Monday, December 30, 2013

सनातनी विचार ;--- 
वह मन, वह आत्मा, वह जीव धन्य है जो निरंतर परमात्मा का चिन्तन करता है। और वह प्राणी सदा बंदनीय है जो परमात्मा के भक्तो का चिन्तन करता है।वह गुरु धन्य है जो गौ दीक्षा देकर भव-सागर पार करने का मार्ग बता देता है . क्योकि गौ सेवा का पाठ और परमात्मा की भक्ति का मार्ग बताने  वाला किसी न किसी रूप में परमात्मा का ही सवरूप होता है। 
कही सद्गुरु रूप में कही हनुमान, नारदादि भक्तो के रूप में। ''नयाल सनातनी''

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