Monday, September 29, 2014

सनातनी विचार !
प्रधान मंत्री महोदय को एक विनम्र निवेदन -----
P M महोदय आज देश की साधारण गौभक्त जनता भी यह जान चुकी है, कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है और मवेशी (गोवंश) कृषि की रीढ़ है, पर केंद्र सरकार गोवंश हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाना चाहती !!!!!!! आखिर क्यों ?
जबकि देशी जैबिक - खाद ,गोबर खाद और बैलों द्वारा खेती, परिवहन से भारत एक समृद्ध राष्ट्र था और आगे भी हो सकता है। आज पेट्रोल का आयात/ उर्वरक का आयात- सब्सिडी का झमेला' क्या यही समृद्धि है???
कीटनाशकों और उर्वरक से फसलें ज़हरीली और भूमि बंजर हो रही है किसान ट्रैक्टर , फर्टिलाइज़र, जेनेटिक बीज के लिए कर्ज़ लेता है और आत्महत्या का आखरी रास्ता चुन लेता है ।
क्या खेती की दशा और दिशा ऐसी ही रहेगी ? क्या सरकार प्राचीन पद्धतियों को नष्ट नही कर रही है ?
विश्व में प्राचीनतम संस्कृति और ज्ञान का केन्द्र रहा है भारत इस अर्थ में कह सकते हैं कि भारत का दुनिया में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसे भारत की आत्मा है. ग्राम, ग्राम का आधार है किसान, किसान का आधार है कृषि, कृषि का आधार है गोवंश और हमारी सरकारे नीव में बम रखने जैसी स्थिति को जन्म देते हुए नित नये - नये कत्लखानो को खोलने में सब्सीडी देकर गौ-हत्या को बढ़ावा नहीं दे रही है.
जरा गंभीरता से विचार कीजिये P M महोदय !
''सनातन धर्म'' जो सदा था सदा रहेगा जिसमे भगवान भी अवतार लेते है इसके अनुसार 33 करोड़ देवी - देवताओ के चलते-फिरते विगृह (गौवंश )को किस तरह नष्ट किया जा रहा है, इसे देख कर ''शैतान'' का भी मन पसीज जाये पर भारत सरकार का क्यों नहीं यह प्रश्न ह्रदय में ठोकर मरता है दिन में कई बार मेरा ???????
''नयाल सनातनी'' ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Sunday, September 28, 2014

सनातनी विचार ! सत्य की राह चलना है तो !

कुछ काम कर रहे हो तो उसे छोड़ कर माता-पिता जी की आज्ञा पालन पहले करना चाहिए।
सौ काम छोड़ कर स्नान करना चाहिए, हजार काम छोड़ कर भोजन कर लेना चाहिए।

लाखों कार्य छोड़ कर अगर संकल्प ले लिया है, दान देने का तो दान दे देना चाहिए।
करोड़ों कार्य छोड़ कर सत पुरुषों, विद्वानों द्वारा दिया जा रहा ज्ञान ले लेना चाहिए।

अरबो काम छोड़ कर परमात्मा का नाम लेना चाहिए,सत्संग में सत्पुरुषो के साथ बैठना चाहिए।
इन सब कार्यों से भी अधिक जरूरी है, अगर गौ-माता संकट में है तो उसकी जान बचाना चाहियें।

तो समझों मानव जन्म सफल हुआ। ''नयाल सनातनी'' , सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, September 27, 2014

जियों-जियों-जियों-कविवरों लाखो साल जियों !
नोट ! मित्रो कविता की विधा से मैं अनजान हूँ ,मन के कुछ भाव सकुचाते हुए आज उतार दिए पन्नो पर गौ-माता कृपा करना दास पर और माँ के लाडले भी यथा शक्ति मुझे झेल लेना ; ---

दूर कही जब देश के किसी गावँ में जब गौमाता की महिमा पर कोई कवि गा रहा होता हो।
पता नहीं मन मयूर मेरा हजारो किलोमीटर दूर यहाँ हैदराबाद में क्यों नाच रहा होता है ?

