सनातनी विचार !
सत-धर्म परायण एवं सद-गुण अपनाने से ही मानव महान होता है ! ना की भेष-भूषा बदलने, उच्च सिंहासन पर बैठ जाने से ! जिस प्रकार उच्च शिखर पर बैठने से कौआ गरुड़ बन श्रीहरि का वाहन नहीं बन सकता उसी प्रकार निन्दित कर्म करने वाला व्यक्ति किसी भी युग में सदा पूजनीय नहीं हो सकता। आखिर कौआ एक न एक दिन जांघ का मांस नोचता ही है। यह सनातन सत्य है।
''नयाल सनातनी''
सत-धर्म परायण एवं सद-गुण अपनाने से ही मानव महान होता है ! ना की भेष-भूषा बदलने, उच्च सिंहासन पर बैठ जाने से ! जिस प्रकार उच्च शिखर पर बैठने से कौआ गरुड़ बन श्रीहरि का वाहन नहीं बन सकता उसी प्रकार निन्दित कर्म करने वाला व्यक्ति किसी भी युग में सदा पूजनीय नहीं हो सकता। आखिर कौआ एक न एक दिन जांघ का मांस नोचता ही है। यह सनातन सत्य है।
''नयाल सनातनी''
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