जियों-जियों-जियों-कविवरों लाखो साल जियों !
नोट ! मित्रो कविता की विधा से मैं अनजान हूँ ,मन के कुछ भाव सकुचाते हुए आज उतार दिए पन्नो पर गौ-माता कृपा करना दास पर और माँ के लाडले भी यथा शक्ति मुझे झेल लेना ; ---
दूर कही जब देश के किसी गावँ में जब गौमाता की महिमा पर कोई कवि गा रहा होता हो।
पता नहीं मन मयूर मेरा हजारो किलोमीटर दूर यहाँ हैदराबाद में क्यों नाच रहा होता है ?
कहता है सदियों से उपेक्षित गौ-माता की महिमा आज हजारो की भीड़ में गाई जा रही है।
लोग जो गौ-महिमा से अनजान थे आज उनको उस सर्वदेवमयी गौ की महिमा सुनाई जा रही है।
देखो अर्ध-रात्रि हो गई वह उस कोने में उंगता एक सक्स बार-बार गौ-महिमा को सिर्फ इस लिए मन लगा रहा है।
आज पहली बार उसे गलियों में कचड़ा खाने वाली गाय के ये सद-गुण कवि मुख से सुन अचरज ही लग रहा है।
यह देखों यह रिक्शा वाला ग्राहक छोड़ आज गौ-महिमा सुन रहा है,क्योकि यहाँ सफ़ेद पोस नेता ही नहीं रिक्शा वाला भी बैतरणी पार लग रहा है।
कल जिनको लगता था गौ-कवि सम्मलेन कर ये क्या तमाशा कर रहा है नयाल, आज उनपर भी गौ-कृपा हो गई वह गौ-कवियों को ढूड रहा है।
कहते थे युग पुरुष आचार्य श्रीराम शर्मा हम बदलेंगे युग बदलेगा, आज सच हो रही उस महापुरुष की बाते ''गाय'' के लिए तो यह युग बदल रहा है।
एक समय स्वामी करपात्रीजी ने जो सीख देश को दी थी, तुम समझे नहीं शिष्य रह कर भी,हम चल चुके उस राह पर अकेले अब युग बदल रहा है।
देश अगर बचाना है बचाओं गौ-माँ एक कदम तुम भी आगे बढाओं मेरी-माँ, आज इस रण समर में देश की मात्रु-शक्ति भी आगे आओं मेरी माँ।
माँ का दर्द एक माँ समझती है एक लाल अगर मारा गया कितना भारी दुख होता, बताओं गौमाता के लाखों लाल आज काटे जा रहे बचाओं मेरी माँ।
देखो वह सक्स कितना सुन्दर गुणगान गौ-माता का कर रहा है,अरे यह तो देश का सबसे बड़ा ''कवि अब्दुल गफ्फार'' गौ महिमा गाते हुए कितना सुन्दर लग रहा है।
जो तालिया सफ़ेद पोशों की गुलामी की कविता में बजने मजबूर थी। आज तो यह नवजवान ''प्रभात परवाना'' द्वारा गाया गौ-माता पर छंद ले जा रहा है।
आज मुझे उस दिन पर गर्व सा हो रहा है, जिस दिन गौ कविता की बात मन में आई ही थी, तभी एक नवजवान गुरु जी कहते हुए ''संदीप वशिष्ठ'' टकराया।
लोग चाहें जो कहें लोगो का काम है कहना,''नयाल सनातनी'' तुझे तेरी गौ-माता की महिमा को जन-जन तक है पहुचाना तो बना इसे ''अर्जुन'' गौ-गीता का ज्ञान इसे ही प्रथम हमने सुनाया ।
तब यह सनातनी विचार आया !
तो कुछ नया सोच, कुछ येसा कर की हर कवि लिखे तो एक गीत गाय पर लिखे,और गौवंश बचे तो देश बचे यह संसार बचे, इस देश का किसान बचे।
कल गौ-माँ को उसके बच्चो के निरपराध हत्या का इंसाफ जरूर मिलेगा, अब्ध्या गाय होगी तो ''अमर ग्रन्थ'' के पन्नो में मोदी का नहीं तो कोई और सक्स का नाम दर्ज जरूर होगा।
इस रण भूमि में जो-जो सक्स मेरा साथ दे रहे है गौ महिमा जन-जन तक पहुचाने में निश्चित ही वे साधू-संत है मेरी नजर में .
इस कल्युग में भी गौ-माता को इंसाफ दिलाने किसी ना किसी रूप में गोपाल जरूर आयेगा,मेरा क्या मैं तब तक गोवर्धन पर्वत उठाने के भ्रम में जियेगा !!!!
