सनातनी विचार !
!! गौ कथा !!
!! गौ कथा !!
शंकर
भगवान को ८७,०००
वर्ष की समाधि
लग गई। उसका
रामचरितमानस
मैं वर्णन हैं
:
शंकर
सहज स्वरूप
सँभारा । लगी
समाधि अखंड
अपारा ।
सहज स्वरूप क्या हैं ? जब हम पैदा हुए वही हमारा सहज स्वरूप था।
१. हमारे
मुख मैं शब्द
था माँ।
२. हमारे
हाथ की मुद्रा
प्रणाम की थी।
३. हमारा
माथा झुका हुआ
था। हमारी
जन्म देने वाली
माँ वर्षभर तक
हमें दूध
पिलाती है और
श्री कृष्ण की
दुलारी गायें
हमें आजीवन
दूध पिलाती है,
अब बताओ कौन
श्रेष्ठ।
४ . भगवान
श्रीकृष्ण
कहते है मुझपर
तो माँ देवकी
से ज्यादा हक़
माँ यशोदा का
है क्योकि
उन्होंने ही
हमें पाल - पोस
कर गय्यों का
दूध - माखन खिल -
पिलाकर कंस
जैसे आताताई
को मार डालने
लायक शक्ति
संम्पन बना दिया।
४. हमारी
सहज क्रिया थी
माँ का दूध
पीना। (गौ माता
का दूध पीना )
बस ये चार
चीजे याद रख
लो तुम्हे
वैकुण्ठ जाने
से कोई नहीं
रोक सकता।
बोलो गौ
माता की जय।। ''नयाल
सनातनी'' सर्वदलीय
गौरक्षा मंच
संस्थापक।
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