Sunday, September 14, 2014


सनातनी विचार !
विध्या की अधिष्ठात्री देवी जो माँ शारदे है वह अपनी शरणागत गौमाता के कल्याण में लगे लोगो को अपनी विध्या की अनेक कलाओं से तभी तक नवाजती है . जब तक जीव गौवंश के कल्याण के काम करता है .माँ शारदे का मन सिर्फ बातो से नहीं कर्म करने वालो के व्योहार से भरता है और प्रसन्न रहता है . अतः प्रतेक उच्च शिक्षा - दीक्षा के आकांक्षी मानव को गौसेवा, गौवंश के सुरक्षार्थ प्रचार- प्रसार जरूर करना चाहिए .और अधिक से अधिक लोगो को गौ-दीक्षा देनी चाहिए . ना जाने आपके द्वारा गौ-दीक्षित मानव कितना बड़ा गौ-भक्त निकल जाय . उसके द्वारा किया गया शुभ कर्म का कुछ अंस अपने आप आपके खाते में भी आने ही वाला है .
जिस तरह किसी जीव को गलत राह में फ़साने से आपको पाप कर्म का दोषी होने से दण्ड भुगता पड़ता है .उसी प्रकार जीव को सत कर्म की राह पर भेजने पर पुण्य लाभ का भागी भी अनायास मानव हो जाता है यह सनातन सत्य है .अतः गौ भक्ति के राह में आने वालो को सहयोगी बने रोड़े अटकने से आपके पुण्य नष्ट होने ही वाले है ..........
''नयाल सनातनी'' - संस्थापक अध्यक्ष ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार

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