कहता है सदियों से उपेक्षित गौ-माता की महिमा आज हजारो की भीड़ में गाई जा रही है।
लोग जो गौ-महिमा से अनजान थे आज उनको उस सर्वदेवमयी गौ की महिमा सुनाई जा रही है।

देखो अर्ध-रात्रि हो गई वह उस कोने में उंगता एक सक्स बार-बार गौ-महिमा को सिर्फ इस लिए मन लगा रहा है।
आज पहली बार उसे गलियों में कचड़ा खाने वाली गाय के ये सद-गुण कवि मुख से सुन अचरज ही लग रहा है।

यह देखों यह रिक्शा वाला ग्राहक छोड़ आज गौ-महिमा सुन रहा है,क्योकि यहाँ सफ़ेद पोस नेता ही नहीं रिक्शा वाला भी बैतरणी पार लग रहा है।
कल जिनको लगता था गौ-कवि सम्मलेन कर ये क्या तमाशा कर रहा है नयाल, आज उनपर भी गौ-कृपा हो गई वह गौ-कवियों को ढूड रहा है।

कहते थे युग पुरुष आचार्य श्रीराम शर्मा हम बदलेंगे युग बदलेगा, आज सच हो रही उस महापुरुष की बाते ''गाय'' के लिए तो यह युग बदल रहा है।
एक समय स्वामी करपात्रीजी ने जो सीख देश को दी थी, तुम समझे नहीं शिष्य रह कर भी,हम चल चुके उस राह पर अकेले अब युग बदल रहा है।

देश अगर बचाना है बचाओं गौ-माँ एक कदम तुम भी आगे बढाओं मेरी-माँ, आज इस रण समर में देश की मात्रु-शक्ति भी आगे आओं मेरी माँ।
माँ का दर्द एक माँ समझती है एक लाल अगर मारा गया कितना भारी दुख होता, बताओं गौमाता के लाखों लाल आज काटे जा रहे बचाओं मेरी माँ।

देखो वह सक्स कितना सुन्दर गुणगान गौ-माता का कर रहा है,अरे यह तो देश का सबसे बड़ा ''कवि अब्दुल गफ्फार'' गौ महिमा गाते हुए कितना सुन्दर लग रहा है।
जो तालिया सफ़ेद पोशों की गुलामी की कविता में बजने मजबूर थी। आज तो यह नवजवान ''प्रभात परवाना'' द्वारा गाया गौ-माता पर छंद ले जा रहा है।

आज मुझे उस दिन पर गर्व सा हो रहा है, जिस दिन गौ कविता की बात मन में आई ही थी, तभी एक नवजवान गुरु जी कहते हुए ''संदीप वशिष्ठ'' टकराया।
लोग चाहें जो कहें लोगो का काम है कहना,''नयाल सनातनी'' तुझे तेरी गौ-माता की महिमा को जन-जन तक है पहुचाना तो बना इसे ''अर्जुन'' गौ-गीता का ज्ञान इसे ही प्रथम हमने सुनाया ।

तब यह सनातनी विचार आया !

तो कुछ नया सोच, कुछ येसा कर की हर कवि लिखे तो एक गीत गाय पर लिखे,और गौवंश बचे तो देश बचे यह संसार बचे, इस देश का किसान बचे।
कल गौ-माँ को उसके बच्चो के निरपराध हत्या का इंसाफ जरूर मिलेगा, अब्ध्या गाय होगी तो ''अमर ग्रन्थ'' के पन्नो में मोदी का नहीं तो कोई और सक्स का नाम दर्ज जरूर होगा।

इस रण भूमि में जो-जो सक्स मेरा साथ दे रहे है गौ महिमा जन-जन तक पहुचाने में निश्चित ही वे साधू-संत है मेरी नजर में .
इस कल्युग में भी गौ-माता को इंसाफ दिलाने किसी ना किसी रूप में गोपाल जरूर आयेगा,मेरा क्या मैं तब तक गोवर्धन पर्वत उठाने के भ्रम में जियेगा !!!!

