सनातनी विचार !
जब मनुष्य का जन्म होता है वह किसी भी धर्म, जाति,वर्ण या संप्रदाय में नहीं बल्कि परमात्मा का पुत्र-पुत्री के रूप में जन्म लेता है। फिर स्वार्थी मनुष्य उसे धर्म,जाति,वर्ण और संप्रदाय में बाटता है। क्योकि उसे राजनीती करनी थी, राजनीती का मतलब जिस ओर ज्यादा संख्या उसका राजा। अब बताओं जो परमात्मा की सबसे बुद्दिमान कृति मानव- मानव में ही भेद करें वह श्री कृष्ण की सबसे ममतामयी और प्यारी कृति गाय का रक्षक सेवक कैसे हो सकता है ??? जिस गाय ने सिर्फ ममता लुटाना सिखाया है, अपने वंश के विनाशक कसाई को भी दूध देकर प्यार करने का सन्देश दिया है। उसके भक्त अपनी ही माँ, बहन, बेटी, ब्राहमण,असहाय, बुद्दी से हीन,दुर्बल और कमजोर से ईर्ष्या करे यह उसकी माँ शारदा द्वारा प्रदत बुद्दी और बल का कौशल नहीं हो सकता यह तो सिर्फ अपने कमजोर बुद्दी में लोगो को भ्रमित करने का एक मात्र सडयन्त्र ही हो सकता है ।
''नयाल सनातनी;; ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
जब मनुष्य का जन्म होता है वह किसी भी धर्म, जाति,वर्ण या संप्रदाय में नहीं बल्कि परमात्मा का पुत्र-पुत्री के रूप में जन्म लेता है। फिर स्वार्थी मनुष्य उसे धर्म,जाति,वर्ण और संप्रदाय में बाटता है। क्योकि उसे राजनीती करनी थी, राजनीती का मतलब जिस ओर ज्यादा संख्या उसका राजा। अब बताओं जो परमात्मा की सबसे बुद्दिमान कृति मानव- मानव में ही भेद करें वह श्री कृष्ण की सबसे ममतामयी और प्यारी कृति गाय का रक्षक सेवक कैसे हो सकता है ??? जिस गाय ने सिर्फ ममता लुटाना सिखाया है, अपने वंश के विनाशक कसाई को भी दूध देकर प्यार करने का सन्देश दिया है। उसके भक्त अपनी ही माँ, बहन, बेटी, ब्राहमण,असहाय, बुद्दी से हीन,दुर्बल और कमजोर से ईर्ष्या करे यह उसकी माँ शारदा द्वारा प्रदत बुद्दी और बल का कौशल नहीं हो सकता यह तो सिर्फ अपने कमजोर बुद्दी में लोगो को भ्रमित करने का एक मात्र सडयन्त्र ही हो सकता है ।
''नयाल सनातनी;; ;-- सर्वदलीय गौरक्षा मंच परिवार
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