुभ कामना। मित्रो आज विश्व की सम्पर्क भाषा आंग्ल ही है . आज विश्व की सम्पर्क भाषा आंग्ल के साथ हिंदी ,संस्कृत, एवं देश की सभी प्रांतीय भाषाओ का ज्ञान भी होना चाहिए। भारत के लोग कभी इतने संकीर्ण मानसिकता के नहीं हो सकते है, कि किसी भाषा के नव वर्ष का ही विरोध करते हो। हमें विदेशो में अपने वेद विज्ञानं का प्रचार करना है, तो सर्वप्रथम आंग्ल भाषा का ज्ञान होना परम आवश्यक होगा, और है। हर विषय पर विरोध भारती संस्कृति नहीं है। भारतीयो का विश्व को सदा सन्देश रहा है --- ''वसुधैव कुटम्बकम'' .''नयाल सनातनी'' संस्थापक -- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार''
Wednesday, December 25, 2013
सनातनी विचार !
जो जीवन में मुक्त नहीं होता, वह मरने के बाद भी मुक्त नहीं होता। और जो ऐसा मानता है कि मुक्ति अभी नहीं मिली, मरने के बाद मिलेगी। वह अपने को धोखा देता है। जिस तरह मन के हारे - हार है, मन के जीते - जीत। उसी प्रकार शरीर के रहते ही मुक्ति होसकती है, शरीर के मृत्यु के बाद की मुक्ति छलावा है। ''नयाल सनातनी''
जो जीवन में मुक्त नहीं होता, वह मरने के बाद भी मुक्त नहीं होता। और जो ऐसा मानता है कि मुक्ति अभी नहीं मिली, मरने के बाद मिलेगी। वह अपने को धोखा देता है। जिस तरह मन के हारे - हार है, मन के जीते - जीत। उसी प्रकार शरीर के रहते ही मुक्ति होसकती है, शरीर के मृत्यु के बाद की मुक्ति छलावा है। ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार ;--
बदसुरत लोग इसलिए आईना देखें कि, वे खुद से अधिक खूबसूरत काम करने की प्रेरणा ले सकें।
सुन्दर लोग इसलिए आईना देखें कि, वे अपने चेहरे के अनुरूप कार्य को अंजाम दें सकें।
सुन्दरता प्रकृति का उपहार भी है और अग्नि परीक्षा भी, सुन्दर व्यक्ति को मूल प्रकृति की कृपा का कर्ज चुकाना ही चाहिए। मूल प्रकृति यानि गौमाता।गौ माता को चारा नहीं खिलाने वाले की सुन्दरता चिर काल नहीं रहती ''नयाल सनातनी'' संस्थापक - सर्वदलीय गौरक्षा मंच ।
बदसुरत लोग इसलिए आईना देखें कि, वे खुद से अधिक खूबसूरत काम करने की प्रेरणा ले सकें।
सुन्दर लोग इसलिए आईना देखें कि, वे अपने चेहरे के अनुरूप कार्य को अंजाम दें सकें।
सुन्दरता प्रकृति का उपहार भी है और अग्नि परीक्षा भी, सुन्दर व्यक्ति को मूल प्रकृति की कृपा का कर्ज चुकाना ही चाहिए। मूल प्रकृति यानि गौमाता।गौ माता को चारा नहीं खिलाने वाले की सुन्दरता चिर काल नहीं रहती ''नयाल सनातनी'' संस्थापक - सर्वदलीय गौरक्षा मंच ।
सनातनी विचार !
गौ माता को हरा चारे का दान सर्वशेष्ठ दान है .
तुलसी पक्षिन के पिये सरिता घटे ना नीर , दान किये धन ना घटे सदा सही रघुवीर ------------------------------ ------------------.