''नयाल सनातनी'' संस्थपक अध्यक्ष सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Friday, September 26, 2014

सनातनी विचार !
नन्दीश्वर भगवान यानि धर्म ! भगवान शंकर के मंदिर में उनके सामने उनकी सवारी नंदी को इसलिए स्थापित करते हैं, क्योंकि शिवजी का वाहन नंदी पुरुषार्थ यानी मेहनत का प्रतीक है। अब सवाल यह बनता है कि नंदी शिवलिंग की ओर ही मुख करके क्यों बैठा होता है? जानते हैं दरअसल नंदी का संदेश है कि जिस तरह वह भगवान शिव का वाहन है। ठीक उसी तरह हमारा शरीर आत्मा का वाहन है।
 

जिस प्रकार नंदी की नज़र भगवान शंकर की तरफ होती हैं, उसी तरह हमारी नजर भी आत्मा की ओर होनी चाहिए | इस प्रकार हर मनुष्य को अपने दोषों को देखना चाहिए। हमेशा दूसरों के लिए अच्छी भावना रखना चाहिए । आपको बता दें कि भगवान शंकर की सवारी नंदी का इशारा यही होता है कि शरीर का ध्यान आत्मा की ओर होने पर ही हर व्यक्ति चरित्र, आचरण और व्यवहार से पवित्र हो सकता है। 
 ''नयाल सनातनी'' ;-- अध्यक्ष --सर्वद्लीय गौरक्षा मंच
सनातनी विचार ! ---- 
आज-कल लोग दुनिया को वैसे नहीं देखते, जैसी वो वास्तव में है। अपितु वैसे देखते है जैसे वो खुद है । एक पापी को सब संसार पापी नजर आता है, एक भले व्यक्ति को सबमे कुछ न कुछ भलाई दिखती है। असल में ये जीवन का नियम है कि सज्जन को सज्जन और पापी को पापी ही सही तरह से समझ पाता है। पर एक गुरु मन्त्र आज बताते है आप गौ -सेवा, गौ - रक्षण, गौ - कार्य में लगे लोग संत की श्रेणी में आ जाते है। क्योकि गौमाता को भगवान राम ने संत कहा है । संत की सेवा तो कोई संत ह्रदय ही करेगा ना। आइये आप और हम सब संत यानि गौ - प्रेमी बनकर जिनको लोग पापी कहते है उनको भी गौ - सेवा की प्रेरणा देकर, गौ - सेवा में लगा दें और संत बना दें।-------- जय गौमाता की--------- ''नयाल सनातनी'' ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Wednesday, September 24, 2014

शारदीय नवरात्र 2014 की ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार'' की और से सभी ''माता रानी'' के भक्तों को कोटि -कोटि शुभ कामनायें ----
वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
ॐ शैलपुत्रीं देवी रक्षा करो।
ॐ जगजननि देवी रक्षा करो |
ॐ नव दुर्गा नमः |
ॐ जगजननी नमः |
मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री।
इनका वाहन वृषभ ( बैल ) है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं।यही माँ अन्नपूर्णा के रूप में काशी में भगवान शिव को भी अन्ना की भिक्षा देती है। और यही जगत का भरण पोषण के लिए श्रष्टि संचालन के लिए ''बैल'' से हल चलकर खेती कर अन्न धन के भंडार भरने की सीख देती हुई मानव मात्र को सन्देश दे रही है। अब भी मानव नहीं समझा तो यह उसकी बुद्दी की हीनता है। …
''नयाल सनातनी'' अध्यक्ष ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Tuesday, September 23, 2014

सनातनी विचार !
हिंदी संस्कृत की छोटी बहन है .यह विश्व की प्रथम भाषा संस्कृत की बेटी भी मानी जाती रही है . और संस्कृत को देव भाषा येसे ही नहीं कहते . अगर संस्कृत देव भाषा है तो उनकी बेटी भी तो देवताओं को समझ आती ही है ..और संस्कृति की अधिष्ठात्री देवी माँ सारदे की आश्रय स्थल गौ माता ही है . गौ माता की महिमा अगर संस्कृत ,हिंदी या भारतीय भाषाओँ में जिनमे संस्कृत के शब्दों का मेल जोल है . में नहीं गा कर अगर कोई अंग्रेजी आदि विदेशी भाषाओँ में गाता या लिखता है तो समझो बिना जोते खेत में धान बो रहा है ......जय गौ माता की .सनातन सत्य --
''नयाल सनातनी''संस्थापक अध्यक्ष ;----सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
बेटी स्वयंग जगदम्बा है बहु- बेटी को जलाने वाले ,या बहन-बेटियों पर तेजाब फैकने वाले रौरव नरक में तब तक पकाए जाते है जब तक 14 इन्द्रो की सत्ता ख़त्म नहीं हो जाती .उसके बाद भी उस नारकीय मनुष्य को कदापि मनुष्य योनी नहीं देता परमात्मा .गौ और बेटी जीतनी सीधी और नारायण की प्रिय है .नारायण उनके साथ किये अपराध का उतना बड़ा दण्ड विधान भी निशचित किये हुए है .यह सनातन सत्य --
''नयाल सनातनी''संस्थापक अध्यक्ष ;----सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Monday, September 22, 2014

