सनातनी विचार !
श्रीमन नारायण भगवान मानव मात्र के सत-कर्मो पर तभी तक आनन्द की अनुभूति करते है,जब तक मानव अहंकार में कोई सत-कर्म ना करे।
रावन को अहंकार आया मिटा दिए , कंस को आया मिटा दिए। अनेक भगवान के अनन्य भक्तों को अहंकार आया अहंकार को मिटा दिए।
यह कहना कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगा की भगवान का भोजन ही अहंकार है।
''नयाल सनातनी''- राष्ट्रिय अध्यक्ष;- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
श्रीमन नारायण भगवान मानव मात्र के सत-कर्मो पर तभी तक आनन्द की अनुभूति करते है,जब तक मानव अहंकार में कोई सत-कर्म ना करे।
रावन को अहंकार आया मिटा दिए , कंस को आया मिटा दिए। अनेक भगवान के अनन्य भक्तों को अहंकार आया अहंकार को मिटा दिए।
यह कहना कदापि अतिशयोक्ति नहीं होगा की भगवान का भोजन ही अहंकार है।
''नयाल सनातनी''- राष्ट्रिय अध्यक्ष;- सर्वदलीय गौरक्षा मंच
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