Thursday, July 31, 2014

सनातनी विचार !
विद्ध्या की अधिष्ठात्री देवी जो माँ शारदे है वह कहती है विनम्रता से भगवन नाम स्मरण करते हुए किसी के मन में आघात पहुचाये बिना जो शब्द कलमकार के कलम से निकलते है वह मेरी कृपा है .

सनातनी विचार !
गोविन्द ने तो गौमाता को मानव के लिए अमूर्त की खान बना कर भेजा था . साथ में पंच गव्यों की दुकान भेजा था . जो कम से कम 20 - 25 साल तक चल सके और 4 लाख 32 हजार मानव का भरण - पोषण करे .( याद रहे कल्युग की आयु भी 4 लाख 32 हजार वर्ष है ) पर मानव ने दानव बनकर उसका क़त्ल कर सिर्फ 80 लोगो का भोजन का सामान बना दिया . 
सनातनी विचार !
ताली दो हाथो से बजती है . थोडा - थोडा झुकने से संसार अपना हो जाता है . अकड़ तो मुर्दों की पहचान माना जाता है .वह परमात्मा भी तो पके और लदे हुए फलो के वृक्षों से यही सन्देश देता है पर समझ वही पता है जो ईश्वर मुख हो .
सनातनी विचार !
मैंने सब किया यह राक्षस बुद्दी है . सब परमात्मा के आदेश से हो रहा है यह देव बुद्दी है . माऊ माऊ ( मैं हूँ ,मैं हूँ ) कहने वाली बिल्ली को दुत्कार और मैना मैना ( मैं नहीं हूँ मैं कुछ नहीं हूँ ) कहने वाली मैना की बोली को प्यार मिलना जग की रीत है .
सनातनी विचार ! 
बिना पूरा विषय को पड़े या समझे ही जल्द बाजी में जबाब लिखने या बोलने से जग हँसाई भी हो सकती है . इस लिए पूरे विषय को अच्छी तरह पड़ कर मनन कर अपनी अमूल्य राय एक बार ही रखने वाले सदा सबके लिए सम्मानित बने रहते है . जिसका मन स्थिर नहीं और वह अपने विवेक से ना सोच लोगो के बहकावे में अपनी राय बदल दे उसे ही विद्द्वान लोग अस्थिर बुद्दी कहते है ........
सनातनी विचार !
आलसी और निकम्भे लोग घर बैठे या तो भाग्य को कोसते है या भगवान को . कुछ न मिला तो सत मार्ग पर चलने वालो में खोट ढूडते है. उनकी मानसिक दिवालियापन का कुछ अविवेकी साथ देकर उनका उत्साह वर्धन कर उनको पतन के असली गर्त में पंहुचा देते है . बाद में इनके जीवन में बड़ा अँधेरा छा जाता है और पतन होता है क्योकि सच्चाई एक दिन सामने आती ही है .--
सनातनी विचार !
स्वार्थी का दिखावे वाला प्यार और मुर्ख की दोस्ती हमेशा खतरे की घंटी है .सावधान .

Wednesday, July 30, 2014

सनातनी विचार ! 
महापुरुषों का भी मत है स्वार्थ के लिए दुसरे की मेहनत से बनाया मार्ग पर चल कर मिली सफलता अल्प काल तक ही रहती है . मानव को अपना मार्ग स्वयंग प्रसस्त करना चाहिए या स्वार्थ त्याग परमार्थ में हित चिंतन करना चाहियें ..........
सनातनी विचार ! भाग्य के भरोसे बैठे रहने से भाग्य सोया रहता है, और साहस पूर्वक गौ कार्य करने से भाग्य उठ खड़ा होता है .......
सनातनी विचार ! वे सभी मोक्ष के अधिकारी है जो गौ माता में अटल विश्वास रखते है .और उसकी महिमा को जन - जन तक पहुचाते है .उसकी सेवा के लिए सदा तत्पर रहते है ......
सनातनी विचार !
आचरण - रहित विचार कितने ही अच्छे क्यों न हो, उनहें खोटे मोती की तरह समझना चाहिए .
सनातनी विचार ! आलसी और निकम्भे लोग घर बैठे या तो भाग्य को कोसते है या भगवान को . कुछ न मिला तो सत मार्ग पर चलने वालो में खोट ढूडते है .---
सनातनी विचार !
स्वामी राम देव जी महाराज को सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार का नमन !
हमें खबर मिली है की गौ-माता के हित में कार्य करने में सरकार को देश की सबही गौरक्षा संगठनो के साथ - साथ स्वामी राम देव जी महाराज ने भी बहुत-बहुत सक्त दबाव डाला . हम स्वामी जी को नमन करते है .
सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार की ओर से हरिद्वार पतंजलि योग पीठ में 21 लोगो के प्रतिनिधि मंडल का स्वामी जी को राष्ट्रपति - प्रधान मंत्री जी के तर्ज पर ज्ञापन देना भी सार्थक शिद्द हुआ ...''नयाल सनातनी'' राष्ट्रिय अध्यक्ष ;---''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Friday, July 25, 2014