सनातनी विचार !
श्रीमन नारायण भगवान मानव मात्र के सत-कर्मो पर तभी तक आनन्द की अनुभूति करते है,जब तक मानव अहंकार में कोई सत-कर्म ना करे।
रावन को अहंकार आया मिटा दिए , कंस को आया मिटा दिए। अनेक भगवान के अनन्य भक्तों को अहंकार आया अहंकार को मिटा दिए।
यह कहना कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगा की भगवान का भोजन ही अहंकार है।
 ''नयाल सनातनी''- राष्ट्रिय अध्यक्ष;- सर्वदलीय गौरक्षा मंच 

Sunday, September 21, 2014

सनातनी विचार !
शंकर का रूप तो कोई भी रख सकता है पर शंकर जैसे सदा सबका कल्याण हो येसी भावना भी आ जाने चाहिए . विष पीकर अमृत बाटने की कोशिश तब भी हो !गाय तो सब पालते है दूध के लिए बैल पालना आना चाहियें ताकि धरती का सीना चिर हजारों टन अन्न उगाकर लाखों मानव जाति का पेट भर सकों .
''नयाल सनातनी'';-- संस्थापक अध्यक्ष ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, September 20, 2014

सनातनी विचार !
जो महर्षि मनु की संतान मानव दुसरो मनुष्य से जीतनी घृणा करता है। समझ लो की वह महर्षि मनु के इष्ट ईश्वर कृपा से उतनी ही दूर है।
मानव से घृणा नहीं जाति या सम्प्रदाय से घृणा नहीं ! बल्किन मनुष्य की दुष्कृत्यो से घृणा करो जो मानव जाति के अहित में है। ''नयाल सनातनी''

Friday, September 19, 2014

सनातनी विचार !
जो काम रुमाल से निपट सकता है, उसके लिए रिवाल्वर मत चलाइये। गुस्सा तो कमजोरी का वाहक है,गुस्सा तभ भी ना करें जब आपकी निस्वार्थ प्रेम और शांति की बातों को सामने वाला आपकी कमजोरी समझ बैठा हो। जबकि कमजोर सदा रिबाल्वर वाला होता है उसे अपने पर भरोषा कम गोली पर ज्यादा होता है। आपके लाख समझनें पर भी अगर आपको सामने वाला स्वार्थ बस नहीं समझ रहा है,तो आप अपना रास्ता बदल दो। ना की सामने वाले को समझाने में समय बर्बाद करें।  ''नयाल सनातनी''