साधारण उदहारण --जिस प्रकार ऊपर छत में लगे पानी के टंकी में फुटबाल के माध्यम से जैसे ही एक बाल्टी पानी निकलते ही फुटबाल फिर एक बाल्टी पानी भरने तक अपना मुहं खोल देता है .उसी प्रकार शुद्द मन से सुपात्र को दिया गया दान जितना दिया गया है उतना ही, उससे ज्यादा ही फिर प्राप्त हो जाता है यह सनातन सत्य है इसमें संसय नहीं होना चाहिए . दान अपने से श्रेष्ठ को और दया अपने से निम्न को और दीन दुखियो को करनी चाहिए . अन्न दान के बारे में शास्त्र कहते है, की अन्न का दान किसी को भी और कही भी किया जा सकता है। इसमे पात्र - कुपात्र नहीं देखना चाहिए . अन्न दान करने से सदा कल्याण ही होता है विद्या दान , भूमि दान , अन्न दान , कन्या दान ,गोदान ये अति श्रेष्ठ दानो में से है ..''नयाल सनातनी''
तुलसी पक्षिन के पिये सरिता घटे ना नीर , दान किये धन ना घटे सदा सही रघुवीर ------------------------------
साधारण उदहारण --जिस प्रकार ऊपर छत में लगे पानी के टंकी में फुटबाल के माध्यम से जैसे ही एक बाल्टी पानी निकलते ही फुटबाल फिर एक बाल्टी पानी भरने तक अपना मुहं खोल देता है .उसी प्रकार शुद्द मन से सुपात्र को दिया गया दान जितना दिया गया है उतना ही, उससे ज्यादा ही फिर प्राप्त हो जाता है यह सनातन सत्य है इसमें संसय नहीं होना चाहिए . दान अपने से श्रेष्ठ को और दया अपने से निम्न को और दीन दुखियो को करनी चाहिए . अन्न दान के बारे में शास्त्र कहते है, की अन्न का दान किसी को भी और कही भी किया जा सकता है। इसमे पात्र - कुपात्र नहीं देखना चाहिए . अन्न दान करने से सदा कल्याण ही होता है विद्या दान , भूमि दान , अन्न दान , कन्या दान ,गोदान ये अति श्रेष्ठ दानो में से है ..''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
!! सर्वदलीय गौ - संवर्धन केंद्र की स्थापना हेतु अधिकार पत्र !! दिनांक 25 - 13 2013
परम सम्मानीय गौभक्त ,
श्रीमान राम - निवास जी सादर वंदे गौ - मातरम । मित्रवर बड़े हर्ष और प्रसन्नता का विषय है कि आप के अंदर विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदे ने बैठ कर विश्व जननी गौमाता की सेवा करने का संकल्प दिलाया है। जरिया चाहे गौमाता ने किसी को बनाया हो पर आपके करोडो जन्मो के पुण्य का जब उदय हुआ है, और पापो का नाश हुआ है,और माँ ने आपके कुल के जब लाखो पीडियो को तारने का मन बना लिया तभी आप पर यह महान कृपा हुई है। मित्रवर राम निवास जी गौमाता इतनी पवित्र और महान है कि उसकी महिमा गाने में भगवान श्री कृष्ण भी अपने को असमर्थ समझते थे।कहते थे मैं सिर्फ गायो के पीछे चलना ही जनता हु। श्री राजाराम को भी गाय और भरत के गुणो को गाने में बड़ी कठिनाई हुई,श्रीराम की आखें नम हो गयी श्रीराम ने कहाँ भरत और गौमाता दोनों संत है संतो की महिमा बताना सम्भव नहीं। समुंद्र मंथन से जो पाँच गौ प्रकट हुई थी वह ऋषियो को इसलिए ही दी थी कि संत ही संत की सही सेवा कर सकते है। आज शायद आपका चुनाव भी भगवत प्रेरणा से ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' पंजीकृत 15 29 /12 पवित्र संतो की सद प्रेरणा से स्थापित संगठन के सभी सदस्य आपको संत मानते हुए ये महान कार्यभार सौप रहा है।आपको वृन्दावन और ग्वालियर में गौसंवर्धन केन्द्रो की स्थापना की पूर्ण सुकृति देता है। साथ ही ये दोनों केन्द्रो की पूर्ण जुम्मेवारी सौपते हुए आपको गौ - भक्तो का मजबूत संगठन बनाने की जरूरत पर भी बल देता है। क्योकि संघे शक्ति कल्युगे। हम जानते है आप विद्वान है जो हमारा आश्रय है आप सब समझ गए होंगे। भविष्य में हम पूर्ण प्रयास करेंगे कि आपके द्वारा संचालित दोनों गौसंवर्धन केन्द्रो को राज्य एवं केंद्र सरकार की तय मापदंडो के अनुसार सुबिधा दिला सकें। पर ये सब तब होगा जब आप सुद्द संकल्प के साथ लोगो को जोड़ कर गौसंवर्धन केंद्र स्थापित कर लेंगे। हमें पूर्ण विश्वास है कि आपका काम गौमाता आसान करेगी क्योकि आप देव कार्य करने निकले है। आप सदा प्रसन्न रहे यही आशीर्वाद हमारा है। राम राम , जय गौमाता की ----
राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह नयाल ''सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' परिवार
!! सर्वदलीय गौ - संवर्धन केंद्र की स्थापना हेतु अधिकार पत्र !! दिनांक 25 - 13 2013
परम सम्मानीय गौभक्त ,
श्रीमान राम - निवास जी सादर वंदे गौ - मातरम । मित्रवर बड़े हर्ष और प्रसन्नता का विषय है कि आप के अंदर विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदे ने बैठ कर विश्व जननी गौमाता की सेवा करने का संकल्प दिलाया है। जरिया चाहे गौमाता ने किसी को बनाया हो पर आपके करोडो जन्मो के पुण्य का जब उदय हुआ है, और पापो का नाश हुआ है,और माँ ने आपके कुल के जब लाखो पीडियो को तारने का मन बना लिया तभी आप पर यह महान कृपा हुई है। मित्रवर राम निवास जी गौमाता इतनी पवित्र और महान है कि उसकी महिमा गाने में भगवान श्री कृष्ण भी अपने को असमर्थ समझते थे।कहते थे मैं सिर्फ गायो के पीछे चलना ही जनता हु। श्री राजाराम को भी गाय और भरत के गुणो को गाने में बड़ी कठिनाई हुई,श्रीराम की आखें नम हो गयी श्रीराम ने कहाँ भरत और गौमाता दोनों संत है संतो की महिमा बताना सम्भव नहीं। समुंद्र मंथन से जो पाँच गौ प्रकट हुई थी वह ऋषियो को इसलिए ही दी थी कि संत ही संत की सही सेवा कर सकते है। आज शायद आपका चुनाव भी भगवत प्रेरणा से ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' पंजीकृत 15 29 /12 पवित्र संतो की सद प्रेरणा से स्थापित संगठन के सभी सदस्य आपको संत मानते हुए ये महान कार्यभार सौप रहा है।आपको वृन्दावन और ग्वालियर में गौसंवर्धन केन्द्रो की स्थापना की पूर्ण सुकृति देता है। साथ ही ये दोनों केन्द्रो की पूर्ण जुम्मेवारी सौपते हुए आपको गौ - भक्तो का मजबूत संगठन बनाने की जरूरत पर भी बल देता है। क्योकि संघे शक्ति कल्युगे। हम जानते है आप विद्वान है जो हमारा आश्रय है आप सब समझ गए होंगे। भविष्य में हम पूर्ण प्रयास करेंगे कि आपके द्वारा संचालित दोनों गौसंवर्धन केन्द्रो को राज्य एवं केंद्र सरकार की तय मापदंडो के अनुसार सुबिधा दिला सकें। पर ये सब तब होगा जब आप सुद्द संकल्प के साथ लोगो को जोड़ कर गौसंवर्धन केंद्र स्थापित कर लेंगे। हमें पूर्ण विश्वास है कि आपका काम गौमाता आसान करेगी क्योकि आप देव कार्य करने निकले है। आप सदा प्रसन्न रहे यही आशीर्वाद हमारा है। राम राम , जय गौमाता की ----
राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह नयाल ''सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' परिवार
सनातनी विचार !
I सृष्टि नियंत्रणकर्ता भगवान पशुपतिनाथ माता पार्वती से कहते है I
हे देवी ! १ - दूध देने वाली गौ - पालन करने से सामान्य फल प्राप्त होता है।
२ - बिना दूध देने वाली गाय का पालन पर मनुष्य दूना फल प्राप्त करता है।
३ - अपंग बूढ़ी गौवंश का पालन अपने बीमार माता - पिता की तरह करने पर मनुष्य पाँच गुना फल पाता है।
४ - कसाई / काटने वाले से सामान्य से अधिक मूल्य देकर शक्ति से छुड़ाकर गौपालन करता है उसे दस गुना पुण्य प्राप्त होता है।
हे देवी ! ५ - इस प्रकार सौ या सौ से अधिक गायों को कसाई से लेकर जो मनुष्य शक्तिपूर्वक पालता है या गौओ की प्राण रक्षा के लिए प्राण त्याग करता है वह मेरे बराबर होकर इस लोक में सुख भोग कर अंत में वह मुझ में विलीन हो जाता है उसका पुनर्जन्म नहीं होता। ये राम नाम की तरह सत्य है।
गौ संवर्धन - संरक्षण करने के लिए उन्नत किस्म की देशी गौवंश का पालन करने वाला मनुष्य अक्षय पुण्य का भागी होता है। और वह अपनी आगे कि पीछे की १०० पीडियो का उद्धारक बन जाता है।
प्रस्तुति -- राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह नयाल संस्थापक ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच। sarvadaliyagaurakshamanch.com/
