सनातनी विचार !
जो जीवन में मुक्त नहीं होता, वह मरने के बाद भी मुक्त नहीं होता। और जो ऐसा मानता है कि मुक्ति अभी नहीं मिली, मरने के बाद मिलेगी। वह अपने को धोखा देता है। जिस तरह मन के हारे - हार है, मन के जीते - जीत। उसी प्रकार शरीर के रहते ही मुक्ति होसकती है, शरीर के मृत्यु के बाद की मुक्ति छलावा है। ''नयाल सनातनी''
जो जीवन में मुक्त नहीं होता, वह मरने के बाद भी मुक्त नहीं होता। और जो ऐसा मानता है कि मुक्ति अभी नहीं मिली, मरने के बाद मिलेगी। वह अपने को धोखा देता है। जिस तरह मन के हारे - हार है, मन के जीते - जीत। उसी प्रकार शरीर के रहते ही मुक्ति होसकती है, शरीर के मृत्यु के बाद की मुक्ति छलावा है। ''नयाल सनातनी''
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