Wednesday, September 17, 2014

कोटि कल्प काशी बसे मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे तुले न तुलसी दास।।???
अब जबाब देना लाजमी हो गया जब किसी का सकारत्मक जबाब नहीं आया दो दिन बाद भी ------गोस्वामी बाबा तुलसी दास जी ने इस लिए शरयु को इतना महत्व दिया क्योकि शरयु की उत्तपति सिर्फ भगवान के अयोध्या में अवतार लेने के कारण महर्षि वशिष्ठ के घोर तपश्या के फल स्वरुप हुआ .साथ ही जब वशिष्ठ महामुनि शरयु नदी को भगवान शिव की घोर तपश्या के फलस्वरूप हिमालय पर्वत के सहायता से धरती पर ले आये तो बागेश्वर नामक उत्तर की काशी के पास एक शीला पर महर्षि मारकंडे की घोर तपश्या के कारण शरयु का मार्ग अवरूद्द हो गया .शरयु ने महर्षि वशिष्ठ को कहाँ आगे महर्षि मारकंडे तपश्या रत है अगर मेरा बेग उनको छू भी गया उनकी तपश्या भंग हुई तो महर्षि मारकंडे मेरा सारा जल का आचमन कर सुखा देंगे पहले उनको राह से हटाने की कोई तरकीब सोचो तब इस शरयु कुंड से मैं आगे प्रस्थान करुँगी . यह सुन वशिष्ठ महामुनि धर्म संकट में पड गए फिर से भगवान शिव की घोर तपश्या की भगवान शिव प्रकट हुए और सारी समस्या सुन महर्षि वशिष्ठ को कहा जाओं आपकी सबही मनोकामना पूर्ण होगी महर्षि मारकंडे को हम रास्ते से हटा देंगे . अब भगवान शिव ने भगवती पारवती से कहाँ प्रिये तुम गाय का रूप धरो और मैं बाघ का मैं आपके पीछे भागूँगा और तुम जोर जोर से राम्हाना पहले के संत ऋषि गौ की करुण पुकार सुन अपनी बड़ी से बड़ी तपस्या छोड़ गौ रक्षा को तत्पर रहते थे आज की तरह नहीं है की लाखो गौवंश नित्य कट रहा संतो को गहरी नीद का स्वाद लगा है .खैर जैसे ही गौमाता रंभाने लगी महर्षि मारकंडे ने गाय की करुण पुकार सुन तपस्या छोड़ अपने कमंडल का जल से कुछ छीटे गाय और बाघ के ऊपर डाले तो साक्षात् भगवान शिव और जगत जननी पारवती प्रकट हो गए .संत ने कहाँ भगवान यह क्या कौतुहल है आप और मेरी माँ इस रूप में क्यों ?भगवान शिव ने कहाँ पहले तुम बताओं तुम क्यों इतनी घोर तपस्या में हो की सदियों से वशिष्ठ के द्वारा अपने तप बल से लायी शरयु का रास्ता रोके खड़े हो . महर्षि मारकंडे बोले भगवन मेरा तपश्या का फल तो आपने दे दिया मेरा उद्देश्य जगत माता-पिता के एक साथ दर्शन करना था . भगवान शिव ने कहाँ अब आपका उद्देश्य पूर्ण हुआ अब शरयु को रास्ता दे दो तब महर्षि मारकंडे बोले भगवन एक और वरदान दे दीजिये की आप अब हमेशा के लिए इस स्थान पर बाघ और माता पारवती गाय के रूप में विराजमान हो जाईये .और कल्युग प्रयन्त जो भी गौ भक्त एक बार आपका इस रूप में दर्शन नहीं करेगा उसकी गौभक्ति पूर्ण नहीं मानी जाएगी .भगवान शिव ने कहाँ तथास्तु . जय शरयु को अयोध्या तक पहुचाने के लिए भगवानशिव को बाघ बनना पड़ा , भगवती पारवती को गाय बनना पड़ा, मारकंडे मुनि को घोर तपस्या छोड़नी पड़ी , वशिष्ठ महामुनि को घोर तपस्या के बल पर भगवान शिव की प्रसन्ता से हिमालय के माध्यम से धरती पर लाने का सौभाग्य प्राप्त हुवा भगवान श्री राम का कुल गुरु बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ . भगवान शिव के अपने अराध्य विष्णु के अवतार श्री राम के रूप में दर्शन प्राप्त हुआ .जिस शरयु के कारण पूरा अयोध्या क्षेत्र हरित क्रांति से लहलहा उठा जी कारण करोडो भगवान की प्रिय गायो को भरपेट हरा चारा मिला,जिस चारे के कारण गौ वंश इतना बड़ा की भगवान श्री राजा राम प्रति दिन लाखो गौ का दान किये . जिसके तट पर भगवान राम के एक से एक बलवान, ज्ञान वान पूर्वज पैदा हुए . जिस शरयु के तट पर परम तपस्वी मनु और सतरूपा , कश्यप और आदित्य को दसरथ और कौसल्या के रूप में जन्म लेना पड़ा . वह शरयु जिसके तट पर अयोध्या बसा और करोडो जीवो का उद्धार हुआ आज भी परम तपश्वी संत जन जहाँ तप रत है. जहाँ पर हनुमान जी आज भी मेरे गुरुदेव नृत्य गोपाल दास जी के रूप में हजारो-लाखो संत-महंत और तीर्थ यात्रियों की सेवा में लगे हुए है . भला उस शरयु के तट पर एक निमिष में कल्याण क्यों ना हो जीव का .इसीलिए गोस्वामी जिनका नाम गोस्वामी गाय की सेवा करने के कारण ही पड़ा यह क्यों ना कहे भला की .-----------------------------------कोटि कल्प काशी बसे मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे तुले न तुलसी दास।। ''नयाल सनातनी'' गौ-चरणों का दास