सनातनी विचार !
सावधान हर रोज लाखो आतंकी हो रहे है तैयार !!!!!
गौ-भक्त मित्रो ! क्या आपने कभी सुना है की गेहूँ बोये जाने पर कपास पैदा हुआ ? नहीं ना तो बताओं आतंक बोने से अहिंसक जीव कैसे पैदा होंगें ?

हर रोज हो रही लाखों गौवंश की निमर्म हत्या से जो मानव जन्म लेता है, वह आतंकी पैदा होता है। जैसे की महापुरुषों ने शास्त्रो के माध्यम से कहाँ है,और आप विद्द्वान गौप्रेमी सब जानते ही है।  मानव से पहला जन्म गौवंश में ही मनुष्य का होता है। हमारे पूर्वज गौवंश यानि गौमाता ही है।

जब गौवंश आखरी वक्त में चारो पावों को बधा, उल्टा लटका, गला कटा हुआ, अपने ऊपर 300 डिग्री का खौलता गर्म पानी जैसा कैमिकल मिला तरल पदार्थ देखता है और हाय हाय की करुण पुकार करता है। उसपर भी कसाइयों द्वारा अभी जिन्दा गौवंश की खाल उतारी जाती है। तो वह सबसे पहले उसके पूजने वाले को ही बद दुवा देता है, फिर जैसा दृस्य वह उन अंतिम क्षणों में आतंकित होकर देखता है। अगले जन्म में वही क्रूर चेहरा लेकर पैदा होता है और फिर देश और दुनिया को ख़त्म करने की ही बात सोचता है और करता है। ज्यादातर जो लोग इस गौवंश का क़त्ल करते है उन्हीं संप्रदाय में ये गौवंश जन्म  लेते है।
तब इनके लिए अपना परया कुछ नहीं होता जिस प्रकार प्रेत आत्मा अपने पराये का भेद नहीं करती अपने ही को पहले ख़त्म करती है उसी प्रकार ये आतंकी भी अपनों के लिए ही पहले गड्डा खोदते है क्योकि ये पूर्व जन्म का बदला लेते है। ''नयाल सनातनी'' राष्ट्रिय अध्यक्ष ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Thursday, July 24, 2014

सनातनी विचार !  भारी से भारी विपत्ति में फँसा मानव भी अगर गौ-माता के पूँछ पकड़ कर १०८ हनुमान चालीसा का पाठ पढ़े तो उसका दुःख-दरिद्र और उसके ऊपर आई अला - बला , कुदृष्टि तुरन्त नष्ट हो जाती है। ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;---''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार ! विनम्रता ही मानव का भूषण--
राजा भोज के दरबार के महाकवि माघ विद्द्वान तो थे पर विनम्रता !
                  एक बार महाकवि वनविहार के समय राह भटक गए। जंगल में एक झोपड़ी दिखाई दी उसमे से एक बुढियां बहार निकली महाकवि ने पूछा।
१- सवाल - यह रास्ता किधर जाता है ? वृद्दा का उत्तर - रास्ता तो कही नहीं जाता पर पथिक आते -जाते है। 
२- अब वृद्धा का सवाल - आप कौन है ? उत्तर महाकवि - हम यात्री।  वृद्धा ने मुस्कराते हुए सहज भाव से कहा यात्री तो दो ही है इस संसार में एक सूर्य दूसरा चन्द्रमा आप इनमे से कौन है सच - सच बताइये।

महाकवि थोड़ा अचरज में पास गये और संभलकर बोले, हम राजा है। महाकवि ने सोचा बुढ़िया पर इसका प्रभाव पड़ेगा और आगे प्रशन नहीं करेगी। पर वृद्धा ने अगले ही पल कहा नहीं तुम राजा कैसे हो सकते हो ? राजा तो शास्त्र अनुसार दो हो सकते है। एक इंद्र  दूसरा यम आप कौन है ?
महाकवि यह सुनकर विचलित हो गए फिर बोले माँ हम क्षणभंगुर मनुष्य है। तब वृद्धा ने तत्पर कहा क्षणभंगुर भी दो ही होते है पहला धन, दूसरा यौवन। सनातन शास्त्र -पुराण कहते है कि इन दोनों का विश्वास नहीं करना चाहिए।

