सनातनी विचार !
सधर्मो यो दयायुक्त
स धर्मो यो दयायुक्तः सर्वप्राणिहितप्रदः ।
स एवोत्तारेण शक्तो भवाम्भोधेः सुदुस्तरात् ॥
जो दयायुक्त और सब प्राणियों का हित करने वाला हो वही धर्म है । वैसा धर्म ही सु-दुस्तर भवसागर से पार ले जाने में शक्तिमान है। सनातन शास्त्रों में धर्म यानि गौमाता का पुत्र, भगवान शंकर का बाहन नन्दी बैल को कहाँ गया है. जो आज के समय में नष्ट किया जा रहा है यानि अपने को नष्ट करने की प्रक्रिया मानव ने खुद सुरु कर दी है . यह बहुत सोचनीय एवं गंभीर विषय है . .
’’नयाल सनातनी’’ ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
सधर्मो यो दयायुक्त
स धर्मो यो दयायुक्तः सर्वप्राणिहितप्रदः ।
स एवोत्तारेण शक्तो भवाम्भोधेः सुदुस्तरात् ॥
जो दयायुक्त और सब प्राणियों का हित करने वाला हो वही धर्म है । वैसा धर्म ही सु-दुस्तर भवसागर से पार ले जाने में शक्तिमान है। सनातन शास्त्रों में धर्म यानि गौमाता का पुत्र, भगवान शंकर का बाहन नन्दी बैल को कहाँ गया है. जो आज के समय में नष्ट किया जा रहा है यानि अपने को नष्ट करने की प्रक्रिया मानव ने खुद सुरु कर दी है . यह बहुत सोचनीय एवं गंभीर विषय है . .
’’नयाल सनातनी’’ ;-सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
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