''नयाल सनातनी'' संस्थपक अध्यक्ष सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
नोट ! मित्रो कविता की विधा से मैं अनजान हूँ ,मन के कुछ भाव सकुचाते हुए आज उतार दिए पन्नो पर गौ-माता कृपा करना दास पर और माँ के लाडले भी यथा शक्ति मुझे झेल लेना ; ---
दूर कही जब देश के किसी गावँ में जब गौमाता की महिमा पर कोई कवि गा रहा होता हो।
पता नहीं मन मयूर मेरा हजारो किलोमीटर दूर यहाँ हैदराबाद में क्यों नाच रहा होता है ?
कहता है सदियों से उपेक्षित गौ-माता की महिमा आज हजारो की भीड़ में गाई जा रही है।
लोग जो गौ-महिमा से अनजान थे आज उनको उस सर्वदेवमयी गौ की महिमा सुनाई जा रही है।
देखो अर्ध-रात्रि हो गई वह उस कोने में उंगता एक सक्स बार-बार गौ-महिमा को सिर्फ इस लिए मन लगा रहा है।
आज पहली बार उसे गलियों में कचड़ा खाने वाली गाय के ये सद-गुण कवि मुख से सुन अचरज ही लग रहा है।
यह देखों यह रिक्शा वाला ग्राहक छोड़ आज गौ-महिमा सुन रहा है,क्योकि यहाँ सफ़ेद पोस नेता ही नहीं रिक्शा वाला भी बैतरणी पार लग रहा है।
कल जिनको लगता था गौ-कवि सम्मलेन कर ये क्या तमाशा कर रहा है नयाल, आज उनपर भी गौ-कृपा हो गई वह गौ-कवियों को ढूड रहा है।
कहते थे युग पुरुष आचार्य श्रीराम शर्मा हम बदलेंगे युग बदलेगा, आज सच हो रही उस महापुरुष की बाते ''गाय'' के लिए तो यह युग बदल रहा है।
एक समय स्वामी करपात्रीजी ने जो सीख देश को दी थी, तुम समझे नहीं शिष्य रह कर भी,हम चल चुके उस राह पर अकेले अब युग बदल रहा है।
देश अगर बचाना है बचाओं गौ-माँ एक कदम तुम भी आगे बढाओं मेरी-माँ, आज इस रण समर में देश की मात्रु-शक्ति भी आगे आओं मेरी माँ।
माँ का दर्द एक माँ समझती है एक लाल अगर मारा गया कितना भारी दुख होता, बताओं गौमाता के लाखों लाल आज काटे जा रहे बचाओं मेरी माँ।
देखो वह सक्स कितना सुन्दर गुणगान गौ-माता का कर रहा है,अरे यह तो देश का सबसे बड़ा ''कवि अब्दुल गफ्फार'' गौ महिमा गाते हुए कितना सुन्दर लग रहा है।
जो तालिया सफ़ेद पोशों की गुलामी की कविता में बजने मजबूर थी। आज तो यह नवजवान ''प्रभात परवाना'' द्वारा गाया गौ-माता पर छंद ले जा रहा है।
आज मुझे उस दिन पर गर्व सा हो रहा है, जिस दिन गौ कविता की बात मन में आई ही थी, तभी एक नवजवान गुरु जी कहते हुए ''संदीप वशिष्ठ'' टकराया।
लोग चाहें जो कहें लोगो का काम है कहना,''नयाल सनातनी'' तुझे तेरी गौ-माता की महिमा को जन-जन तक है पहुचाना तो बना इसे ''अर्जुन'' गौ-गीता का ज्ञान इसे ही प्रथम हमने सुनाया ।
तब यह सनातनी विचार आया !
तो कुछ नया सोच, कुछ येसा कर की हर कवि लिखे तो एक गीत गाय पर लिखे,और गौवंश बचे तो देश बचे यह संसार बचे, इस देश का किसान बचे।
कल गौ-माँ को उसके बच्चो के निरपराध हत्या का इंसाफ जरूर मिलेगा, अब्ध्या गाय होगी तो ''अमर ग्रन्थ'' के पन्नो में मोदी का नहीं तो कोई और सक्स का नाम दर्ज जरूर होगा।
इस रण भूमि में जो-जो सक्स मेरा साथ दे रहे है गौ महिमा जन-जन तक पहुचाने में निश्चित ही वे साधू-संत है मेरी नजर में .
इस कल्युग में भी गौ-माता को इंसाफ दिलाने किसी ना किसी रूप में गोपाल जरूर आयेगा,मेरा क्या मैं तब तक गोवर्धन पर्वत उठाने के भ्रम में जियेगा !!!!
''नयाल सनातनी'' संस्थपक अध्यक्ष सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
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