अब महाकवि माघ ने अंतिम दाँव फेंका। कहा हम सबको माफ़ करने वाली आत्मा है। वृद्धा ने तुरन्त कहा संसार में सबको माफ़ करने वाले तीन ही है।एक पृथ्वी दूसरी गौ, तीसरी नारी । आप इन तीनो की बराबरी किस प्रकार कर सकते हो ? महाकवि माघ अवाक् रह गए।

तब वृद्धा बोली, महाकवि माघ ! मैं तुम्हें अच्छी तरह जानती हूँ।  किताबी विद्दता के साथ मनुष्य में विनम्रता भी होनी चाहिये न क़ि अहंकार। '' यह सुनकर माघ का गर्व सदैव के लिए चूर हो गया।  पर क्या यह सब जानने के बाद भी अपनी गलती पर आज के विद्द्वानो का गर्व सदैव के लिए चूर होता है ?
                                                    ''नयाल सनातनी'' 

Wednesday, July 23, 2014

सनातनी विचार ! 
गौ-माता सम्पूर्ण विश्व को सभी प्रकार के सुखों से समृद्ध करने वाली है !
हे मनुष्यो ! जैसे ऐश्वर्ययुक्त गौवें पहले बछड़ों को दूध देती है, वैसे ही ऐश्वर्य संपन्न उत्तम जन अपनी बाणी, विद्या और सेवनीय व्यवहार से मुक्त शिक्षा प्रदान करते है।

मैं आत्मा और विशेष ज्ञान से ऐसे विशिष्ठ जनों की कामना करता हूँ। की वे इस कठिन कलिकाल में अपना अहम त्याग गौमाता के हक़ में लड़ाई लड़ें । कलम वाले कलम से, तलवार वाले तलवार से सेवा वाले सेवा से कानून वाले कानून से। ----- ''नयाल सनातनी'' संस्थापक अध्यक्ष ;--- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''
सनातनी विचार ! प्रतेक भारतीय ''हिन्दू सनातनी'' को अपनी सदियों पुरानी संस्कृति के अनुसार तिलक, चोटी ( शिखा ), जनेऊ (यज्ञोपवित), धोती और गौमूत्र को जरूर अपने नित्य पूजा पद्धति में सामिल करना चाहियें। इन सबके बिना पूजा शुद्द नहीं मानी जा सकती।
http://sarvadaliyagaurakshamanch.com/ ''नयाल सनातनी'' संस्थापक एवं राष्ट्रिय अध्यक्ष;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Monday, July 21, 2014

सनातनी विचार ;---------- बच्चों को कुसंगति से, महिलाओं को व्यर्थ बातों से, बुजुर्गों को व्यर्थ चिंता से, स्वयं को विवाद से, गौमाता को मुसीबत से, देश को भ्रष्टाचारियों से बचावें। तब तो देश, विश्व, समस्त ब्रह्माण्ड एवं स्वयंग का कल्याण निश्चित है। ''नयाल सनातनी''