Tuesday, September 16, 2014

सनातनी विचार !
पूजनीय है हरियाली युक्त धरती, गौमाता और नारी का स्थान  .
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।। (मनु स्मृति 3-56)
जिस कुल में स्त्रीयाँ पूजित होती हैं, उस कुल से देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ स्त्रीयों का अपमान होता है, वहाँ सभी ज्ञानदि कर्म निष्फल होते हैं।
मनुष्य जीवन तब तक अपूर्ण है जब तक अर्धांगिनी साथ ना हो आपके सुभ कर्मो के साथ ना हो !
 इस ब्रहमाण्ड में ये तीनो को सबसे ज्यादा धैर्यवान और माँ का दर्जा दिया गया है .पहली है धरती माता, दूसरी है गौ माता, तीसरी है नारी .इसलिए इनको पूजनीय कहाँ गया है।  जो व्यक्ति लाखो वर्ष तक तप करे और इन तीनो का अपमान करे उसको उसकी तपश्या का फल नहीं मिलता यह सनातन सत्य है।
 ब्रह्मा, विष्णु, महेश को भी जब नारी बालक बना कर अपने ''स्तन पान'' करा सकती है तो तुच्छ मानव की हस्ती क्या ?
याद रहे आप कर्म-काण्ड,तंत्र-मन्त्र  में कितने ही माहिर क्यों ना हो और कवि-विद्वान कितने ही बड़े हो गए हो पर धरती माता, गौ-माता और मानव जाती को जन्म देने वाली नारी का अपमान करते है तो आप का जीवन सुखदायी नहीं।
 ''नयाल सनातनी''

Monday, September 15, 2014

!! गौ कथा गुरु गोरखनाथ की जन्म कथा !!

एक फक्कड़ साधू अलख निरंजन करता - करता गावँ - गावँ फिर रहा था। वो भिक्षा मागने के लिए एक माता के पास आया। माता ने तुरंत भिक्षा दी। पर वो साधू ने देखा की यह माता उदास है । साधू ने माता से पूछा की माँ उदास क्यों हो ? माता ने बताया की मेरा कोई पुत्र नहीं है , इसीलिए उदास हूँ । साधू सिद्ध महात्मा थे उसने माता को झोली में से एक मुठ्ठी राख दी और कहा इसे खा ले पुत्र हो जायेगा। साधू चला गया। माता ने बहुत सोचा और फिर वो राख को नहीं खाया। १२ साल बाद वो साधू फिर से उसी माता के पास आया और कहा की माता आपका बेटा नहीं दिखाई दे रहा माता ने कहा की मैंने वो राख नहीं खाई साधू ने पूछा की माता तूने वो राख कहा फेंकी वो माता साधू को गोबर के गढढे के पास ले गयी मैंने राख यहाँ फेंकी थी। उस साधू ने उस गोबर के गढढे मै से १२ साल का बालक पैदा कर दिया। वो ही थे गुरु गोरखनाथ। जिन्होंने गावं - गावं , शहर - शहर फिर कर एक ही मन्त्र दिया गोरख यानि गाय रख तभी तेरा कल्याण होगा। पूर्व में इस देस के गुरूओं का एक ही मंत्र था गोरख- गोरख मतलब गौ माता को घर में रख। आज के गुरुओं का मन्त्र गाय मेरे आश्रम में रख मेरी गौशाला में रख है ताकि वे एक गाय के लिए 50 लोगो से चंदा ले सके गाय एक भी ना पाले ..
सबहि नचावत राम गुसाई।गुरु गोरखनाथ महाराज की जय।

1 - जिस घर मैं गौ के घी का दीपक जलता हैं वहां पर १० मीटर तक सात्विक तरंगे निकलती हैं, ये तो वैज्ञानिको की रिपोर्ट हैं। अगर आपके पडोसी का घर १० मीटर के अन्दर आता होंगा तो उसका भी कल्याण हो जायेगा।

2 - गोली मतलब जिसने गौ माता को लिया,घर मैं रखा उसको ज़िन्दगी मैं कभी गोली नहीं खानी पड़ेगी।