I सृष्टि नियंत्रणकर्ता भगवान पशुपतिनाथ माता पार्वती से कहते है I
हे देवी ! १ - दूध देने वाली गौ - पालन करने से सामान्य फल प्राप्त होता है।
२ - बिना दूध देने वाली गाय का पालन पर मनुष्य दूना फल प्राप्त करता है।
३ - अपंग बूढ़ी गौवंश का पालन अपने बीमार माता - पिता की तरह करने पर मनुष्य पाँच गुना फल पाता है।
४ - कसाई / काटने वाले से सामान्य से अधिक मूल्य देकर शक्ति से छुड़ाकर गौपालन करता है उसे दस गुना पुण्य प्राप्त होता है।
हे देवी ! ५ - इस प्रकार सौ या सौ से अधिक गायों को कसाई से लेकर जो मनुष्य शक्तिपूर्वक पालता है या गौओ की प्राण रक्षा के लिए प्राण त्याग करता है वह मेरे बराबर होकर इस लोक में सुख भोग कर अंत में वह मुझ में विलीन हो जाता है उसका पुनर्जन्म नहीं होता। ये राम नाम की तरह सत्य है।
गौ संवर्धन - संरक्षण करने के लिए उन्नत किस्म की देशी गौवंश का पालन करने वाला मनुष्य अक्षय पुण्य का भागी होता है। और वह अपनी आगे कि पीछे की १०० पीडियो का उद्धारक बन जाता है।
प्रस्तुति -- राजर्षि धर्मवीर ठाकुर जयपाल सिंह नयाल संस्थापक ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच। sarvadaliyagaurakshamanch.com/
सनातनी विचार ;---
वह मन, वह आत्मा, वह जीव धन्य है जो निरंतर परमात्मा का चिन्तन करता है। और वह प्राणी सदा बंदनीय है जो परमात्मा के भक्तो का चिन्तन करता है। क्योकि परमात्मा से मिलाने वाला किसी न किसी रूप में परमात्मा का भक्त ही होता है। कही सद्गुरु रूप में कही हनुमान, नारदादि भक्तो के रूप में। ''नयाल सनातनी''
वह मन, वह आत्मा, वह जीव धन्य है जो निरंतर परमात्मा का चिन्तन करता है। और वह प्राणी सदा बंदनीय है जो परमात्मा के भक्तो का चिन्तन करता है। क्योकि परमात्मा से मिलाने वाला किसी न किसी रूप में परमात्मा का भक्त ही होता है। कही सद्गुरु रूप में कही हनुमान, नारदादि भक्तो के रूप में। ''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार !
!! गौ कथा !!
!! गौ कथा !!
शंकर
भगवान को ८७,०००
वर्ष की समाधि
लग गई। उसका
रामचरितमानस
मैं वर्णन हैं
:
शंकर
सहज स्वरूप
सँभारा । लगी
समाधि अखंड
अपारा ।
सहज स्वरूप क्या हैं ? जब हम पैदा हुए वही हमारा सहज स्वरूप था।
१. हमारे
मुख मैं शब्द
था माँ।
२. हमारे
हाथ की मुद्रा
प्रणाम की थी।
३. हमारा
माथा झुका हुआ
था। हमारी
जन्म देने वाली
माँ वर्षभर तक
हमें दूध
पिलाती है और
श्री कृष्ण की
दुलारी गायें
हमें आजीवन
दूध पिलाती है,
अब बताओ कौन
श्रेष्ठ।
४ . भगवान
श्रीकृष्ण
कहते है मुझपर
तो माँ देवकी
से ज्यादा हक़
माँ यशोदा का
है क्योकि
उन्होंने ही
हमें पाल - पोस
कर गय्यों का
दूध - माखन खिल -
पिलाकर कंस
जैसे आताताई
को मार डालने
लायक शक्ति
संम्पन बना दिया।
४. हमारी
सहज क्रिया थी
माँ का दूध
पीना। (गौ माता
का दूध पीना )
बस ये चार
चीजे याद रख
लो तुम्हे
वैकुण्ठ जाने
से कोई नहीं
रोक सकता।
बोलो गौ
माता की जय।। ''नयाल
सनातनी'' सर्वदलीय
गौरक्षा मंच
संस्थापक।
सनातनी विचार !
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' का उद्देश गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना और गौवंश को अब्धया घोषित कराना। साथ ही शाकाहार का प्रचार करते हुए कम से कम भारतीयों को जिओ और जीने दो की राह का पथिक बनाना है। हमारा मानना है जब तक गौवंश की हत्या होती रहेगी संसार में अति वृष्टि , ओला वृष्टि, भूकम्प, आतंकवाद और अलगावबाद जारी रहेगा। ध्यान रहे : - गौ मूल प्रकृति है, मूल प्रकृति के नष्ट होते ही सब कुछ नष्ट हो जायेगा। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक :-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार !
गौ - भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है | ''नयाल सनातनी''
गौ - भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है | ''नयाल सनातनी''
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