Sunday, July 20, 2014

सनातनी विचार से !
''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' का भारत सरकार से २१ सूत्रीय गौरक्षा मांग पत्र।  ''गावो विश्वस्य मातरः'' 
आज भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे सभी मानव सुखी है पर जीव मात्र की माता कहलाने का अधिकार रखने वाली वेदों द्वारा पूज्यनीय, देवताओं को भी भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौ माता आज सड़कों पर मल, गन्दगी, प्लास्टिक खाने को मजबूर है | पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आज भी भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे कुछ ऐसे पुण्यवान, भामाशाह और अपनी माँ के कोख को धन्य करने वाले गौ भक्त भी है, जिनके सहयोग से आज भी लाखो गौवंश गौशालाओं मे, किसानों के यहाँ, अपने घर पर ही सुरक्षित है | क्या ये गौभक्त, जिनकी वजह से पूरी सृष्टी का संतुलन बना हुआ है, आगे भी इसी प्रकार गौ - सेवा में संलग्न रह सकेंगे ? शेष मानव जाति को जिनको परमात्मा ने सोचने के लिए बुद्धि दे रखी है का भी कर्तव्य बनता है कि इस गो संवर्धन को उठाने मे, इस राम सेतु को बनाने मे ग्वाल -बालो एवं गिलहरी की तरह थोडा - थोडा यथा योग्य योगदान दे | जब हम थोडा-थोडा योगदान देंगे तो हम सभी गौभक्तों के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहेगा |
शास्त्र कहता है --- गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है | देवताओं और दानवो के द्वारा समुद्र मंथन के वक्त ५ गायें उत्पन्न हुई, इनका नाम था- नंदा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला और बहुला | ये सभी गायें भगवान की आज्ञा से देवताओं और दानवों ने महर्षि जमदग्नि, भारद्वाज, वशिष्ट, असित और गौतम मुनि को समर्पित कर दीं | आज जितने भी देशी गौवंश भारत एवं इतर देशो मे है, वह सब इन्ही ५ गौओं की संताने है और हमारे पूर्वजो एवं ऋषियों का यह महाधन है | क्या हम सिर्फ गोत्र बताने के लिए ही अपने ऋषियों की संताने हैं? उनकी सम्पति गौ धन को बचाना हमारा कर्तव्य नहीं | आज भारत वर्ष मे ही करोड़ों लोग सुबह - शाम देवालयों मे माथा टेक कर भगवान से मनोकामनाएँ मांगते है, पर इन मे से लाखों लोगो को यह तक भी मालूम नहीं है की जिस देवता से वे याचना कर रहे है उन्हें कुछ भी दे देने की शक्ति तभी आएगी जब हवन द्वारा अग्नि के मुख से देवताओं तक शुद्ध गौ घृत पहुंचेगा | जब हम हवन में गाय के घी से मिश्रित चरू देवताओं को अर्पण करते है | उस उत्तम हविष्य से देवता बलिष्ट एवं पुष्ट होते है | जब देवता शक्तिशाली होगा तभी अपनी शक्ती के बल पर आपकी-हमारी मनोकामनाएं पूरी करने मे समर्थ होंगे | पर जब गौवंश ही नहीं रहेगा तो शुद्ध गौ घृत कहा से आएगा? और शुद्ध गौ घृत नहीं होगा तो हवन कहा से होगा? और हवन नहीं होंगे तो देवता पुष्ट कैसे होंगे? और देवता पुष्ट नहीं होंगे तो शक्तिहीन देवता मनोकामनाएं पूर्ण कैसे करेँगे ? आज हम लोग पेड़ लगा देते है पानी खाद नहीं डालेंगे तो फल कहा से लगेंगे? यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है | आज जितने भी कथाएं होती है, यज्ञ, अनुष्टान होते हैं, जप-तप होते है उनमें नाम-जप का कुछ प्रभाव पड़ता हो पर अंत मे जो यज्ञ होता है वह सफल कितने होते है यह राम को ही मालूम | क्योंकि इन यज्ञों मे शुद्ध गौ घृत का उपयोग नहीं के बराबर होता है | आज भारत वर्ष मे पूर्व की अपेक्षा यज्ञ, धर्म, कर्म अधिक हो रहे है पर फल नहीं मिलता, यज्ञ सफल नहीं होते, क्या कारण है? इसके मूल मे यही है की जिस धरती पर गौ, ब्राहमण, साधू-संत, स्त्री दुखी होते है वहां पर पुण्य कर्म फल नहीं देते | आज हालत ये हो गयी है की गोवंश विलुप्त होने के कगार पर है लोग लाखो गौमाता का लहू ;पानी की तरह बहा दिया जाता है . आज गौमाता का दूध फायदा का सौदा नहीं गौमंश से मुनाफा कमाया जा रहा है आज हम उतने ही दोषी है जो अपनी माता को कसाई के हवाले कर रहे है चंद सिक्को की खातिर हमारी २१ सूत्रीय मांगे निम्न है