3 - तुम्हारे यहाँ एक शब्द हैं "गो-रख-धंधा " मतलब गौ को घर मैं रख तो तेरा धंधा अच्छा चलेगा। बरना गोरखधंधा --

4 - घर मैं आप गौ माता का घी तो ला ही सकते हो। उस घी को अपने नाक मैं जरुर डालना क्योंकि १०१ बिमारिओ सिर्फ नाक मैं गाय का घी डालने से ख़तम हो जाती हैं जैसे की चश्मे का नंबर , पित्त , उलटी , फेफड़ो की कमजोरी , सर दर्द आदि बहुत सी बीमारिया चुटकी मैं ख़तम हो जाएगी। बोलो गौ माता की जय।
नयाल सनातनी संस्थापक ''सर्वदलीय गौरक्षा मंच''

Sunday, September 14, 2014


सनातनी विचार !
विध्या की अधिष्ठात्री देवी जो माँ शारदे है वह अपनी शरणागत गौमाता के कल्याण में लगे लोगो को अपनी विध्या की अनेक कलाओं से तभी तक नवाजती है . जब तक जीव गौवंश के कल्याण के काम करता है .माँ शारदे का मन सिर्फ बातो से नहीं कर्म करने वालो के व्योहार से भरता है और प्रसन्न रहता है . अतः प्रतेक उच्च शिक्षा - दीक्षा के आकांक्षी मानव को गौसेवा, गौवंश के सुरक्षार्थ प्रचार- प्रसार जरूर करना चाहिए .और अधिक से अधिक लोगो को गौ-दीक्षा देनी चाहिए . ना जाने आपके द्वारा गौ-दीक्षित मानव कितना बड़ा गौ-भक्त निकल जाय . उसके द्वारा किया गया शुभ कर्म का कुछ अंस अपने आप आपके खाते में भी आने ही वाला है .
जिस तरह किसी जीव को गलत राह में फ़साने से आपको पाप कर्म का दोषी होने से दण्ड भुगता पड़ता है .उसी प्रकार जीव को सत कर्म की राह पर भेजने पर पुण्य लाभ का भागी भी अनायास मानव हो जाता है यह सनातन सत्य है .अतः गौ भक्ति के राह में आने वालो को सहयोगी बने रोड़े अटकने से आपके पुण्य नष्ट होने ही वाले है ..........
''नयाल सनातनी'' - संस्थापक अध्यक्ष ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
आज हिंदी दिवस मनाया जा रहा है सबही हिंदी प्रेमियों को बधाई . पर शुद्द हिंदी और हिन्दुस्तान की बात वही कर सकता है सही माने में जिसने भारत का धर्म बैल द्वारा जोती गई खेती का अनाज खाया हो और धरती माता की ही प्रतिमूर्ति भारती गाय का दूध-दही-घी खाया हो .क्योकि हिंदी की जननी संस्कृत है . संस्कृत बिना गौ घृत खाये बगैर आती नहीं . कुछ लोगो को तो 14 सितम्बर को हिंदी की याद आती है साल भर अंग्रेजी में फेस बुक चलाते है ........गौ घृत खाओ हिंदी और हिंदुस्तान बचाओं .. जय हिंदी जय हिन्दुस्तान .''नयाल सनातनी'';-- गौ चरणों का दास

Wednesday, September 10, 2014

सनातनी विचार !
जब मनुष्य का जन्म होता है वह किसी भी धर्म, जाति,वर्ण या संप्रदाय में नहीं बल्कि परमात्मा का पुत्र-पुत्री के रूप में जन्म लेता है। फिर स्वार्थी मनुष्य उसे धर्म,जाति,वर्ण और संप्रदाय में बाटता है।  क्योकि उसे राजनीती करनी थी, राजनीती का मतलब जिस ओर ज्यादा संख्या उसका राजा। अब बताओं जो परमात्मा की सबसे बुद्दिमान कृति मानव- मानव में ही भेद करें वह श्री कृष्ण की सबसे ममतामयी और प्यारी कृति गाय का रक्षक सेवक कैसे हो सकता है ??? जिस गाय ने सिर्फ ममता लुटाना सिखाया है, अपने वंश के विनाशक कसाई को भी दूध देकर प्यार करने का सन्देश दिया है। उसके भक्त अपनी ही माँ, बहन, बेटी, ब्राहमण,असहाय, बुद्दी से हीन,दुर्बल और कमजोर से ईर्ष्या करे यह उसकी माँ शारदा द्वारा प्रदत बुद्दी और बल का कौशल नहीं हो सकता यह तो सिर्फ अपने कमजोर बुद्दी में लोगो को भ्रमित करने का एक मात्र सडयन्त्र ही हो सकता है ।  
                                        ''नयाल सनातनी;; ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Tuesday, September 9, 2014

सनातनी विचार !

