सनातनी विचार !
पूजनीय है हरियाली युक्त धरती, गौमाता और नारी का स्थान .
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।। (मनु स्मृति 3-56)
जिस कुल में स्त्रीयाँ पूजित होती हैं, उस कुल से देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ स्त्रीयों का अपमान होता है, वहाँ सभी ज्ञानदि कर्म निष्फल होते हैं।
मनुष्य जीवन तब तक अपूर्ण है जब तक अर्धांगिनी साथ ना हो आपके सुभ कर्मो के साथ ना हो !
इस ब्रहमाण्ड में ये तीनो को सबसे ज्यादा धैर्यवान और माँ का दर्जा दिया गया है .पहली है धरती माता, दूसरी है गौ माता, तीसरी है नारी .इसलिए इनको पूजनीय कहाँ गया है। जो व्यक्ति लाखो वर्ष तक तप करे और इन तीनो का अपमान करे उसको उसकी तपश्या का फल नहीं मिलता यह सनातन सत्य है।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश को भी जब नारी बालक बना कर अपने ''स्तन पान'' करा सकती है तो तुच्छ मानव की हस्ती क्या ?
याद रहे आप कर्म-काण्ड,तंत्र-मन्त्र में कितने ही माहिर क्यों ना हो और कवि-विद्वान कितने ही बड़े हो गए हो पर धरती माता, गौ-माता और मानव जाती को जन्म देने वाली नारी का अपमान करते है तो आप का जीवन सुखदायी नहीं।
''नयाल सनातनी''
पूजनीय है हरियाली युक्त धरती, गौमाता और नारी का स्थान .
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।। (मनु स्मृति 3-56)
जिस कुल में स्त्रीयाँ पूजित होती हैं, उस कुल से देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ स्त्रीयों का अपमान होता है, वहाँ सभी ज्ञानदि कर्म निष्फल होते हैं।
मनुष्य जीवन तब तक अपूर्ण है जब तक अर्धांगिनी साथ ना हो आपके सुभ कर्मो के साथ ना हो !
इस ब्रहमाण्ड में ये तीनो को सबसे ज्यादा धैर्यवान और माँ का दर्जा दिया गया है .पहली है धरती माता, दूसरी है गौ माता, तीसरी है नारी .इसलिए इनको पूजनीय कहाँ गया है। जो व्यक्ति लाखो वर्ष तक तप करे और इन तीनो का अपमान करे उसको उसकी तपश्या का फल नहीं मिलता यह सनातन सत्य है।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश को भी जब नारी बालक बना कर अपने ''स्तन पान'' करा सकती है तो तुच्छ मानव की हस्ती क्या ?
याद रहे आप कर्म-काण्ड,तंत्र-मन्त्र में कितने ही माहिर क्यों ना हो और कवि-विद्वान कितने ही बड़े हो गए हो पर धरती माता, गौ-माता और मानव जाती को जन्म देने वाली नारी का अपमान करते है तो आप का जीवन सुखदायी नहीं।
''नयाल सनातनी''
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