१ गौमाता को राष्ट्र माता घोषित किया जाये तत्काल।
२ गौमाता को गोमाश के लिए बेचने पर पूर्ण प्रतिबन्ध।
३ कसाई खानों में गोवध तुरंत बंद हो और उन गौवध शालाओं में कामधेनु नेशनल पार्क खुले ।
४ सरकार की मदद से हर गावँ  व शहर में गौशालाएं खोली जाये। 
५ सरकार अपनी योजनाओ में गौशालाएं के लिए सहायता राशी निर्धारित करे।
६ हर गावँ व शहर में सरकार गायो के लिए एक गौरक्षा सेवक नियुक्त करे जो कुशल पशु चिकित्सक भी हो। 
७ गौमाता के पञ्च गव्य से बने उत्पादों को बेचने में सरकार सहायता करे।
८ सरकार की और से गौमाता स्टोर खोले जाये जहाँ गो मूत्र , गौमाता घी , दूध , दही , मक्खन उपलभ्द हो।
९ टाइगर रेजेर्व की तरह देसी गायो को भी संरक्षण दिया जाय तथा उनके भी अभ्यारण्य बनाये जाये।
१० इधर-उधर भटकती गायो के लिए सरकार एम्बुलेंस और वहां की व्यवस्था करे।
११ लोगो में गौमाता पालन को बढ़ावा देने के लिए गौमाता स्कूल खोले। 
१२ जन्माष्ठमी और गोवर्धन पूजा को रास्ट्रीय गौमाता त्यौहार घोषित करे। 
१३ गौसेवा में लगे किसानो को सम्मानित करने में सरकार धन न दे वरन उन्हें एक गाय भेट करे।
१४ गौमाता सम्मान आरम्भ किया जाये गौ-रत्न पुरुष्कार सरकार की ओर से उत्तम गौसेवा में लगे गौप्रेमियों को दिए जाय । 
१५ हर गावँ में गौमाता सेवको की भारती की जाये जिनका काम गायो की सेवा और देखभाल का हो। 
१६ सरकार की और से गौशालाओं में चारे की व्यवस्था की जाये।गौचर भूमि खाली कराये जाय। 
१७ गौ हत्या करने वालो पर तुरंत रिपोर्ट दर्ज हो --और मुक़दमा चले कम से कम 7 साल की सजा हो  ।  
१८ दूध निकाल कर गौमाता को खुला छोड़ने पर भी भारी दंड का प्रावधान हो। 
१९ सरकार की और से साल में कम से कम एक बार गौ-कुम्भ मेले का आयोजित हो।
२० सरकार एक नया विभाग गौमाता विभाग ( गौ संवर्धन विभाग ) बनाये।
२१ सरकार एक नया मंत्री गौमाता मंत्री भी नियुक्त करे।
निवेदक ;-- ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' www.govansh.in , www.sarvadliyagaurkshamanch.in
सनातनी विचार !
जिस प्रकार किसी भी माँ के कोख से पैदा हुआ बालक चाहे कुरूप हो या लूला-लगड़ा, मंदबुध्दि माँ को सारे विश्व में अपने पुत्र से ज्यादा ममता किसी और से नहीं होती।  क्योकि माँ के अंदर भगवान ऐसी ममता कूट- कूट कर भर दी है । 
अगर ऐसा भगवान न करते तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता कुरूप और अपाहिज, मंदबुध्दि बच्चो का क्या होता ? वैसे ही ममता भगवान ने हमारी प्यारी गौ- माता में भर रखी है।
गौमाता अपने हत्यारे को भी दूध पिलाती है और पुजारी को भी।  ऐसी ममतामयी माताओं का भी जो आदर-सम्मान न करे ( उनकी हत्या करे ) उस धुंधकारी का तो सर्वनाश हो ही जाना चाहियें। 
भले ही बाद में कोई गोकर्ण को गौ-माता इन दुष्टो का उद्धार करने भेजने ही वाली क्यों न हो ?
                          ''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार 

Saturday, July 19, 2014

सनातनी विचार ! 
कहाँ चल दिए गुलाबी क्रांति को श्वेत क्रांति में बदलने वाले मशीहा ?आज भी एक लाख से अधिक गौवंश नित्य कट रहा है .
 कटती गैय्या करे पुकार,कहाँ गयी मोदी सरकार ?

सनातनी विचार !
अपील अपील अपील -----ह्रदय की अनंत गहराई से करजोड़ करुण पुकार भारत के गौभक्त समाज से गौ-चरणो के दास का !

