सनातनी विचार !
जिस प्राणी का बध किया जाता है वह प्राणी कहता है।
आज मुझे मार कर यह खाता है तो कभी मैं भी इसे मारकर खाऊंगा। यही मांस का
मांसत्व है। मांस शब्द दो शब्दों से बना है माम् तथा सः। जिस प्राणी का
मांस भक्षण किया जाता है, वह कहता है यह मांस भक्षण करने वाला माम् (मुझे )
खा रहा है, मैं भी कालांतर में सः ( इसे और इसे तथा इसके बच्चो को )
खाऊंगा। इसलिए भूल से भी मांस भक्षण नहीं करना चाहिए न ही मांस भक्षण को
बढ़ावा देना चाहिए। जन ही जारी बुलेटिन -- ''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा
मंच परिवार द्वारा।।।।
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