सधर्मो यो दयायुक्त

स धर्मो यो दयायुक्तः सर्वप्राणिहितप्रदः ।
स एवोत्तारेण शक्तो भवाम्भोधेः सुदुस्तरात् ॥

जो दयायुक्त और सब प्राणियों का हित करने वाला हो वही धर्म है । वैसा धर्म ही सु-दुस्तर भवसागर से पार ले जाने में शक्तिमान है। सनातन शास्त्रों में धर्म यानि गौमाता का पुत्र, भगवान शंकर का बाहन नन्दी बैल को कहाँ गया है. जो आज के समय में नष्ट किया जा रहा है यानि अपने को नष्ट करने की प्रक्रिया मानव ने खुद सुरु कर दी है . यह बहुत सोचनीय एवं गंभीर विषय है . .

      ’’नयाल सनातनी’’ ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Saturday, September 6, 2014

सनातनी विचार ! सनातन शास्त्र अनुसार ---
जो मानव बोले कम और कर्म ज्यदा करे वह श्रेष्ठो की श्रेणी में आता है . और जो बके अधिक कर्म कम करें वह अधम की श्रेणी में आता है .इसलिए कहने से पहले एक बार सोचो क्या आप वह कर्म कर सकते हो जिसको पहले ही बक चुके हो ? नयाल सनातनी'';-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सनातनी विचार !
समय सब का आता है . पूर्व जन्म में किये अच्छे कर्मो से वर्तमान में सच्चे और अच्छे लोग परोपकार करते है. गौ सेवा कर अपना परलोक सुधारते है . शौतान गौ-हत्या कराते है अपने पितरों को नरक पहुचाते है .

        ''नयाल सनातनी'' ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

Friday, September 5, 2014

सनातनी विचार !
झूट की उम्र ज्यादा लम्बी नहीं होती .अपने आस-पास झूठ का गुब्बार बना लेने वाले को एक दिन जब गुब्बारा फूटता है . तो बहुत बड़ा शर्म-नाक हादसे का शिकार होना पड़ता है .
इस लिए सावधान झूठे की गति नहीं वह लाखों वर्ष तक प्रेत बन कर इसी माया के जाल में फंसा रह जाता है .और अपनों को भी शर्म सार कर देता है अपनी गलत आदतों के कारण . इस लिए सावधान वही बोलो जो कर सकते हो .

                                ''नयाल सनातनी''

Thursday, September 4, 2014

7 नवम्बर को प्रतेक व्यक्ति के हाथ में एक स्लोगन वाला बैनर -पोस्टर होना चाहिए .जो गाय और बैल को बचाने के सन्देश के आलावा चारागाह, गौशालाओं, आदि समस्या को उजागर करेगा .सभी गौ प्रेमी आयें इस दौड़ में . साथ ही अपने -अपने स्वरचित स्लोगन के साथ दौड़ में सामिल होकर अपने कर्तव्य का निर्वाह करे . ये स्लोगन प्रतेक गौ-भक्त की बुद्दिमता का परिचय भी देगा .जिसे विश्व की मिडिया के माध्यम से सरकार को एवं विश्व को एक पवित्र सन्देश जायेगा .''नयाल सनातनी''

Wednesday, September 3, 2014

जिस-जिस ने गौ माता का दूध पिया है। भारत वर्ष में ही नहीं विदेश में भी वे आ जाये ७ नवम्बर को गौ-शहीद दिवस पर ''गय्या दौड़'' में।इस दौड़ का नेत्रुक्त स्वयंग गौ माता करेगी और देश के सभी गौ भक्त संतो के सानिध्य में होगी। और सारा देश दौड़ेगा मुख्य दौड़ दिल्ली में होगी बाकि सारा देश के गौ-भक्त अपने - अपने शहर में भी दौड़ेंगे। इस दौड़ का प्रचारक ;-- नयाल सनातनी