सनातनी विचार ;---
वह मन, वह आत्मा, वह जीव धन्य है जो निरंतर परमात्मा का चिन्तन करता है। और वह प्राणी सदा बंदनीय है जो परमात्मा के भक्तो का चिन्तन करता है। क्योकि परमात्मा से मिलाने वाला किसी न किसी रूप में परमात्मा का भक्त ही होता है। कही सद्गुरु रूप में कही हनुमान, नारदादि भक्तो के रूप में। ''नयाल सनातनी''
वह मन, वह आत्मा, वह जीव धन्य है जो निरंतर परमात्मा का चिन्तन करता है। और वह प्राणी सदा बंदनीय है जो परमात्मा के भक्तो का चिन्तन करता है। क्योकि परमात्मा से मिलाने वाला किसी न किसी रूप में परमात्मा का भक्त ही होता है। कही सद्गुरु रूप में कही हनुमान, नारदादि भक्तो के रूप में। ''नयाल सनातनी''
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