देश भर के गौ-भक्त मित्रो अगर श्री नरेन्द्र मोदी सरकार १५ अगस्त तक गौमाता के हित में कोई निर्णय नहीं लेती तो फिर मज़बूरन हमें जन्तर - मन्तर पर शांति-पूर्ण गव्य पदार्थो का सेवन करते हुए आंदोलन करना ही पड़ेगा । क्योकि आज हमारी मेहनत से बनी सरकार है जिससे प्रेम पूर्वक शांति पूर्ण आंदोलन से अपनी गौ-माँ का हक़ मांगना हमारा अधिकार है। क्योकि प्रति दिन आज भी 1 लाख से अधिक गौवंश कट रहा है, अगर हम इसी तरह मूक बने रहे तो अगले एक साल में 3 करोड़ 65 लाख गौवंश कट जायेगा। इस आंदोलन को इस बार हम या किसी व्यक्ति लीड नहीं करेगा यह आंदोलन इस बार ''भगवती गौमाता'' ही लीड करेगी। इस आंदोलन में जन्तर- मंतर के मंच पर किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर नहीं लगेगी हां गौ-माता के लिए शहीद हुए एवं आजीवन गौमाता के लिए लडें गौभक्तो- संतो की तस्वीर सभी संगठन लगा सकते है।

गौभक्त मित्रो यह आंदोलन इस बार हम सब गौ प्रेमियों का है जो भी गौभक्त संगठन इस मुहीम में शामिल होना चाहे जल्दी से जल्दी अपना नाम दर्ज करा दें ताकि मंच पर उन संगठनो का नाम बैनर पर आ जाये पर तस्वीर किसी की भी नहीं आएगी। मित्रो इस आंदोलन में सबसे पीछ ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच'' और ''प्रखर साहित्यकार मंच'' का नाम लिखा जायेगा आगे हम सभी अपने सहयोगी संगठनो का नाम करेंगे हमें इस बार नाम के लिए नहीं काम के लिए यानि गौमाता के हक़ के लिए लड़ना होगा।

अपना संगठन का नाम या व्यक्तिगत नाम इस मेल आई डी पर भेजे ---nayal1970@gmail.com या इस पोस्ट के निचे लिख दें हम कॉपी कर लेंगे। निवेदक ;--''नयाल सनातनी''
सनातनी विचार ! 
देश जिनमें नजरे गढ़ायें रहता है !
 विद्द्वानो साथियों जब आशिकी की कविताओं से मन ताउम्र न भरे ! राजनीती और धर्म नीति पर व्यंग बाण से फुर्सत ही न रहे ! हास्य-व्यंग कवि सम्मेलनों में रातें बीत रही हो दिन सोने में चला जाय ! गौमाता, गौवंश जो देश की मूल अर्थ व्यवस्था की रीड की हड्डी हो सकती है विचार के लिए 5 मिनट का समय न हो ! गौवंश के बारे में एक लाइन लिखने को हाथ ना चले ! तो बताओं देश आगे कैसे बढे ???? देश आगे कैसे बढे ????????????? ''नयाल सनातनी'' सर्वदलीय गौरक्षा मंच

Tuesday, July 8, 2014

सनातनी विचार !
अब हम चंद्रमा, मंगल आदि ग्रहों में जा रहे है वहां पानी भी मिल चूका है।  पर जिस गौमाता के एक आखं में सूर्य,एक आँख में चंदमा, शरीर में मंगल आदि सभी गृह निवास कर गौ-सेवा से धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष देने की ताकत इस पृथ्वी में ही देने की शक्ति रखती है वह खुले आम कट रही है, सूली पर चड़ा कर खून निचोड़ा जा रहा है । .धिक्कार पक्षेपत्रो को ले जाने वाले उपग्रहों को और उनको बनाने वालो को जिन्होंने निर्जीव को बहुत महत्व दिया जीव की उपेक्षा की। ''नयाल सनातनी''

Tuesday, July 1, 2014

सनातनी विचार !
जिस प्रकार किसी भी माँ के कोख से पैदा हुआ बालक चाहे कुरूप हो या लूला-लगड़ा, मंदबुध्दि माँ को सारे विश्व में अपने पुत्र से ज्यादा ममता किसी और से नहीं होती।  क्योकि माँ के अंदर भगवान ऐसी ममता कूट- कूट कर भर दी है । 
अगर ऐसा भगवान न करते तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता कुरूप और अपाहिज, मंदबुध्दि बच्चो का क्या होता ? वैसे ही ममता भगवान ने हमारी प्यारी गौ- माता में भर रखी है।
गौमाता अपने हत्यारे को भी दूध पिलाती है और पुजारी को भी।  ऐसी ममतामयी माताओं का भी जो आदर-सम्मान न करे ( उनकी हत्या करे ) उस धुंधकारी का तो सर्वनाश हो ही जाना चाहियें। 
भले ही बाद में कोई गोकर्ण को गौ-माता इन दुष्टो का उद्धार करने भेजने ही वाली क्यों न हो ?
                          ''नयाल सनातनी''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार